आसियान का सदस्य नहीं है भारत, फिर भी समिट में बुलाते हैं इसके देश; दिलचस्प है इतिहास
- आसियान, यानी Association of Southeast Asian Nations (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन), एक क्षेत्रीय अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 8 अगस्त 1967 को हुई थी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय दो दिवसीय यात्रा पर लाओस की राजधानी में हैं। उन्होंने 21वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन के अवसर संबोधन दिया। मोदी ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि 21वीं सदी, जिसे एशियाई सदी भी कहा जाता है, भारत की और आसियान देशों की सदी है। वह आसियान देशों के नेताओं को संबोधित कर रहे थे जिनमें मलेशिया, थाइलैंड, ब्रूनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, म्यांमा, फिलीपीन, वियतनाम, लाओस और सिंगापुर शामिल हैं।
आसियान क्या है?
आसियान, यानी Association of Southeast Asian Nations (दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों का संगठन), एक क्षेत्रीय अंतर-सरकारी संगठन है, जिसकी स्थापना 8 अगस्त 1967 को हुई थी। इस संगठन का मुख्य उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सुरक्षा और सामाजिक सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। वर्तमान में, आसियान के 10 सदस्य देश हैं: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, थाईलैंड, ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, और कंबोडिया। पीएम मोदी फिलहाल आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए गए हैं।
आसियान-भारत शिखर सम्मेलन क्या है?
आसियान-भारत शिखर सम्मेलन (ASEAN-India Summit) दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (आसियान) और भारत के बीच होने वाली एक महत्वपूर्ण वार्षिक बैठक है। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत और आसियान देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और सुरक्षा सहयोग को बढ़ावा देना है।
भारत और आसियान के बीच संबंधों की शुरुआत 1992 में हुई थी, जब भारत को "सांवादिक साझेदार" (Dialogue Partner) के रूप में शामिल किया गया था। इसके बाद, 2002 में पहली बार आसियान-भारत शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। तब से यह सम्मेलन हर साल आयोजित होता है, जिसमें भारत और आसियान के सदस्य देशों के नेता एक मंच पर आकर विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करते हैं।
आसियान-भारत मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
2009 में, भारत और आसियान के बीच वस्तुओं पर मुक्त व्यापार समझौता (Free Trade Agreement) लागू हुआ, जिससे दोनों पक्षों के बीच व्यापार में तेजी आई। इसके अलावा, सेवाओं और निवेश पर भी समझौतों को लागू किया गया है, जिससे आर्थिक संबंध और मजबूत हुए हैं। इस शिखर सम्मेलन के तहत, दोनों पक्षों ने "आसियान-भारत फंड" की स्थापना की, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय विकास परियोजनाओं को वित्तपोषण प्रदान करना है। इसका उद्देश्य शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देना है।
आसियान की स्थापना का उद्देश्य
आसियान की स्थापना का मुख्य मकसद क्षेत्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखना था। 1960 के दशक में दक्षिण पूर्व एशियाई देशों को कई आंतरिक और बाहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। इसलिए, इन देशों ने मिलकर एक ऐसा संगठन बनाने का निश्चय किया, जो इन चुनौतियों से निपटने के लिए आपसी सहयोग और एकजुटता को बढ़ावा दे सके।
आसियान के रोचक तथ्य
शुरुआती सदस्य देश
1967 में जब आसियान की स्थापना हुई, तो इसके केवल पांच संस्थापक सदस्य थे – इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड। बाकी देश बाद में जुड़ते गए और 1999 में कंबोडिया इस संगठन का 10वां और अंतिम सदस्य बना।
आसियान का ध्वज और प्रतीक
आसियान के ध्वज में नीले, लाल, सफेद और पीले रंग का इस्तेमाल किया गया है। इसमें एक बंडल के रूप में दस धान के गुच्छे होते हैं, जो इस बात का प्रतीक हैं कि सभी दस देश एकजुट हैं। नीला रंग शांति और स्थिरता का प्रतीक है, लाल रंग शक्ति और जोश का, सफेद रंग शुद्धता और पीला रंग समृद्धि का प्रतीक है।
आसियान का चार्टर
2007 में आसियान ने अपना एक चार्टर अपनाया, जिसके तहत संगठन को कानूनी रूप से स्थापित किया गया। इस चार्टर का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग को और अधिक संगठित और प्रभावी बनाना था।
आसियान का वार्षिक शिखर सम्मेलन
हर साल आसियान शिखर सम्मेलन आयोजित होता है, जिसमें सभी सदस्य देशों के प्रमुख भाग लेते हैं। इस शिखर सम्मेलन में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जाती है, जैसे कि क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास, और सदस्य देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के उपाय।
आसियान-भारत सहयोग
भारत और आसियान के बीच का संबंध काफी पुराना है और भारत इस संगठन के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। 1992 में भारत को आसियान का "सांवादिक साझेदार" (Dialogue Partner) बनाया गया, और 2012 में इसे "रणनीतिक साझेदार" (Strategic Partner) का दर्जा दिया गया। भारत और आसियान के बीच व्यापार, सुरक्षा, संस्कृति, और शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ता जा रहा है। आसियान भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का केंद्र है। यह नीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में विस्तारित पड़ोस पर केंद्रित है। इसे 1990 के दशक में शुरू की गई ‘लुक ईस्ट’ नीति के अगले चरण के रूप में तैयार किया गया था।
भारत और आसियान का संबंध
सोवियत संघ (यूएसएसआर) के साथ भारत के घनिष्ठ ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। लेकिन बिना सोवियत संघ वाली दुनिया में भारत ने दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को गहरा करने की कोशिश की। दक्षिण-पूर्व एशिया से अपनी निकटता के कारण पूर्वोत्तर भारतीय राज्यों को इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभानी थी। इस नीति की मूल रूप से एक आर्थिक पहल के रूप में कल्पना की गई थी, क्योंकि पिछले कुछ दशकों में कई दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों ने तेजी से आर्थिक विकास देखा है। उदाहरण के लिए, ब्रुनेई, जिसका इस साल की शुरुआत में पीएम मोदी ने दौरा किया था, वह इस क्षेत्र में सबसे बड़े तेल और गैस उत्पादकों में से एक है।
भारत-आसियान संबंधों ने बाद में राजनीतिक, रणनीतिक और सांस्कृतिक आयाम प्राप्त किए, जिसमें संवाद और सहयोग के लिए संस्थागत तंत्र की स्थापना भी शामिल है। भारत आसियान प्लस सिक्स समूह का हिस्सा है, जिसमें चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। 2010 में, भारत और आसियान के बीच एक मुक्त व्यापार समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए और यह लागू हुआ। भारत 2020 में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (RCEP) में शामिल होने के लिए बातचीत का हिस्सा था, उसने अंततः ऐसा न करने का फैसला किया। हाल के वर्षों में, 2020 और 2021 के महामारी वर्षों को छोड़कर, मूल्य के संदर्भ में व्यापार में वृद्धि हुई है।
भारत और आसियान के बीच का रिश्ता प्राचीन काल से है, जब व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान होता था। आज भी, भारत और आसियान के बीच का रिश्ता उतना ही महत्वपूर्ण है। आसियान-भारत शिखर सम्मेलन 2002 में शुरू हुआ था, और तब से यह संबंध लगातार मजबूत हो रहा है। भारत आसियान के साथ मिलकर क्षेत्रीय शांति, स्थिरता, और विकास को बढ़ावा देने के लिए काम कर रहा है।
आसियान के सामने चुनौतिया
हालांकि आसियान ने अपने सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत किया है, लेकिन संगठन के सामने अभी भी कई चुनौतियाँ हैं। इनमें प्रमुख हैं – समुद्री सीमा विवाद, दक्षिण चीन सागर में चीन की गतिविधियों से उत्पन्न तनाव, और म्यांमार की राजनीतिक स्थिति।
आसियान आर्थिक समुदाय (AEC)
2015 में आसियान ने एक "आसियान आर्थिक समुदाय" (AEC) का गठन किया, जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को बढ़ावा देना है। इसके तहत सदस्य देशों के बीच व्यापार, सेवाओं, निवेश और कुशल श्रम के आदान-प्रदान को सुगम बनाया गया है।
आसियान की एकता का महत्व
आसियान ने दक्षिण पूर्व एशिया के देशों के बीच एकता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। संगठन की खासियत यह है कि इसके सदस्य देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करते और सबके बीच एक प्रकार का सामंजस्य बना रहता है।
आसियान ने दक्षिण पूर्व एशिया में एक मजबूत संगठन के रूप में अपनी पहचान बनाई है। इसके सदस्य देशों के बीच आर्थिक और राजनीतिक सहयोग के कारण क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी हुई है। भारत के साथ इसका सहयोग भी महत्वपूर्ण है, जो न केवल व्यापार और सुरक्षा में सुधार लाता है, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक रिश्तों को भी मजबूत करता है। आसियान का भविष्य उज्जवल दिखता है और उम्मीद की जाती है कि यह संगठन आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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