ईरान के न्यूक्लियर साइट पर क्या चल रहा? IAEA को मिले 'कुछ संकेत', रिपोर्ट ने बढ़ाई टेंशन
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव फिर बढ़ने लगा है। इस बीच संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी आईएईए ने ईरान के संदिग्ध परमाणु स्थल पिकैक्स माउंटेन पर निर्माण कार्य देखा है। आईएईए प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने गुरुवार को कहा कि वहां हलचल के कुछ संकेत मिले हैं, लेकिन अभी ठोस जानकारी नहीं है।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी आईएईए ने ईरान के संदिग्ध परमाणु स्थल पिकैक्स माउंटेन पर नई निर्माण गतिविधि देखी है। आईएईए प्रमुख राफेल मारियानो ग्रॉसी ने गुरुवार को ब्लूमबर्ग से कहा कि इस स्थल के आसपास हलचल के कुछ संकेत मिले हैं, लेकिन वहां असल में क्या हो रहा है, इसकी अभी कोई पक्की जानकारी नहीं है। बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध जैसे तनाव में थोड़ी देर का विराम आया था। उसके बाद स्थिति फिर बिगड़ने लगी है। ऐसे में यह खबर और संवेदनशील हो गई है।
गौरतलब है कि पिकैक्स माउंटेन एक बहुत सुरक्षित और किलेबंद जगह है। इस पर लंबे समय से परमाणु गतिविधियों का शक रहा है। यह स्थल तेहरान के मुख्य यूरेनियम संवर्धन संयंत्र नतान्ज के ठीक दक्षिण में है। नतान्ज पहले ही बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। आईएईए ने पिकैक्स माउंटेन की गहरी सुरंगों का अभी तक निरीक्षण नहीं किया है। एजेंसी दूर से ली गई तस्वीरों के आधार पर वहां नई हलचल का संकेत दे रही है। ग्रॉसी के अनुसार, कुछ संकेत मिले हैं कि इस निर्माण स्थल के आसपास गतिविधि हो रही है। हमारे पास वहां हो रही गतिविधियों की कोई ठोस जानकारी नहीं है।
कहां है पिकैक्स माउंटेन?
पिकैक्स माउंटेन तेहरान से करीब 220 किलोमीटर यानी लगभग 140 मील दक्षिण में जाग्रोस पहाड़ों में स्थित है। यहां दो गहरी सुरंगों का परिसर बना हुआ है। ईरान ने इस स्थल को हमलों से बचाने के लिए पहाड़ के अंदर तैयार किया है। आईएईए के शासी बोर्ड ने हाल ही में ईरान के परमाणु मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेज दिया है। वजह यह बताई गई है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों से जुड़े नियमों का पालन नहीं कर रहा। निरीक्षक ईरान के उच्च गुणवत्ता वाले, लगभग हथियार स्तर के यूरेनियम भंडार की सही जगह की पुष्टि नहीं कर पाए हैं।
इससे पहले सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज यानी सीएसआईएस ने नई सैटेलाइट तस्वीरें जारी की थीं। इन तस्वीरों में 2026 में पिकैक्स माउंटेन पर निर्माण कार्य तेज दिख रहा था। थिंक टैंक ने कहा कि इन तस्वीरों से यह साबित या खारिज नहीं किया जा सकता कि ईरान ने वहां सेंट्रीफ्यूज लगाए हैं। हालांकि गतिविधि के तरीके से लगता है कि यह सुविधा अभी यूरेनियम संवर्धन करने लायक नहीं बनी है। सीएसआईएस की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि 2026 में पिकैक्स माउंटेन पर सड़क बनाने का काम इस स्थल के पूरे इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा रहा। यानी वहां आवाजाही और निर्माण पहले के मुकाबले काफी बढ़ गया है।
ट्रंप ने भी किया है इस जगह का जिक्र
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक रिपब्लिकन रैली में इस स्थल का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमने पिकैक्स में कुछ हलचल देखी है। मैं ईरान को सलाह दूंगा कि वह चालाकी न करे, क्योंकि हमें उन्हें कड़ी टक्कर देनी पड़ सकती है। बता दें कि ट्रंप कम से कम जुलाई के मध्य से पिकैक्स माउंटेन पर हमले की चेतावनी देते आ रहे हैं। हालांकि अभी तक उस स्थाल पर हमला नहीं हुआ है। गौरतलब है कि इस स्थल पर गतिविधि करीब छह साल पहले शुरू हुई थी। उस समय तोड़फोड़ करने वालों ने ईरान की एक सेंट्रीफ्यूज कार्यशाला पर हमला किया था। उसके बाद ईरान ने कहा था कि अब वह सब कुछ पहाड़ के अंदर सुरंगों में रखेगा। ग्रॉसी के हवाले से कहा गया कि ईरान का दावा था कि हम सब कुछ सुरंगों में, पहाड़ के अंदर रखेंगे। यह जगह अभेद्य होगी और हमलों से सुरक्षित रहेगी।
ईरान का क्या आरोप?
इधर ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर गंभीर आरोप लगाया है। तेहरान का कहना है कि दोनों देश संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के निरीक्षकों के कानूनी अधिकार का सहारा लेकर ईरान के परमाणु संयंत्रों पर सैन्य हमले कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के आईएईए दूत ने 11 पन्नों का एक दस्तावेज जारी किया। उसमें लिखा गया है कि इस समझौते को अपनाने के कुछ ही घंटों बाद इजरायली शासन और अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ की गई कार्रवाई, प्रायोजकों के छिपे एजेंडे का ठोस सबूत है। दस्तावेज में राजनयिकों से गैरकानूनी हमलों की निंदा करने की मांग की गई है।


