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केस नंबर 1000, 2000 और 4000, नेतन्याहू पर क्या-क्या आरोप? जानें एक-एक बात

केस नंबर 1000, 2000 और 4000, नेतन्याहू पर क्या-क्या आरोप? जानें एक-एक बात

संक्षेप:

नेतन्याहू पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री चुने गए थे और अब यह उनका छठा कार्यकाल है। उन पर रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप लगाए गए हैं, जो 2016 से जारी जांचों से संबंधित हैं। अब तीन मामले संख्याओं के आधार पर ज्ञात हैं- केस 1000, केस 2000 और केस 4000…

Dec 02, 2025 05:38 pm ISTDevendra Kasyap भाषा
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इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने खिलाफ लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार के मुकदमे में क्षमादान का अनुरोध किया है। इस कदम ने उनके आलोचकों के बीच खतरे की घंटी बजा दी है कि वह कानून के शासन को दरकिनार करने की कोशिश कर रहे हैं। एक वीडियो संदेश में नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल की वर्तमान 'सुरक्षा और राजनीतिक' स्थिति के कारण उनके लिए हफ्ते में कई बार अदालत में पेश होना असंभव है। इजरायली राष्ट्रपति से क्षमादान प्रदान करने का उनका अनुरोध वर्षों से चल रहे एक मामले में नवीनतम मोड़ मात्र है। इसका इजरायल की न्याय व्यवस्था और अगले साल होने वाले चुनावों के मद्देनजर नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।

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क्या आरोप है?

नेतन्याहू निर्विवाद रूप से आधुनिक इजरायली राजनीति के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक व्यक्ति हैं। वह पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री चुने गए थे और अब यह उनका छठा कार्यकाल है। उन पर रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात के आरोप लगाए गए हैं, जो 2016 से जारी जांचों से संबंधित हैं। अब तीन मामले संख्याओं के आधार पर ज्ञात हैं- केस 1000, केस 2000 और केस 4000। मुकदमा 2020 में शुरू हुआ था।

  • केस 1000 में नेतन्याहू पर हॉलीवुड निर्माता अर्नोन मिलचन और ऑस्ट्रेलियाई अरबपति जेम्स पैकर से सिगार और शैंपेन सहित लगभग 2,00,000 अमेरिकी डॉलर (3,05,000 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर) मूल्य के उपहार प्राप्त करने का आरोप है।
  • केस 2000 प्रमुख येडियट अहरोनोट अखबार के प्रकाशक अर्नोन मोजेस के साथ नेतन्याहू की हुई कथित मुलाकातों से संबंधित है। अभियोजकों का कहना है कि मोजेस ने नेतन्याहू को उनके एक प्रतिद्वंद्वी अखबार पर प्रतिबंध लगाने के बदले में अनुकूल कवरेज की पेशकश की थी।
  • केस 4000 में एक संचार समूह 'बेजेक' से संबंधित है। अटॉर्नी-जनरल ने एक और पारस्परिक समझौते का आरोप लगाया है। आरोप के मुताबिक यह तय किया गया कि नेतन्याहू को ऑनलाइन मंच पर सकारात्मक रूप से चित्रित किया जाएगा, जिसके बदले में उन्हें नियामक परिवर्तनों का समर्थन करना होगा जिससे बेजेक के नियंत्रक शेयरधारक को लाभ होगा।

नेतन्याहू ने इन मामलों में किसी भी तरह की गड़बड़ी से लगातार इनकार किया है और कहा है कि वह साजिश का शिकार हैं। वर्ष 2021 में उन्होंने इन आरोपों को 'मनगढ़ंत और हास्यास्पद' बताया था। वर्ष 2024 में उन्होंने कहा था कि ये जांचें शुरू से ही गलत मकसद से थीं और कोई अपराध था ही नहीं, इसलिए उन्होंने जबरन एक अपराध ढूंढ़ लिया।

विशेषज्ञों ने बताया है कि किसी को किसी अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने के बाद ही क्षमादान दिया जा सकता है। लेकिन नेतन्याहू इस मामले में कोई जिम्मेदारी या अपराध स्वीकार करने की पेशकश नहीं कर रहे हैं, और संभवतः वह ऐसा कभी करेंगे भी नहीं। वह केवल क्षमादान प्रदान करने का अनुरोध कर रहे हैं, ताकि वह अपना काम जारी रख सकें।

इजरायल की न्यायिक प्रणाली की स्वतंत्रता

वर्ष 2020 में मुकदमा शुरू होने के बाद से, इस मामले में कई गवाहों ने गवाही दी है , जिनमें नेतन्याहू के कुछ पूर्व सहयोगी भी शामिल हैं, जिन्होंने 'प्ली बार्गेन' किया और सरकारी गवाह बन गए। इस प्रकार नेतन्याहू के खिलाफ कुछ बहुत ही निंदनीय सामग्री लाई गई है।

लेकिन वह राजनीतिक रूप से बहुत चतुर रहे हैं और हर मौके पर अन्य मुद्दों (विशेष रूप से गाजा युद्ध) का इस्तेमाल कार्यवाही को स्थगित करने या बाधित करने के लिए करते रहे हैं। अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद सुरक्षा कारणों से मुकदमे के दिनों की संख्या सीमित कर दी गई थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने युद्ध से निपटने के अपने तरीके के कारण बार-बार अपनी सुनवाई रद्द करने का अनुरोध किया है। वहीं, नेतन्याहू के समर्थकों को उनके क्षमादान के अनुरोध से कोई समस्या नहीं दिखती, लेकिन यह इजरायली न्याय व्यवस्था की स्वतंत्रता से जुड़े व्यापक प्रश्नों पर प्रकाश डालता है।

वर्ष 2023 की शुरुआत में नेतन्याहू सरकार ने न्यायिक व्यवस्था में आमूल-चूल परिवर्तन की योजनाएं पेश कीं, जिसके बारे में आलोचकों का कहना था कि इससे उच्चतम न्यायालय समेत इजराइली जांच-पड़ताल की व्यवस्था कमजोर हो जाएगी। नेतन्याहू इस प्रयास में शामिल नहीं थे, क्योंकि अटॉर्नी जनरल ने कहा था कि उनके भ्रष्टाचार के मुकदमे के कारण यह हितों का टकराव होगा, लेकिन उनके मंत्रिमंडल के अन्य मंत्री इस पर जोर दे रहे थे।

इस कदम के विरोध में पूरे इजराइल में नियमित रूप से बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। आलोचकों ने इसे इजराइली न्याय व्यवस्था की बुनियादी नींव पर सीधा हमला बताया। क्षमादान का अनुरोध अब इस व्यापक विमर्श का हिस्सा बन गया है, हालांकि दोनों मुद्दे औपचारिक रूप से जुड़े नहीं हैं। नेतन्याहू के विरोधियों का कहना है कि यह उनके और उनके गठबंधन के कानून के शासन के प्रति मौलिक रूप से भिन्न अवधारणा का एक और संकेत है।

नेतन्याहू का राजनीतिक अस्तित्व

यह सब नेतन्याहू के व्यक्तिगत और राजनीतिक अस्तित्व के बारे में है। उन्हें इसी महीने लिकुड पार्टी का नेता फिर से चुना गया है। उन्होंने अगले साल होने वाले चुनावों में फिर से प्रधानमंत्री पद के लिए चुनाव लड़ने की अपनी मंशा की घोषणा की है और उनको जीत की उम्मीद भी है। इजराइली मूल कानून के अनुसार, अगर नेतन्याहू को किसी गंभीर अपराध का दोषी ठहराया जाता है, तो वे चुनाव नहीं लड़ सकते। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इस समय उन्हें वास्तव में चुनाव लड़ने से रोका जाएगा या नहीं।

मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि नेतन्याहू नवंबर से जून तक चुनाव टालना चाहते हैं, इस उम्मीद में कि तब तक वे सऊदी अरब और इंडोनेशिया, दोनों के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के लिए समझौते कर पाएंगे। यह विदेश नीति के लाभों का इस्तेमाल अपनी घरेलू समस्याओं को दूर करने के लिए करने की उनकी कोशिशों के रूप से मेल खाता है।

चुनाव नजदीक आते ही वह अपनी स्थिति सुधारने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं और क्षमादान उनमें से एक है। अब उनके पास इस मामले को खत्म करने का यही एकमात्र विकल्प है, क्योंकि मुकदमा बहुत लंबा चल चुका है और किसी न किसी समय अदालत को फैसला सुनाना ही होगा।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें

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