अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को जहर दिया गया? ईरान और रूस पर शक, अचानक मौत पर उठे सवाल

लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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क्या अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को जहर दिया गया था? ग्राहम की अचानक मौत के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर कांस्पिरेसी थियरीज चल रही हैं। इनमें ईरान और रूस के ऊपर सवाल उठाए जा रहे हैं।

US Senator Lindsey Graham

क्या अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम को जहर दिया गया था? ग्राहम की अचानक मौत के बाद सोशल मीडिया पर इसको लेकर कांस्पिरेसी थियरीज चल रही हैं। इनमें ईरान और रूस के ऊपर सवाल उठाए जा रहे हैं। बता दें कि लिंडसे ग्राहम की मौत के बाद ईरानी मीडिया में एक बयान छपा था। इसमें कहा गया था कि मैं ईरान को बधाई देता हूं। ईरान विरोधी अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम अब नरक में जा चुका है। ग्राहम की मौत से कुछ दिन पहले, ईरान ने खुलेआम कहा था कि अमेरिकी सीनेटर निशाने पर है। गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगियों में शामिल रिपब्लिकन पार्टी के सीनेटर लिंडसे ग्राहम का एक संक्षिप्त और अचानक हुई बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 71 साल के थे।

सोशल मीडिया पर आशंकाएं

अब ग्राहम लिंडसे की मौत के बाद सोशल मीडिया पर तमाम तरह की आशंकाएं उठ रही हैं। इनमें दावा किया जा रहा है कि लिंडसे को या तो रूस या ईरान ने जहर देकर मारा है। हालांकि इन दावों के समर्थन में अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं प्रस्तुत किया गया है। सोशल मीडिया पोस्ट्स के मुताबिक मौत से पांच दिन पहले, इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कोर ने खुलेआम ग्राहम लिंडसे को खुलेआम धमकी दी गई थी। ग्राहम लिंडसे कीव भी गए थे, जहां उन्होंने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मुलाकात की थी। उन्होंने रूस के खिलाफ नई पाबंदियों के बारे में चर्चा की थी। रिपोर्ट में आगे दावा किया गया है कि मौत से 24 घंटे पहले ही वह अमेरिका लौटे थे और अचानक उनकी मौत हो गई। हालांकि कुछ लोगों का यह भी कहना है कि ग्राहम की मौत दिल की बीमारी से भी हो सकती है।

इन्होंने कर दी जांच की मांग

वहीं, कंजर्वेटिव टिप्पणीकार लॉरा लूमर भी उन लोगों में शामिल हैं, जिन्होंने ग्राहम की मौत के हालात पर सवाल उठाए। एक्स पर लिखी एक पोस्ट में उन्होंने लिखाकि सेनेटर को कुछ दिन पहले आईआरजीसी द्वारा धमकाया गया था। इसके बाद लॉरा ने सवाल उठाया कि क्या उन्हें विदेश में या अमेरिका लौटने के बाद किसी ने जहर दिया है? लॉरा ने ग्राहम की मौत पर कहाकि छोटी और अचानक बीमारी का क्या मतलब? क्या यह जहर देने का मामला हो सकता है। एक अन्य पोस्ट में, लूमर ने सवाल किया कि क्या रूस इसमें शामिल हो सकता है? उन्होंने यह सवाल इसलिए उठाया क्योंकि रूस ने अयातुल्लाह अली खामेनेई के तेहरान में हुए अंतिम संस्कार में एक प्रतिनिधिमंडल भेजा था। वहीं, ग्राहम हाल ही में मॉस्को के खिलाफ प्रतिबंधों का समर्थन करने यूक्रेन गए थे। साथ ही लॉरा ने जांच की मांग उठाई है।

इस लेखक ने भी उठाया सवाल

लॉरा लूमर के अलावा, अमेरिकी लेखक रब्बी श्मूली ने भी ग्राहम की मौत पर सवाल उठाया। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि मैं कांस्पिरेसी थियरी में यकीन नहीं करता। लेकिन ईरान और रूस के सबसे बड़े दुश्मन, लिंडसे ग्राहम की मौत, यूक्रेन से लौटने के एक दिन बाद होना बहुत ही संदिग्ध लगता है।

ईरान के आलोचक थे ग्राहम

लिंडसे ग्राहम अमेरिकी राजनीति का वह चेहरा हैं, जो लंबे समय से ईरान के सबसे बड़े आलोचकों में रहे हैं। वह लगातार तेहरान पर कड़े प्रतिबंधों का समर्थन करते रहे। साथ ही परमाणु समझौतों को फिर से सक्रिय करने के प्रयासों का भी विरोध करते रहे। ग्राहम हमेशा तर्क देते रहे कि अमेरिका को ईरान का सामना करना चाहिए न कि रियायतें देनी चाहिए। इसके अलावा वह इजरायल के घोर समर्थक थे।

दक्षिण कैरोलीना में जन्मे ग्राहम पहली बार 1994 में अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए चुने गए थे। इसके बाद साल 2002 में वह सीनेट के लिए चुने गए और जनवरी 2003 में सीनेटर के रूप में पदभार संभाला। वह इस वर्ष एक और कार्यकाल के लिए चुनाव लड़ रहे थे। पेशे से वकील ग्राहम अमेरिकी वायुसेना और वायुसेना रिजर्व में भी सेवा दे चुके थे तथा कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। 2016 के राष्ट्रपति पद के लिए रिपब्लिकन पार्टी के प्राथमिक चुनाव के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के साथ तीखी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के बावजूद, बाद में वह उनके सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में शामिल हो गए। ग्राहम ने यूक्रेन युद्ध के दौरान भारत के रूस से तेल खरीदने की भी मुखर आलोचना की थी।

Deepak Mishra

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मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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