राहत के लिए नहीं, आतंकवाद के लिए इस्तेमाल हुआ अमेरिका का पैसा; एलन मस्क का सनसनीखेज दावा

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मस्क के नए दावे से हड़कंप मच गया है। बयान के बाद यह बहस भी तेज हो गई है कि कि क्या संकटग्रस्त क्षेत्रों में USAID द्वारा बांटी जाने वाली अमेरिकी सहायता राशि का गलत इस्तेमाल हो रहा है।

USAID money used for terrorism says tesla ceo Elon Musk

दुनिया के सबसे अमीर शख्स और टेस्ला-स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने अमेरिका की ओर से गरीब देशों को दी जाने वाली मदद को लेकर एक बड़ा दावा कर दिया है। मस्क ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा है कि अमेरिकी एजेंसी USAID का पैसा आतंकवाद के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने एक रिपोर्ट को टैग करते हुए यह बात कही है, जिसके बाद इसकी खूब चर्चा हो रही है।

मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर यह पोस्ट लिखा। उन्होंने लिखा, "USAID की फंडिंग का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए किया गया।" इसके बाद यह सवाल एक बार फिर उठने शुरू हो गए हैं कि संकटग्रस्त क्षेत्रों में 'यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट' (USAID) द्वारा बांटी जाने वाली मानवीय सहायता का गलत इस्तेमाल हो रहा है।

एलन मस्क ने क्यों उठाया यह मुद्दा?

एलन मस्क ने एक्स पर एक यूजर के पोस्ट पर जवाब देते हुए यह बातें लिखी हैं। इस पोस्ट में उस घटना का जिक्र है जब सीरिया के एक नागरिक पर आरोप लगा था कि उसने आम नागरिकों की मदद के लिए भेजे गए लाखों डॉलर की अमेरिकी मदद को अल-कायदा से जुड़े एक आतंकवादी संगठन को डाइवर्ट कर दिया था।

90 लाख डॉलर की हेराफेरी

2024 में जारी एक प्रेस रिलीज के मुताबिक इस पूरे विवाद के केंद्र में 53 वर्षीय सीरियाई नागरिक महमूद अल हफयान है। अल हफयान सीरिया में एक NGO के क्षेत्रीय कार्यालय का प्रमुख था और उसके तहत करीब 160 कर्मचारी काम करते थे। उस पर आरोप है कि उसने सीरियाई नागरिकों के लिए आई 90 लाख डॉलर यानी करीब 75 करोड़ रुपये से अधिक की अमेरिकी राशि को गैर-कानूनी तरीके से आंतकी समूहों को दे दिया दिया। इसमें 'अल-नुसरा फ्रंट' (ANF) भी शामिल है, जो इराक में अल-कायदा से जुड़ा एक प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है।

अमेरिकी अधिकारियों ने खुद इसकी पुष्टि की थी। एफबीआई के विशेष एजेंट संजय विरमानी ने बताया था कि अल हफयान ने अमेरिकी पैसे से आतंकियों की मदद की और खुद की जेबें भरीं। वहीं दस्तावेजी सबूत और जांच में सामने आई रिपोर्ट्स भी इस बात की पुष्टि करती है कि अमेरिकी सहायता राशि कई मौकों पर चरमपंथी समूहों के हाथों में पहुंची है। 2024 में USAID-OIG ने एक एडवाइजरी में कहा था कि गाजा में भेजी जा रही सहायता के भी चोरी होने या गलत हाथों में जाने का बहुत अधिक जोखिम है।

Jagriti Kumari

लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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