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'भारत की सुरक्षा के लिए देंगे खतरनाक हथियार'; ट्रेड डील के बाद बदले अमेरिका के सुर

'भारत की सुरक्षा के लिए देंगे खतरनाक हथियार'; ट्रेड डील के बाद बदले अमेरिका के सुर

संक्षेप:

भारत और अमेरिका के बीच हुई ट्रेड डील के बाद दोनों ही देश एक बार फिर से रक्षा और आर्थिक क्षेत्र में साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जता रहे हैं। अमेरिकी आधिकारी ने इस मामले पर कहा कि वाशिंगटन भारत को और भी खतरनाक हथियार प्रणालियां देने पर विचार कर रहा है।

Feb 12, 2026 03:31 pm ISTUpendra Thapak लाइव हिन्दुस्तान
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USA India Trade Deal: अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रंप का शासन आने के बाद से भारत के साथ संबंधों में लगातार गिरावट आ रही थी। बात इस हद तक बिगड़ गई थी कि ट्रंप ने भारत की अर्थव्यवस्था को तो भला-बुरा कहा ही और फिर टैरिफ भी थोप दिए। अब ट्रेड डील के बाद एक बार फिर से दोनों देशों से संबंधों में गर्मजोशी देखने को मिल रही है। अमेरिका की तरफ से भारत के साथ रक्षा और आर्थिक सहयोग का दायरा बढ़ाने के संकेत दिए गए हैं।

अमेरिकी विदेश विभाग में एशियाई मामलों के सहायक सचिव पॉल कपूर ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देश लगातार रक्षा संबंधी खरीद पर बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "अमेरिका और भारत लगातार अधिक हथियार प्रणालियों की खरीद पर काम कर रहे हैं। इनसे भारत की रक्षा क्षमता और भी ज्यादा मजबूत होगी और इसके साथ ही अमेरिका में भी लोगों को रोजगार मिलेगा।" कपूर ने इस बात की पुष्टि की है कि कई तरह के खतरनाक हथियार, जो कि भारत की सुरक्षा को मजबूती प्रदान करेंगे, इस वक्त दोनों देशों के बीच में चर्चा का विषय बने हुए हैं।

गौरतलब है कि अमेरिकी अधिकारी का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत की तरफ से 114 राफेल फाइटर जेट को खरीदने की मंजूरी दी जा चुकी है और इसके साथ ही अमेरिका के साथ समुद्री निगरानी विमानों समेत कई बड़ी हथियार प्रणालियों को खरीदने की बात चल रही है।

पिछले एक साल से जारी तनातनी के बाद भारत और अमेरिका एक ट्रेड डील पर सहमति बनाने में कामयाब हुए हैं। इसके बाद अमेरिका की तरफ से भारत के ऊपर लगाया गया 50 फीसदी टैरिफ को घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया। इस समझौते के तहत भारत ने लगभग 5 साल में 500 बिलियन डॉलर के अमेरिकी सामान को खरीदने का इरादा जताया है। इसमें मुख्य तौर पर ऊर्जा उत्पाद, हवाई जहाज और उनके कीमती पुर्जे, धातुएं और टेक्नोलॉजी शामिल है। हालांकि दोनों तरफ से इस बात को साफ किया गया है कि भारत ने इस 500 बिलियन डॉलर की खरीद पर प्रतिबद्धता नहीं जताई है, बल्कि खरीदने का इरादा जताया है।

आपको बता दें, भारत और अमेरिका दोनों ही देश पिछले लगभग दो दशकों से लगातार रक्षा संबंधों को मजबूत कर रहे हैं। भारत का अमेरिका और रूस दोनों ही देशों के साथ दोस्ताना संबंध है। आजादी के बाद से ही रूस वैश्विक परिदृश्य में भारत का एक घनिष्ठ और भरोसेमंद दोस्त है। अमेरिका इस दोस्ती को तोड़कर भारत को अपने खेमे में करने का प्रयास कई बार कर चुका है। इसी प्रक्रिया में जब भारत को पांचवी पीढ़ी के विमानों की जरूरत है, तो ट्रंप प्रशासन लगातार नई दिल्ली के ऊपर अमेरिकी एफ-35 विमान खरीदने का दबाव बना रहे थे। पीएम मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान भी ट्रंप ने इस बात का जिक्र किया था। हालांकि, भारत ने ऐसी किसी भी खरीद को लेकर कोई बात नहीं की।

इस डील में भी इन फाइटर जेट्स को लेकर कोई बात नहीं हुई है। हालांकि, दोनों देशों ने रक्षा और आर्थिक क्षेत्र में मजबूती के साथ आगे बढ़ने की बात की है। अमेरिका का कहना है कि यह समझौता भारत की स्वायत्तता और सुरक्षा को मजबूत करेगा और अमेरिका में भी लोगों को फायदा पहुंचाएगा।

Upendra Thapak

लेखक के बारे में

Upendra Thapak

उपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।

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