मेरे ससुर ने कभी नहीं कहा कि... जेडी वेंस ने भारतीय ससुराल वालों को बताया महान; खूब की तारीफ
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने अपने भारतीय ससुराल वालों की जमकर तारीफ की। वहीं H-1B वीजा धोखाधड़ी, ग्रीन कार्ड बैकलॉग और 'अमेरिका फर्स्ट' नीति पर अपनी बेबाक राय रखी। पढ़ें पूरी खबर।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मंगलवार को अपने भारतीय मूल के ससुराल वालों की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि उनके ससुराल वाले इस बात का बेहतरीन उदाहरण हैं कि प्रवासियों ने किस तरह अमेरिका को समृद्ध किया है और कैसे वे अमेरिकी हितों को सर्वोपरि रखते हैं। इसके साथ ही, वेंस ने H-1B वीजा कार्यक्रम के दुरुपयोग पर भी निशाना साधा।
जॉर्जिया विश्वविद्यालय में उठा H-1B और ग्रीन कार्ड का मुद्दा
जॉर्जिया विश्वविद्यालय में 'टर्निंग पॉइंट यूएसए' के एक कार्यक्रम के दौरान एक भारतीय मूल की महिला ने जेडी वेंस से सवाल पूछा। महिला ने बताया कि उसका परिवार पिछले एक दशक से अधिक समय से अमेरिका में रह रहा है, लेकिन देश-आधारित कोटे और बैकलॉग के कारण H-1B वीजा वाले परिवारों को ग्रीन कार्ड के लिए बेहद लंबा इंतजार करना पड़ता है। इस सवाल के जवाब में जेडी वेंस ने अपनी पत्नी उषा वेंस के परिवार का जिक्र किया, जिनकी जड़ें भारत के आंध्र प्रदेश से जुड़ी हैं।
H-1B वीजा प्रणाली में 'धोखाधड़ी' पर चिंता
वेंस ने स्पष्ट किया कि वह प्रवासियों के योगदान का सम्मान करते हैं, लेकिन वर्तमान वीजा प्रणाली की खामियों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा: मुझे लगता है कि H-1B प्रणाली में काफी धोखाधड़ी है। आप एक तरफ यह मान सकते हैं कि H-1B प्रणाली में बहुत सी धोखाधड़ी होती है और साथ ही यह भी विश्वास कर सकते हैं कि अतीत में जो लोग अमेरिका आए हैं, उन्होंने इस देश को समृद्ध किया है। उन्होंने आगे कहा- मैंने भारत से आए प्रवासियों की बेटी से शादी की है। मैं अपने ससुराल वालों से बहुत प्यार करता हूं, वे बेहतरीन लोग हैं और उन्होंने अमेरिका के विकास में बड़ा योगदान दिया है।
नागरिकता का अर्थ है 'अमेरिका को प्राथमिकता देना'
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी नागरिक बनने के साथ एक बड़ी जिम्मेदारी भी आती है- देश को सबसे ऊपर रखना। वेंस ने कहा, "जब आप अमेरिकी नागरिक बनते हैं, तो इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि आपका परिवार 9 पीढ़ियों से अमेरिका में रह रहा है या आप अमेरिका आने वाली पहली पीढ़ी हैं। आपकी जिम्मेदारी यह है कि आपको अमेरिका के सर्वोत्तम हितों के बारे में सोचना होगा, न कि उस देश के बारे में जहां से आप आए हैं या किसी विशेष समूह के बारे में। आपको खुद को केवल एक अमेरिकी के रूप में देखना होगा।
ससुर का दिया उदाहरण
अपनी बात को पुख्ता करने के लिए वेंस ने अपने ससुर को एक अद्भुत व्यक्ति बताते हुए उनका उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, "मेरे ससुर, जो भारत से अमेरिका आए, यहां शिक्षा प्राप्त की और अमेरिकी नागरिक बने... उन्होंने मेरी जिंदगी में कभी, एक बार भी मुझसे यह नहीं कहा कि 'तुम्हें यह करना चाहिए क्योंकि यह उस देश (भारत) के हित में है जहां से मैं आया हूं'।"
वेंस के अनुसार, जब प्रवासी इस तरह का दृष्टिकोण अपनाते हैं और 'अमेरिका फर्स्ट' की सोच रखते हैं, तो इससे स्थानीय अमेरिकियों के मन में प्रवासियों के प्रति स्वागत का भाव पैदा होता है। उन्होंने कहा कि आव्रजन नीति को लेकर अमेरिका का यही नजरिया होना चाहिए।
ट्रंप प्रशासन की सख्त आव्रजन नीतियां
वेंस की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन आव्रजन और नागरिकता को लेकर बेहद सख्त रुख अपना रहा है। 'डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी' के आंकड़ों के अनुसार, इसी साल जनवरी में अमेरिकी आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) की हिरासत में बंद प्रवासियों की संख्या एजेंसी के इतिहास में पहली बार 70,000 के पार पहुंच गई है, जो प्रशासन की सख्ती को दर्शाता है।
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अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
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