अभी नहीं दे पाएंगे हथियार, तनातनी के बीच अब अमेरिका ने यूरोप से क्यों कहा ऐसा?

Jagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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ये हथियार विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम (FMS) के तहत खरीदे गए थे, लेकिन अभी तक डिलीवर नहीं हुए हैं। अमेरिका ने बातचीत में यूरोपीय देशों से कहा है कि डिलीवरी में अभी और देरी हो सकती है

अभी नहीं दे पाएंगे हथियार, तनातनी के बीच अब अमेरिका ने यूरोप से क्यों कहा ऐसा?

ईरान संग शुरू हुए हालिया युद्ध के बाद अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच की खाई खुलकर नजर आने लगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पश्चिमी देशों से युद्ध में अमेरिका का साथ ना देने को लेकर भड़के हुए हैं। वहीं कई यूरोपीय देशों ने खुलकर ना सिर्फ इस युद्ध की निंदा की है, बल्कि साफ तौर पर यह भी कहा है कि वे इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनेंगे। इससे ट्रंप बौखलाए हुए हैं। इस बीच अब अमेरिका ने यूरोप को हथियारों की सप्लाई पर भी रोक लगा दी है।

अमेरिका ने कुछ यूरोपीय देशों को बताया है कि पहले से तय किए गए हथियारों की सप्लाई में देरी हो सकती है। अमेरिका ने इसकी वजह ईरान युद्ध को ही बताया है। अमेरिका की तरफ से कहा गया है कि युद्ध की वजह से हथियारों का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है। इस मामले की जानकारी रखने वाले कुछ सूत्रों ने बताया है कि बाल्टिक और स्कैंडिनेविया क्षेत्र के कई देश इससे प्रभावित होंगे।

डिलीवरी में देरी

सूत्रों के मुताबिक, ये हथियार विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम (FMS) के तहत खरीदे गए थे, लेकिन अभी तक डिलीवर नहीं हुए हैं। हाल ही में अमेरिका ने बातचीत में यूरोपीय देशों को साफ कहा दिया है कि इन डिलीवरी में और देरी हो सकती है। हालांकि वाइट हाउस और अमेरिका के विदेश विभाग ने इस पर कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि अभी ये हथियार मिडिल ईस्ट के युद्ध के लिए जरूरी हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूरोपीय देश अमेरिका और इजरायल की मदद नहीं कर रहे हैं, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के मुद्दे पर, जिससे अमेरिका पर भी सारा भार है।

हथियारों की पहले से ही कमी

गौरतलब है कि ईरान युद्ध से पहले भी अमेरिका में हथियारों की कमी जैसी रिपोर्ट्स सामने आई थीं। 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध और 2023 में गाजा में इजरायल के ऑपरेशन के दौरान अमेरिका ने अरबों डॉलर के हथियार, जैसे आर्टिलरी सिस्टम, गोला-बारूद और एंटी-टैंक मिसाइल्स, खर्च किए हैं। वहीं ईरान के खिलाफ अभियान शुरू होने के बाद तेहरान ने खाड़ी देशों पर सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे हैं और मिसाइलों के स्टॉक पर दबाव पड़ा है।

ट्रंप की मंशा पर भी सवाल

यूरोपीय देश FMS प्रोग्राम के तहत अमेरिका से हथियार खरीदते हैं। इसके तहत अमेरिका उन्हें लॉजिस्टिक सपोर्ट भी देता है। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से अमेरिका ने यूरोपीय NATO देशों पर ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी हथियार खरीदने का दबाव बनाया है। ट्रंप ने कहा है कि यूरोप को अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी खुद उठानी चाहिए। ट्रंप नाटो देशों पर लगातार हमलवार हैं और यहां तक कि अमेरिका को इससे अलग करने की बात भी कही है।

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लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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