होर्मुज खुलवाने ट्रंप का ‘त्रिपोली’ प्लान, कितना घातक है यह अमेरिकी बेड़ा; ईरान के लिए नया चैलेंज

Deepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका ने एक और जंगी जहाज उतारने को तैयार है। जहाज का नाम है त्रिपोली। ऐसे समय में जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने की जी-तोड़ कोशिश में जुटे हैं, इस जंगी जहाज की युद्धक्षेत्र में एंट्री अहम मानी जा रही है।

ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका ने एक और जंगी जहाज उतारने को तैयार है। जहाज का नाम है त्रिपोली। ऐसे समय में जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुलवाने की जी-तोड़ कोशिश में जुटे हैं, इस जंगी जहाज की युद्धक्षेत्र में एंट्री अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान की लड़ाई में यह जहाज अहम भूमिका निभा सकता है। 50 हजार टन वजनी यह जहाज, एक महत्वाकांक्षी असॉल्ट शिप है। इसमें 31वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) के 2000 से अधिक मरीन शामिल हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक अधिकारी ने कह कि यूनिट और युद्धपोत त्रिपोली को पश्चिम एशिया जाने का आदेश दिया गया है। इस कदम से क्षेत्र में सैनिकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी।

अभी कहां है अमेरिकी जहाज
बेहद उच्च श्रेणी के फाइटर्स से लैस यह विशाल जहाज फिलहाल श्रीलंका के दक्षिण में, दक्षिण भारतीय महासागर में है। इसे ओमान की खाड़ी में यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की ताकत बढ़ाने के लिए भेजा जा रहा है। बात करें इसकी खासियतों की तो यूएसएस त्रिपोली 844 फीट लंबा है (1106 फीट लंबा यूएसएस फोर्ड दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत है)। इस पर एफ-35, एमवी-22 ओस्प्रे और एमएच60S सीहॉक हेलीकॉप्टर रखे हुए हैं। इसके साथ लैंडिंग शिप डेक्स भी हैं ताकि दुश्मी की जमीन पर मरीन को उतारा जा सके। माना जा रहा है कि 22-23 मार्च के आस-पास यह युद्धक्षेत्र में पहुंच सकता है।

क्या होर्मुज खुलवाने का दांव है त्रिपोली
इन सबके बीच माना जा रहा है कि यूएसएस त्रिपोली को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलवाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। बता दें कि अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर रखा है। मात्र 33 किमी के इस जलडमरूमध्य से दुनिया भर को ईंधन सप्लाई के जहाज गुजरते हैं। ईरान ने खुली चेतावनी दे रखी है कि वह अमेरिका और इजरायल के जहाजों से यहां से कतई नहीं गुजरने देगा। ईरान के इस रुख के बाद ट्रंप ने अपने तमाम सहयोगी देशों से अपील की थी कि वह होर्मुज को खुलावाने के लिए अपने जंगी जहाज भेजें। लेकिन एकाध को छोड़ किसी देश की तरफ से उन्हें सकारात्मक जवाब नहीं मिला। ऐसे में त्रिपोली के जरिए अमेरिका एक बड़ा दांव खेल सकता है।

ट्रंप ने खुले छोड़ रखे हैं विकल्प
बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान में सैनिक भेजने के लिए विकल्प खुले रख छोड़े हैं। गुरुवार रात मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ‘नहीं, मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं…अगर मैं भेजता भी, तो निश्चित रूप से मैं आपको नहीं बताता। लेकिन मैं सैनिक नहीं भेज रहा हूं। माना जा रहा है कि युद्ध की स्थिति और बदलते हालात को देखते हुए, अमेरिका जमीन पर सैनिक भेजने से पहले घोषणा नहीं करेगा। यह सबकुछ युद्ध के हालात और ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर हमलों पर तय करेगा।

नेतन्याहू ने क्या कहा
इस बीच इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार को कहा कि केवल हवाई हमलों से ईरान के शासन को नहीं उखाड़ा जा सकता, बल्कि इसके लिए जमीनी कार्रवाई की जरूरत होगी।

नेतन्याहू ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहाकि इजरायल और अमेरिका हवाई हमलों से ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रमों को नष्ट कर रहे हैं। लेकिन सार्थक परिवर्तन केवल हवाई अभियानों से संभव नहीं है। उन्होंने कहाकि क्रांति केवल हवा से नहीं आ सकती, इसके लिए जमीनी कार्रवाई भी जरूरी है। उन्होंने यह साझा करने से इनकार कर दिया कि इस जमीनी कार्रवाई का स्वरूप क्या होगा।

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मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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