
एक गलती ने बिगाड़ा मचाडो का खेल, राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन देने से ट्रंप का इनकार
वाइट हाउस के करीबी सूत्र का कहना है कि मचाडो के नोबेल शांति पुरस्कार को स्वीकार करने की वजह से ट्रंप उनसे नाराज हैं। अगर उस समय पर वह इस पुरस्कार को अस्वीकार करके ट्रंप को दे देतीं, तो वह आज वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद के लिए अमेरिका की पहली पसंद होतीं।
डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिकी सेना की वेनेजुएला पर की गई कार्रवाई की पूरी दुनिया में चर्चा हो रही है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर अब क्या होगा। एक दशक से ज्यादा समय से वेनेजुएला की सत्ता पर बैठे मादुरो के बाद वहां कौन शासन संभालेगा। इस लिस्ट में विशेषज्ञों की तरफ से सबसे पहला नाम नोबेल शांति पुरस्कार विजेता और वेनेजुएला में नेता विपक्ष मचाडो का सामने आ रहा था, लेकिन ट्रंप ने खुले आम उनका समर्थन करने से इनकार कर दिया। अब ऐसा दावा किया जा रहा है कि माचाडो का नोबेल पुरस्कार को स्वीकार करना ट्रंप को पसंद नहीं आया, इसलिए उन्होंने माचाडो को समर्थन देने से इनकार कर दिया है।
वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में वाइट हाउस के दो करीबी लोगों ने दावा किया है कि इस पुरस्कार पर ट्रंप की नजर काफी पहले से थी, लेकिन मचाडो ने इसे स्वीकार करके अमेरिकी राष्ट्रपति को नाराज कर दिया। इन लोगों में से एक ने दावा किया कि ट्रंप की नजर में यह मचाडो का सबसे बड़ा पाप है, जबकि दूसरे ने कहा कि इस पुरस्कार को लेने की वजह से ही माचाडो वेनेजुएला की राष्ट्रपति बनने का मौका चूक गईं।
करीबी व्यक्ति ने दावा किया, “अगर उन्होंने (माचाडो) ने इसे ठुकरा दिया, और कहा होता कि मैं इसे स्वीकार नहीं कर सकती, इस पर राष्ट्रपति ट्रंप का अधिकार है, तो आज वह वेनेजुएला में राष्ट्रपति पद के लिए अमेरिका और ट्रंप की पहली पसंद होतीं।”
गौरतलब है कि मादुरो को उनके घर से उठाने के बाद की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या वह मचाडो को राष्ट्रपति पद के लिए समर्थन देंगे। इस पर ट्रंप ने सीधा इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि मचाडो के पास वेनेजुएला में समर्थन नहीं है और न ही उनकी कोई इज्जत करता है।
मादुरो के बाद मचाडो की सबसे ज्यादा चर्चा क्यों?
मारिया कोरेना मचाडो वेनेजुएला में मादुरो की सबसे बड़ी आलोचक मानी जाती हैं। वह वहाँ की मुख्य विपक्षी नेताओं में भी शामिल हैं। हाल ही में जब उन्होंने 2025 का नोबेल पुरस्कार जीता, तो वह चर्चा में आ गई थीं, क्योंकि ट्रंप लगातार नोबेल की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें यह नहीं मिला।
मारिया अमेरिका की समर्थक मानी जाती हैं। ऐसे में अमेरिका ने जब सैन्य शक्ति के दम पर मादुरो को सत्ता से हटाया तो ऐसे कयास लगाए जा रहे थे कि राष्ट्रपति पद के लिए ट्रंप मारिया का नाम आगे बढ़ा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

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Upendra Thapakलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




