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दमिश्क के एयरबेस पर सैन्य तैनाती बढ़ाएगा अमेरिका, ट्रंप का सीरिया प्लान क्या है?

दमिश्क के एयरबेस पर सैन्य तैनाती बढ़ाएगा अमेरिका, ट्रंप का सीरिया प्लान क्या है?

संक्षेप: अमेरिका सीरिया की राजधानी दमिश्क स्थित एक हवाई अड्डे पर अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसका प्रमुख लक्ष्य वाशिंगटन द्वारा मध्यस्थता वाले सीरिया-इजरायल सुरक्षा समझौते को प्रभावी रूप से लागू करने में सहायता प्रदान करना है।

Thu, 6 Nov 2025 07:32 PMDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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अमेरिका सीरिया की राजधानी दमिश्क स्थित एक हवाई अड्डे पर अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। इसका प्रमुख लक्ष्य वाशिंगटन द्वारा मध्यस्थता वाले सीरिया-इजरायल सुरक्षा समझौते को प्रभावी रूप से लागू करने में सहायता प्रदान करना है। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने दो पश्चिमी अधिकारियों और एक सीरियाई रक्षा अधिकारी समेत विश्वसनीय सूत्रों के आधार पर खबर दी है कि अमेरिका इस संभावित समझौते की निगरानी के लिए इस एयरबेस का इस्तेमाल करने की सोच रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर अभी तक कोई सरकारी पुष्टि नहीं हुई है।

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अमेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वाशिंगटन लगातार सीरिया में अपनी जरूरी सैन्य स्थिति का आकलन कर रहा है, खासकर इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) से प्रभावी तरीके से मुकाबला करने के लिए। उन्होंने कहा कि हम उन जगहों या संभावित ठिकानों पर टिप्पणी नहीं करते जहां हमारी सेनाएं सक्रिय रहती हैं। दूसरी ओर एक अन्य अधिकारी के अनुसार, पेंटागन ने पिछले दो महीनों में इस बेस पर कई गुप्त टोही मिशनों के जरिए अपनी तैयारियों को तेज किया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इन टोही अभियानों से स्पष्ट हुआ है कि एयरबेस का लंबा रनवे तुरंत इस्तेमाल के लिए पूरी तरह तैयार है। इसी बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप सोमवार को वाइट हाउस में सीरियाई राष्ट्रपति अहमद अल-शरा से भेंट करेंगे। यह किसी सीरियाई राष्ट्रपति की अमेरिका की मेजबानी करने वाली पहली ऐतिहासिक यात्रा होगी।

रॉयटर्स के अनुसार, ये नई अमेरिकी योजनाएं क्षेत्र में संघर्ष विराम समझौतों की निगरानी के लिए स्थापित की जा रही दो अन्य अमेरिकी सैन्य चौकियों से मेल खाती नजर आ रही हैं। इनमें से एक लेबनान में है, जो हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच पिछले साल के युद्धविराम पर कड़ी नजर रखती है, जबकि दूसरी इजरायल में स्थित है, जो हमास और इजरायल के बीच ट्रंप काल के युद्धविराम की निगरानी करती है।

इस्लामिक स्टेट के खिलाफ जंग में कुर्द-नेतृत्व वाली सेनाओं को समर्थन देने के उद्देश्य से अमेरिका ने पूर्वोत्तर सीरिया में पहले से ही सैनिक तैनात किए हुए हैं। इस वर्ष अप्रैल में पेंटागन ने घोषणा की थी कि वहां सैनिकों की संख्या को आधा कर 1000 तक सीमित कर दिया जाएगा। रॉयटर्स ने बेस पर चर्चाओं से वाकिफ एक व्यक्ति के हवाले से कहा कि इस फैसले पर अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर की 12 सितंबर को दमिश्क यात्रा के दौरान बातचीत हुई थी।

CENTCOM के एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, कूपर और सीरिया में अमेरिकी राजदूत थॉमस बैरक ने शरा से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने आईएस के विरुद्ध सीरिया की लड़ाई में उनके योगदान की सराहना की, जो ट्रंप के विजन ( एक समृद्ध मध्य पूर्व और एक शांतिपूर्ण, स्थिर सीरिया जो अपने पड़ोसियों के साथ सद्भाव में रहे) को साकार करने में सहायक सिद्ध हो सकता है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें

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