न अमेरिका माना, न आसिम मुनीर की सुन रहा ईरान; देशों के चक्कर काट रहा मीडिएटर पाकिस्तान

Jagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि ईरान के साथ समझौते पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है और आखिरी पहलुओं पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा था कि डील की घोषणा जल्द ही की जाएगी।

न अमेरिका माना, न आसिम मुनीर की सुन रहा ईरान; देशों के चक्कर काट रहा मीडिएटर पाकिस्तान

अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनने के चक्कर में पाकिस्तान की हालत खास्ता हो चुकी है। ना ही अमेरिका पाकिस्तान की बात सुन रहा और ना ही शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर मिलकर ईरान को बातचीत के लिए मना पाए हैं। अब पाकिस्तान मदद के लिए चीन की शरण में पहुंचा है।

चीनी सरकारी टेलीविजन की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर भी बीजिंग पहुंचे हैं। यहां शरीफ और मुनीर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य अधिकारियों के मिलकर इस मुद्दे का समाधान ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। यह दौरा इसीलिए भी अहम है कि क्योंकि इससे ठीक पहले आसिम मुनीर ईरान में थे।

तेहरान में सीक्रेट मीटिंग

बीजिंग रवाना होने से पहले शुक्रवार और शनिवार को जनरल आसिम मुनीर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के साथ अचानक ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे थे। यहां उन्होंने ईरान के शीर्ष अधिकारियों और सैन्य कमांडरों के साथ कई दौर की गुप्त बैठकें कीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस दौरे का मकसद कतर और पाकिस्तान द्वारा तैयार किए गए 30 दिनों के सीजफायर मसौदे पर तेहरान की सहमति हासिल करना था।

क्या बोले शहबाज शरीफ?

अब शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर ने चीन में एक अहम बैठक की। इस बैठक के दौरान पीएम शरीफ ने बातचीत की जरूरत पर जोर देते हुए कहा है कि पूरी दुनिया इस समय एक बेहद नाजुक और मोड़ से गुजर रही है। उन्होंने एक बयान में मुनीर के चीन दौरे पर भी बात की। शहबाज शरीफ ने कहा, “पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने में एक ईमानदार भूमिका निभाई है। फील्ड मार्शल तेहरान में थे और वे इस दौरे को भी छोड़ना नहीं चाहते थे।” शहबाज शरीफ ने आगे सहयोग के लिए चीन का शुक्रिया भी अदा किया। उन्होंने कहा, "चीजें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। मैं शांति को बढ़ावा देने में चीन के सहयोग के लिए उसका धन्यवाद करना चाहूंगा।" गौरतलब है कि इससे पहले चीन ने भी संकेत दिए हैं कि वह इस युद्ध में समझौते के लिए सकारात्मक योगदान देने के लिए तैयार है।

उछल रहा पाक, असली जोर लगा रहा चीन

बता दें कि चीन युद्ध की शुरुआत से ही इस जंग को सुलझाने में पर्दे के पीछे रहकर अहम भूमिका निभा रहा है। बीते महीने पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच सुलह के लिए इस्लामाबाद में एक बड़ी बैठक भी बुलाई, लेकिन नतीजा नहीं निकल पाया। दोनों देशों के बीच शुरुआत में हुए दस दिनों के सीजफायर में भी चीन की भूमिका अहम रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन ने ईरानी अधिकारियों को 20 से ज्यादा फोन कॉल किए, तब जाकर ईरान इसके लिए तैयार हुआ था।

कैसे बनेगी बात?

इधर अमेरिका और ईरान के बीच डील ना होने और बातचीत रुकने से तेल आपूर्ति पर संकट गहराता जा रहा है। कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे हैं। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भी अब तक पूरी तरह खुल नहीं पाया है, जिससे भारत में भी चिंताएं बढ़ गई हैं। वहीं चीन भी इससे परेशान है। ईरान अमेरिका पर नाजायज मांगें थोपने का आरोप लगा रहा है, तो वहीं अमेरिका तेहरान के परमाणु कार्यक्रम पर ब्रेक लगाए बिना कोई डील नहीं करना चाहता। ऐसे में बातचीत पर हल नहीं निकल पा रहा। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान संग कुछ मुद्दों पर सहमति बनी है और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी।

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लेखक के बारे में

Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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