ट्रंप का मिशन होर्मुज फेल? US ने रोक दिया ऑपरेशन फ्रीडम; ईरान को लेकर क्या अब दावा

Jagriti Kumari लाइव हिन्दुस्तान
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। इससे पहले ट्रंप ने यहां से जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए सोमवार को 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' शुरू करने का ऐलान किया था। अमेरिका ने करीब 15000 सैनिकों को भी तैनात किया था।

ट्रंप का मिशन होर्मुज फेल? US ने रोक दिया ऑपरेशन फ्रीडम; ईरान को लेकर क्या अब दावा

अमेरिका और ईरान के बीच शुरू हुई हालिया युद्ध के बाद से मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रही तनातनी के बीच मंगलवार को एक बार फिर दोनों पक्षों ने एक दूसरे पर युद्धविराम के आरोप लगाए। होर्मुज में अमेरिकी एक्शन के बाद ईरान ने UAE के तेल ठिकानों को निशाना बनाया जिससे बात और बिगड़ गई। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जा रास्ते से जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किए गए अपने ऑपरेशन को रोकने का ऐलान कर दिया है। ट्रंप ने कहा है कि प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोकने के फैसला कारण के साथ हुई बातचीत के बाद उठाया गया है।

ट्रंप ने दावा किया है कि ईरानी अधिकारियों के साथ एक फाइनल समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। मंगलवार को 'ट्रुथ सोशल' पर इसकी जानकारी देते हुए ट्रंप ने लिखा, “ईरान के प्रतिनिधियों के साथ एक समझौते को लेकर शानदार प्रगति हुई है। पाकिस्तान और अन्य देशों के अनुरोध पर, और ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान में मिली जबरदस्त सफलता को देखते हुए, हमने आपसी सहमति से एक फैसला लिया है।”

ट्रंप ने कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों को सुरक्षित निकालने के अभियान 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' को थोड़े समय के लिए रोक दिया गया है। हालांकि ट्रंप ने साफ किया कि भले ही जहाजों की आवाजाही का रेस्क्यू ऑपरेशन रुका है, लेकिन अमेरिकी नाकाबंदी जारी रहेगी। उन्होंने कहा है कि उन्होंने इस ऑपरेशन को यह देखने के लिए रोका है कि ईरान शांति समझौते पर साइन करता है या नहीं।

क्या था 'प्रोजेक्ट फ्रीडम'?

बता दें कि ट्रंप ने होर्मुज के बंद होने के कारण फंसे हुए जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बीते सोमवार को 'प्रोजेक्ट फ्रीडम' शुरू करने का ऐलान किया था। अमेरिका के मुताबिक इस ऑपरेशन का लक्ष्य 87 देशों के लगभग 23,000 नाविकों को बचाना था, जो युद्ध की वजह से समुद्र में फंसे हुए हैं। US ने इसे सफल बनाने के लिए गाइडेड मिसाइल, 100 से अधिक विमान, ड्रोन प्लेटफॉर्म और 15,000 से ज्यादा सैनिकों को भी तैनात करने की बात कही थी। हालांकि ईरान ने इसे लेकर कड़ी चेतावनी दी थी। ईरान ने कहा था कि इसे युद्धविराम का उल्लंघन माना जाएगा और यहां से जहाजों को गुजरने की इजाजत किसी भी हालत में नहीं दी जाएगी। इसके बाद ईरान ने यूएई के तेल ठिकानों को भी निशाना बनाया था और तनाव और बढ़ गया था। इसलिए अब ट्रंप को पीछे हटना पड़ा है।

चीन जा रहे ईरानी विदेश मंत्री

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची चीन जा रहे हैं। जानकारों की मानें तो अमेरिका-इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष और बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच कूटनीतिक समर्थन जुटाने के लिए ईरान यह कदम उठा रहा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार ईरानी विदेश मंत्री यहां चीनी विदेश मंत्री से मुलाकात करेंगे जहां द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं पर चर्चा होगी। बता दें कि चीन ने 28 फरवरी को ईरान-अमेरिका युद्ध शुरू होने के बाद से ही बेहद सतर्क रुख अपनाया हुआ है। हालांकि कई देशों की तरह चीन ने भी ईरान पर अमेरिका और इजरायल के शुरुआती हमलों की निंदा की थी, लेकिन ईरान के साथ अपनी नजदीकियों के बावजूद उसने एकतरफा रुख नहीं दिखाया है। ऐसे में ईरानी विदेश मंत्री की यह यात्रा अहम हो सकती है।

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Jagriti Kumari

जागृति को छोटी उम्र से ही खबरों की दुनिया ने इतना रोमांचित किया कि पत्रकारिता को ही करियर बना लिया। 2 साल पहले लाइव हिन्दुस्तान के साथ करियर की शुरुआत हुई। उससे पहले डिग्री-डिप्लोमा सब जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में। भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली से पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा और संत जेवियर्स कॉलेज रांची से स्नातक के बाद से खबरें लिखने का सिलसिला जारी। खबरों को इस तरह से बताना जैसे कोई बेहद दिलचस्प किस्सा, जागृति की खासियत है। अंतर्राष्ट्रीय संबंध और अर्थव्यवस्था की खबरों में गहरी रुचि। लाइव हिन्दुस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शानदार कवरेज के लिए इंस्टा अवॉर्ड जीता और अब बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर रोजाना कुछ नया सीखने की ललक के साथ आगे बढ़ रही हैं। इसके अलावा सिनेमा को समझने की जिज्ञासा है।

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