नीच, दुष्ट और बेईमान है अमेरिका; इस्लामाबाद वार्ता विफल होने पर भड़का ईरान

Deepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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अमेरिका और ईरान की बातचीत विफल हो चुकी है। इसके बाद तमाम बयान आ रहे हैं। इसी कड़ी में ईरान ने अमेरिका को दुष्ट और नीच बता डाला है। वहीं, ईरानी डेलीगेशन का हिस्सा रहे, पार्लियामेंट स्पीकर गालिबाफ ने स्पष्ट कहाकि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा।

नीच, दुष्ट और बेईमान है अमेरिका; इस्लामाबाद वार्ता विफल होने पर भड़का ईरान

अमेरिका और ईरान की बातचीत विफल हो चुकी है। इसके बाद तमाम बयान आ रहे हैं। इसी कड़ी में ईरान ने अमेरिका को दुष्ट और नीच बता डाला है। इस बयान में कहा गया है कि अमेरिका जो युद्ध में हासिल नहीं कर पाया, वह बातचीत की टेबल पर हासिल करना चाहता था। हम उसकी सभी शर्तों को सिरे से खारिज करते हैं। वहीं, ईरानी डेलीगेशन का हिस्सा रहे, पार्लियामेंट स्पीकर गालिबाफ ने स्पष्ट कहाकि अमेरिका ईरान का भरोसा जीतने में नाकाम रहा। उन्होंने रविवार को इस बारे में बयान जारी करते हुए कहाकि ईरानी डेलीगेशन में शामिल मेरे साथियों ने बेहद सकारात्मक पहल की। गालिबाफ ने एक्स पर पोस्ट में लिखा कि लेकिन दूसरी तरफ से बातचीत में विश्वास ही नहीं दिखाया गया। वहीं, ईरान के पूर्व वित्तमंत्री जरीफ ने वार्ता खत्म होने का दोष अमेरिका पर डाला है।

ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद जरीफ ने कहाकि अमेरिका ने अपनी शर्तें थोपने की कोशिश की। इसी वजह से यह वार्ता विफल रही। जरीफ ने 2015 की परमाणु वार्ता में अपने देश के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। जरीफ ने कहाकि कोई भी वार्ता, कम से कम ईरान के साथ, केवल आपकी शर्तों के आधार पर सफल नहीं होगी। उन्होंने आगे कहाकि अमेरिका को यह सीखना होगा कि आप ईरान पर शर्तें थोप नहीं सकते। सीखने में अभी भी बहुत देर नहीं हुई है।

कूटनीति कभी खत्म नहीं होती
इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाकाई ने कहाकि कूटनीति कभी खत्म नहीं होती। यह राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने का एक जरिया है। उन्होंने कहाकि किसी भी हालात में, कूटनीतिक तंत्र को ईरानी राष्ट्र के अधिकारों और हितों को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहाकि कूटनीति उन लोगों के साथ खड़ी है जो अपनी मातृभूमि की रक्षा कर रहे हैं और हर तरह के बलिदान के लिए तैयार हैं। बाकाई ने कहाकि ये बातचीत ईरान पर थोपे गए 40-दिनों के युद्ध के बाद अविश्वास और शक के माहौल में हुई थी। उन्होंने कहाकि इसलिए, यह उम्मीद नहीं थी कि बातचीत किसी आम सहमति तक पहुंचेगी।

दोनों पक्ष लौटे अपने घर
अमेरिकी पक्ष ने वार्ता असफल रहने का कारण बताते हुए कहाकि उसने ईरान के सामने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव रखा। अमेरिका का प्रतिनिधित्व उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस, राष्ट्रपति के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जैरेड कुशनर कर रहे थे। ईरान के प्रतिनिधिमंडल में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालिबफ एवं विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कुल 71 लोग शामिल थे। वार्ता समाप्त होने के बाद दोनों पक्ष अपने-अपने देश लौट चुके हैं।

21 घंटे तक चली बात
वेंस ने वार्ता के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए कहाकि हम पिछले 21 घंटे से बात कर रहे हैं। हमने कई अहम मुद्दों पर बात की। बुरी खबर यह है कि हमारे बीच समझौता नहीं हो सका। मुझे लगता है कि यह हमसे ज्यादा ईरान के लिए बुरी खबर है। उन्होंने कहाकि राष्ट्रपति ट्रंप ने हमसे कहा था कि आपको यहां नेक नीयत से आना होगा और किसी समझौते तक पहुंचने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करना होगा। हमने वैसा ही किया, लेकिन दुर्भाग्य से, हम कोई भी प्रगति नहीं कर पाए। उन्होंने कहाकि 21 घंटे चली बातचीत के बाद भी ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता नहीं जताई।

अब होर्मुज पर भी सवाल
ईरान ने वार्ता के लिए 10 सूत्रीय योजना पेश की थी, जिसमें पश्चिम एशिया से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण शामिल था। दोनों पक्षों के बीच आमने-सामने की बातचीत के बावजूद समझौता न हो पाने से दो सप्ताह के नाजुक युद्धविराम की प्रभावशीलता और वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए होर्मुज को फिर से खोलने की संभावना पर सवाल खड़े हो गए हैं।

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मूल रूप से आजमगढ़ के रहने वाले दीपक मिश्रा के लिए पत्रकारिता में आना कोई संयोग नहीं था। घर में आने वाली तमाम मैगजीन्स और अखबार पढ़ते-पढ़ते खुद अखबार में खबर लिखने तक पहुंच गए। हालांकि सफर इतना आसान भी नहीं था। इंटरमीडिएट की पढ़ाई के बाद जब घरवालों को इस इरादे की भनक लगी तो खासा विरोध भी सहना पड़ा। फिर मन में ठाना कि चलो जमीनी अनुभव लेकर देखते हैं। इसी मंशा के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई के दौरान आजमगढ़ के लोकल टीवी में काम करना शुरू किया। कैमरे पर शहर की गतिविधियां रिकॉर्ड करते, न्यूज बुलेटिन लिखते और कुछेक बार उन्हें कैमरे के सामने पढ़ते-पढ़ते इरादा मजबूत हो गया कि अब तो मीडिया में ही जाना है।

आजमगढ़ के डीएवी डिग्री कॉलेज से इंग्लिश, पॉलिटिकल साइंस और हिस्ट्री विषयों में ग्रेजुएशन के बाद वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय से मास कम्यूनिकेशन में मास्टर डिग्री। इसके बाद अखबारों में नौकरी का सिलसिला शुरू हुआ आज अखबार से। फिर दैनिक जागरण के बाइलिंगुअल अखबार आई नेक्स्ट में वाराणसी में डेस्क पर नौकरी। वहां से सेंट्रल डेस्क कानपुर का सफर और फिर पत्रिका अखबार के इवनिंगर न्यूज टुडे में सेंट्रल डेस्क हेड की जिम्मेदारी। बाद में पत्रिका अखबार के लिए खेल डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। पत्रिका ग्रुप में काम करते हुए 2014 फीफा वर्ल्ड कप की कवरेज के लिए अवॉर्ड भी मिला।

यूपी में वापसी हुई फिर से दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में और जिम्मेदारी मिली गोरखपुर में डेस्क हेड की। आई नेक्स्ट की दूसरी पारी में दो बार गोरखपुर एडिशन के संपादकीय प्रभारी की भी भूमिका निभाई। वहीं, कुछ अरसे तक इलाहाबाद में डेस्क हेड की जिम्मेदारी भी संभाली। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट में काम करने के दौरान, डिजिटल फॉर्मेट के लिए वीडियो स्टोरीज करते रहे। इसमें कुंभ 2019 के लिए वीडियो स्टोरीज भी शामिल हैं। बाद में यहां पर पॉडकास्ट के दो शो किए। जिनमें से एक आईपीएल रिकॉर्ड बुक और दूसरा शहर का किस्सा रहा।

जून 2021 से लाइव हिन्दुस्तान में होम टीम का हिस्सा। इस दौरान तमाम चुनाव, राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रमों की खबरें की। साथ ही क्रिकेट टीम के साथ सहभागिता निभाते हुए आईपीएल और टी-20 विश्वकप, चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान कवरेज में सक्रिय भूमिका निभाई। कुंभ 2025 के दौरान लाइव हिन्दुस्तान के लिए वीडियो स्टोरीज कीं।

अगर रुचि की बात करें तो फिल्में देखना, किताबें पढ़ना, कुछ नई स्किल्स सीखते रहना प्रमुख हैं। मिररलेस कैमरे के साथ वीडियो शूट करना और प्रीमियर प्रो पर एडिटिंग में दक्षता। प्रिय विषयों में सिनेमा और खेल दिल के बेहद करीब हैं।

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