एक छोटी सी डिवाइस ने कर दिखाया कमाल, अमेरिका ने ईरान में कैसे ढूंढ निकाला पायलट

Apr 05, 2026 07:34 pm ISTMadan Tiwari लाइव हिन्दुस्तान
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अमेरिकी पायलट को ढूंढने में एक छोटी सी डिवाइस ने बहुत कमाल किया, जिसने लोकेशन समेत अन्य डिटेल्स अमेरिकी सैनिकों को भेजे। इसी के जरिए पता चला कि पायलट उबड़-खाबड़ पहाड़ी की दरार में छिपा हुआ है।

एक छोटी सी डिवाइस ने कर दिखाया कमाल, अमेरिका ने ईरान में कैसे ढूंढ निकाला पायलट

Small Device Saves US Pilot: अमेरिका ने ईरान में पहाड़ी इलाके में दो दिन से छिपे अपने पायलट को सकुशल जिंदा बचा लिया। यह किसी करिश्मे से कम नहीं है, क्योंकि अमेरिका ने यह मिशन उस देश में अंजाम दिया, जिस ईरान से वह महीनेभर से युद्ध लड़ रहा है। अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए अमेरिका के दर्जनों विमान हवा में गश्त करते रहे और उसे ढूंढते रहे। पायलट को ढूंढने में एक छोटी सी डिवाइस ने बहुत कमाल किया, जिसने लोकेशन समेत अन्य डिटेल्स अमेरिकी सैनिकों को भेजे। इसी के जरिए पता चला कि पायलट उबड़-खाबड़ पहाड़ी की दरार में छिपा हुआ है।

कौन सी थी वो डिवाइस?

इस पूरे अभियान के केंद्र में लगभग 800 ग्राम वजन वाला एक छोटा, सैटेलाइट-आधारित कम्युनिकेशन डिवाइस है, जिसे CSEL (कॉम्बैट सरवाइवर इवेडर लोकेटर ) के नाम से जाना जाता है। ynetnews के अनुसार, इसे बोइंग कंपनी ने बनाया है और यह सैटेलाइट से कनेक्टेड होता है। यह साइज में हथेली के बराबर है और मजबूत सैन्य रेडियो और एक हैंडहेल्ड कंप्यूटर का मिला-जुला रूप जैसा दिखता है। यह पायलट के कमर वाले हिस्से में बांध दिया जाता है, ताकि जब किसी दुर्घटना के समय पायलट फाइटर जेट से कूदे तो यह डिवाइस भी उसके साथ ही रहे। जैसे ही पायलट इजेक्ट करता है तुरंत यह एन्क्रिप्टेड डेटा भेजने लगता है। यह तेज फ्रीक्वेंसी-हॉपिंग सिग्नलों का इस्तेमाल करके लगातार लोकेशन कोऑर्डिनेट्स और छोटे एन्क्रिप्टेड मैसेज भेजता रहता है, जिससे दुश्मन के इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के लिए इसका पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

दस मीटर गहरे पानी में भी चलती है डिवाइस

यह किसी भी हालात में काम करना बंद नहीं करता। जैसे विमान हादसे के समय फ्लाइट का ब्लैक बॉक्स खराब नहीं होता और आखिरी क्षणों को कैद कर लेता है, उसी तरह यह डिवाइस सैनिक या पायलट से कनेक्ट रहता है। इसके जरिए ही अमेरिकी सेना अपने पायलट के ठिकाने का पता लगा सकी। यह दस मीटर तक गहरे पानी में डूबे रहने के बाद भी सही लोकेशन भेजता है। यहां तक कि इसकी बैटरी 21 दिनों तक चलती है। इसमें लगे एक बटन के जरिए पायलट या कोई सैनिक यह बता सकता है कि वह संकट में है, जिसके बाद उसे बचाने की प्रक्रिया की शुरुआत हो जाती है। इस अभियान के दौरान भी डिवाइस ने हर कुछ घंटों में अपनी सटीक लोकेशन की जानकारी वाले एन्क्रिप्टेड टेक्स्ट मैसेज भेजे, जिससे ईरानी सेना उसकी लोकेशन का पता नहीं लगा पाई।

पहाड़ी की दरार में छिप गया था पायलट

वहीं, न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी वायुसेना के पायलट का जेट ईरान में मार गिराया गया था। दुश्मन से बचने के लिए वह एक पहाड़ी दरार में छिप गया और 7,000 फीट की ऊंचाई तक चढ़ाई की। दो दिन चले जानलेवा मिशन के बाद अमेरिकी सेना ने उसे बचा लिया। रविवार को, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पायलट को बचाने के लिए चलाए गए पूरे बचाव अभियान को साहस और काबिलियत का अद्भुत प्रदर्शन बताया। ईरानी सरकार ने इस पायलट पर इनाम भी रखा था। ट्रंप ने एक पोस्ट में कहा, "हमने ईरान के पहाड़ों की गहराई से एक गंभीर रूप से घायल और सचमुच बहादुर F-15 क्रू मेंबर/अधिकारी को बचा लिया है। ईरानी सेना बड़ी संख्या में उसकी जोर-शोर से तलाश कर रही थी और उसके काफी करीब पहुंच गई थी।"

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लेखक के बारे में

Madan Tiwari

लखनऊ के रहने वाले मदन तिवारी वरिष्ठ पत्रकार हैं और मीडिया में एक दशक से ज्यादा का अनुभव है।
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वर्तमान में मदन हिन्दुस्तान अखबार की न्यूज वेबसाइट लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स डिजिटल) में डिप्टी न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। जागरण इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड मास कम्युनिकेशन से पत्रकारिता की पढ़ाई की। कक्षा 12वीं के बाद से ही दैनिक जागरण, अमर उजाला, जनसत्ता समेत तमाम अखबारों में संपादकीय पृष्ठ पर लिखना शुरू किया। महज दो सालों में विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रियों अखबारों में दो सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए। ग्रेजुएशन करते समय ही मीडिया में नौकरी की शुरुआत की। लाइव हिन्दुस्तान में अभी दूसरी पारी है और दोनों पारियों को मिलाकर यहां आठ साल से ज्यादा हो चुके हैं। कुल एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। मदन आजतक जैसे अन्य संस्थानों में भी काम कर चुके हैं।

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