अमेरिका में अरबों डॉलर निवेश करेगी भारत की रिलायंस, ट्रंप का ऐलान- 50 साल बाद खुलेगी रिफाइनरी

Mar 11, 2026 06:38 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, वाशिंगटन
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 50 साल में पहली नई US ऑयल रिफाइनरी की घोषणा की है। इस प्रोजेक्ट में तैयार होने वाले ईंधन की बिक्री के लिए भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ 20 साल का अहम समझौता हुआ है।

अमेरिका में अरबों डॉलर निवेश करेगी भारत की रिलायंस, ट्रंप का ऐलान- 50 साल बाद खुलेगी रिफाइनरी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि अमेरिका में पिछले 50 वर्षों में पहली नई तेल रिफाइनरी खुलने जा रही है। उन्होंने दावा किया कि इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में भारत की दिग्गज कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की भी बड़ी भूमिका है। ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर इस बात की जानकारी देते हुए लिखा- मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि 'अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग' टेक्सास के ब्राउनस्विले में 50 वर्षों में पहली नई अमेरिकी तेल रिफाइनरी खोलने जा रही है।

यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब वाइट हाउस ईरान में चल रहे युद्ध के कारण ऊर्जा की बढ़ती कीमतों को लेकर वैश्विक चिंताओं को शांत करने की कोशिश कर रहा है। ट्रंप प्रशासन तेल और गैसोलीन की कीमतों को कम करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसमें आपातकालीन भंडार से तेल जारी करना और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले टैंकरों को सैन्य सुरक्षा प्रदान करना शामिल है।

रिलायंस के साथ 20 साल का करार

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा कि यह नई रिफाइनरी अमेरिकी बाजारों की ईंधन संबंधी जरूरतें पूरी करेगी, ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देगी और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करेगी। उन्होंने लिखा- 'अमेरिका असली एनर्जी दबदबे की ओर लौट रहा है! आज मुझे यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग, ब्राउन्सविले, टेक्सास में 50 साल में पहली नई अमेरिकी ऑयल रिफाइनरी खोल रहा है। यह एक ऐतिहासिक 300 बिलियन डॉलर की डील है, जो अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी डील है। यह अमेरिकी वर्कर्स, एनर्जी और साउथ टेक्सास के महान लोगों के लिए एक बड़ी जीत है! इस जबरदस्त इन्वेस्टमेंट के लिए भारत में हमारे पार्टनर्स और उनकी सबसे बड़ी प्राइवेट एनर्जी कंपनी, रिलायंस का धन्यवाद। यह हमारे अमेरिका फर्स्ट एजेंडा, परमिट को आसान बनाने और टैक्स कम करने की वजह से है, जिससे हमारे देश में अरबों डॉलर की डील्स वापस आ रही हैं। ब्राउन्सविले पोर्ट पर एक नई रिफाइनरी, U.S. मार्केट्स को बढ़ावा देगी, हमारी नेशनल सिक्योरिटी को मजबूत करेगी, अमेरिकी एनर्जी प्रोडक्शन को बढ़ावा देगी, अरबों डॉलर का इकोनॉमिक असर डालेगी, और यह दुनिया की सबसे साफ रिफाइनरी होगी। यह ग्लोबल एक्सपोर्ट को बढ़ावा देगा और उस इलाके में हजारों नौकरियां और ग्रोथ लाएगा जो इसके लायक है। अमेरिकन एनर्जी डोमिनेंस ऐसा ही दिखता है। अमेरिका फर्स्ट, हमेशा!'

अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग के बयान के अनुसार, कंपनी की योजना इस साल की दूसरी तिमाही में इस नई रिफाइनरी का निर्माण शुरू करने की है। कंपनी ने पहले ही अपने द्वारा उत्पादित ईंधन को बेचने के लिए 20 साल का समझौता कर लिया है और यह बड़ा बिक्री सौदा भारत की रिलायंस के साथ किया गया है। इस मामले पर रिलायंस की ओर से अभी तक कोई टिप्पणी नहीं आई है।

बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड भारत की सबसे बड़ी निजी क्षेत्र की कंपनी है, जिसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है। धीरूभाई अंबानी द्वारा 1958 में स्थापित यह कंपनी शुरू में कपड़ा और पॉलिएस्टर के कारोबार से शुरु हुई थी, लेकिन अब यह ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स, रिफाइनरी, रिटेल, टेलीकॉम, मीडिया और नई ऊर्जा जैसे विविध क्षेत्रों में सक्रिय है। जामनगर की दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के साथ यह भारत को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यातक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मुकेश अंबानी के नेतृत्व में रिलायंस फॉर्च्यून 500 की सूची में शामिल एकमात्र भारतीय निजी कंपनी है और बाजार पूंजीकरण के आधार पर भारत की सबसे मूल्यवान सार्वजनिक कंपनी बनी हुई है।

रोजाना 160,000 बैरल की क्षमता

टेक्सास की यह रिफाइनरी वही प्रोजेक्ट है जिसे पहले 'एलिमेंट फ्यूल्स' द्वारा विकसित किया जा रहा था। एलिमेंट फ्यूल्स ने जून 2024 में बताया था कि उसने साइट की तैयारी पूरी कर ली है और प्रतिदिन लगभग 160,000 बैरल तेल को प्रोसेस करने वाले प्लांट के लिए जरूरी परमिट प्राप्त कर लिए हैं। अब एलिमेंट फ्यूल्स की वेबसाइट सीधे 'अमेरिका फर्स्ट रिफाइनिंग' की वेबसाइट पर रीडायरेक्ट होती है।

पुरानी रिफाइनरियों का संकट और 'अमेरिकी ऊर्जा प्रभुत्व'

ट्रंप प्रशासन 'अमेरिकी ऊर्जा प्रभुत्व' की नीति पर जोर दे रहा है, जो तेल, प्राकृतिक गैस और कोयले के उत्पादन को बढ़ावा देती है। शेल क्रांति की बदौलत पिछले डेढ़ दशक में अमेरिकी तेल उत्पादन में भारी उछाल आया है, लेकिन देश अभी भी पुरानी हो चुकी रिफाइनरियों पर निर्भर है। हाल के वर्षों में कई प्लांट बंद भी हुए हैं, जिससे तेल को रिफाइन करने की क्षमता में कमी आई है। कंपनी ने मंगलवार को बताया कि ब्राउनस्विले रिफाइनरी को पूरी तरह से अमेरिकी शेल तेल पर चलने के लिए ही डिजाइन किया जाएगा।

अतीत में विफल रहे हैं ऐसे प्रयास

अमेरिका में नई (ग्रीनफील्ड) रिफाइनरी बनाने के पिछले प्रयास भारी लागत, जटिल सरकारी परमिट प्रक्रियाओं और पर्यावरणविदों के विरोध के कारण विफल रहे हैं। इसका एक बड़ा उदाहरण 2000 के दशक के मध्य में देखने को मिला था, जब मैक्सिकन या कनाडाई कच्चे तेल को प्रोसेस करने के लिए 'एरिजोना क्लीन फ्यूल्स युमा' की 2.5 बिलियन डॉलर की योजना पर्याप्त फंडिंग न मिल पाने के कारण ठप हो गई थी।

Amit Kumar

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