टैरिफ रद्द होने के बाद कंपनियां रिफंड की हकदार, US कोर्ट का फैसला; ट्रंप को फिर झटका

Nisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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सुप्रीम कोर्ट ने पाया था कि आपातकालीन शक्तियों वाले कानून के तहत वे शुल्क असंवैधानिक थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति एकतरफा रूप से शुल्क निर्धारित और परिवर्तित नहीं कर सकते, क्योंकि कराधान की शक्ति स्पष्ट रूप से कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है।

टैरिफ रद्द होने के बाद कंपनियां रिफंड की हकदार, US कोर्ट का फैसला; ट्रंप को फिर झटका

न्यूयॉर्क के एक संघीय न्यायाधीश ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि जिन कंपनियों ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए आयात शुल्क का भुगतान किया है, वे अब रिफंड (धन वापसी) की हकदार हैं। इसे ट्रंप प्रशासन के लिए एक बड़ी हार के रूप में देखा जा रहा है।

अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय के न्यायाधीश रिचर्ड ईटन ने लिखा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सभी आयातक सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का लाभ उठाने के हकदार हैं, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पिछले साल अंतरराष्ट्रीय आपातकाल आर्थिक शक्ति कानून (आईईईपीए) के तहत लगाए गए भारी आयात करों को रद्द कर दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने पाया था कि आपातकालीन शक्तियों वाले कानून के तहत वे शुल्क असंवैधानिक थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति एकतरफा रूप से शुल्क निर्धारित और परिवर्तित नहीं कर सकते, क्योंकि कराधान की शक्ति स्पष्ट रूप से कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के पास है।

न्यायाधीश ईटन ने अपने फैसले में लिखा कि वह सिर्फ आईईईपीए शुल्क के रिफंड से संबंधित मामलों की सुनवाई करेंगे। यह फैसला रिफंड प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता प्रदान करता है, जिसका सुप्रीम कोर्ट ने अपने 20 फरवरी के फैसले में उल्लेख नहीं किया था।

डेमोक्रेटिक सांसदों ने शुल्क वापस करने की मांग की

फरवरी के अंत में अमेरिका के उच्च सदन 'सीनेट' में डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन सांसद सरकार से लगभग 175 अरब अमेरिकी डॉलर के शुल्क की रिफंड प्रक्रिया शुरू करने की मांग कर रहे हैं। ओरेगन प्रांत से सीनेटर रॉन वायडेन, मैसाचुसेट्स से एड मार्की और न्यू हैम्पशायर से जीन शाहीन एक विधेयक पेश करने जा रहे थे। इस विधेयक में यह प्रावधान प्रस्तावित है कि अमेरिका के सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा विभाग को 180 दिन के भीतर शुल्क लौटाना होगा और इस राशि पर ब्याज भी देना होगा।

इस विधेयक में यह भी प्रस्ताव है कि रिफंड देने में छोटे व्यवसायों को प्राथमिकता दी जाए और आयातकों, थोक विक्रेताओं और बड़ी कंपनियों को अपने ग्राहकों तक यह रिफंड पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इस विधेयक के कानून बनने की संभावना कम है, लेकिन यह दर्शाता है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्यों ने ट्रंप प्रशासन पर सार्वजनिक रूप से दबाव बनाना शुरू कर दिया है।

15 फीसदी टैरिफ लगाया

फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप प्रशासन के देश-विशिष्ट शुल्क के खिलाफ फैसला दिया था, जिसके बाद ट्रंप ने सभी देशों पर 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत शुल्क लगा दिया। बाद में इसे बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की भी घोषणा की है। अब कहा जा रहा है कि नई दर इस सप्ताह से ही लागू हो सकती हैं।

नई दरों से फायदे के आसार

15 प्रतिशत के एकसमान शुल्क का एशिया-प्रशांत क्षेत्र की कुछ अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सकता है जिन्हें पहले अधिक ऊंचे शुल्क का सामना करना पड़ा है। इनमें चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के अधिकतर देश शामिल हैं। मूडीज ने फरवरी में कहा था कि जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान (चीन) जैसे देशों पर इसका प्रभाव हालांकि सीमित होगा जहां शुल्क पहले से ही 15 प्रतिशत है।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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लेखक के बारे में

Nisarg Dixit

निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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