
भारत को लेकर US में दुर्लभ सुनवाई, दोनों दलों का समर्थन; मोदी-पुतिन सेल्फी दिखा ट्रंप को लताड़ा
सुनवाई रिपब्लिकन बहुमत की अगुवाई में हुई, जो ट्रंप के दबाव के बावजूद भारत समर्थन दिखाती है। यदि ट्रंप नहीं सुधरे, तो भारत यूरोप, रूस और चीन के साथ संतुलन बनाए रखेगा। जानिए और क्या चर्चा हुई।
डोनाल्ड ट्रंप की भारत विरोधी नीतियों के बीच अमेरिका में भारत के समर्थन में मुखर आवाजें उठ रही हैं। सत्ताधारी और विपक्षी दलों के कई सांसदों ने ट्रंप की नीतियों की आलोचना करते हुए भारत के समर्थन में बयान दिए हैं। ताजा मामला अमेरिकी हाउस फॉरेन अफेयर्स कमिटी की साउथ एंड सेंट्रल एशिया सबकमिटी की सुनवाई से जुड़ा है। इस कमिटी ने बुधवार को 'यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: सिक्योरिंग अ फ्री एंड ओपन इंडो-पैसिफिक' शीर्षक वाली एक दुर्लभ देश-विशिष्ट सुनवाई आयोजित की। यह सुनवाई अमेरिका-भारत संबंधों के वर्तमान संकट पर केंद्रित रही, जहां रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पक्षों के सदस्यों ने भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की सराहना की, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को दोनों देशों के बीच रणनीतिक विश्वास को नुकसान पहुंचाने वाला बताया। सुनवाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की हालिया कार सेल्फी को प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया गया, जो अमेरिकी नीतियों के 'बैकफायर' का संकेत माना गया।
क्यों खास है ये सुनवाई?
अमेरिकी संसद द्वारा किसी एक देश पर केंद्रित विशेष सुनवाई बेहद दुर्लभ मानी जाती है। ऐसे में यह सुनवाई भारत के प्रति द्विदलीय समर्थन को दर्शाती है। यानी सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी डेमोक्रेट्स के सांसदों ने इस सुनवाई की पैरवी की थी। चेयरमैन रिपब्लिकन सांसद बिल ह्यूजेंगा की अगुवाई में हुई इस सुनवाई में विशेषज्ञों- जैसे जेफ स्मिथ, ध्रुव जयशंकर (ओआरएफ अमेरिका) और समीर लालवानी ने गवाही दी। इस दौरान भारत की रक्षा आधुनिकीकरण, सैन्य सहयोग, प्रौद्योगिकी साझेदारी, क्षेत्रीय कूटनीति और इंडो-पैसिफिक में नियम-आधारित व्यवस्था मुख्य मुद्दे रहे।
अमेरिकी डेमोक्रेट पार्टी के नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विदेश नीति पर तीखा हमला बोला है। उनका आरोप है कि ट्रंप की नीतियों की वजह से भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को गहरा झटका लग रहा है और भारत धीरे-धीरे रूस तथा अन्य प्रतिद्वंद्वी देशों के करीब जा रहा है। डेमोक्रेट नेताओं ने एक पोस्टर जारी किया है जिसमें भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन साथ में दिखाए गए हैं। पोस्टर पर बड़े अक्षरों में लिखा है- TRUMP’S FAILED FOREIGN POLICY (ट्रंप की असफल विदेश नीति)।
ट्रंप नीतियों पर तीखी आलोचना: अपना ही नुकसान करके दूसरों को नुकसान पहुंचाना
डेमोक्रेट रैंकिंग मेंबर सिडनी कमलागर-डोव ने ट्रंप की नीतियों को 'अपना ही नुकसान करके दूसरों को नुकसान पहुंचाना' करार दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप की नीतियां भारत-अमेरिका रणनीतिक विश्वास को वास्तविक और स्थायी नुकसान पहुंचा रही हैं। सुनवाई के दौरान कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक कांग्रेसवुमन सिडनी कमलागर-डोव ने एक के बाद एक कई आरोप लगाते हुए ट्रंप पर सीधा हमला किया। उन्होंने कहा- अगर डोनाल्ड ट्रंप अपना रुख नहीं बदलते हैं, तो वे अमेरिका के पहले ऐसे राष्ट्रपति बन जाएंगे जिन्होंने भारत को खो दिया। या यूं कहें कि वे वो राष्ट्रपति होंगे जिन्होंने भारत को खुद से दूर धकेल दिया।
कमलागर-डोव ने आगे कहा- रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 25% टैरिफ लगाना पूरी तरह बेमानी लगता है, जब ट्रंप के खुद के दूत स्टीव विटकॉफ पुतिन के सलाहकारों के साथ मिलकर यूक्रेन को बेचने और व्यापारिक सौदे करने में जुटे हैं। उन्होंने ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार की महत्वाकांक्षा को भी निशाना बनाया। सांसद ने कहा- ट्रंप का नोबेल शांति पुरस्कार पाने का निजी जुनून हास्यास्पद है, लेकिन इससे भारत के साथ जो नुकसान होने वाला है, वह बिल्कुल हास्यास्पद नहीं है। अंत में उन्होंने मोदी-पुतिन की तस्वीर की ओर इशारा करते हुए कहा- आप अपने रणनीतिक साझेदार भारत को हमारे दुश्मनों की बाहों में धकेलकर नोबेल शांति पुरस्कार नहीं जीत सकते।
डेमोक्रेट्स का यह हमला ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध और टैरिफ लगा रहा है, जबकि खुद ट्रंप के करीबी लोग रूस के साथ पीछे के दरवाजे से बातचीत कर रहे हैं। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह दोहरा मापदंड भारत जैसे महत्वपूर्ण सहयोगी देश को नाराज कर रहा है और लंबे समय में अमेरिका के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है।
डेमोक्रेट प्रमिला जयपाल ने व्यापार बाधाओं और आप्रवासन नीतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा- ये टैरिफ भारत की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा रहे हैं और अमेरिकी व्यवसायों व उपभोक्ताओं को भी प्रभावित कर रहे हैं। वाशिंगटन स्टेट की एक 120 साल पुरानी कंपनी ने बताया कि ये टैरिफ उनके व्यवसाय के लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। जयापाल ने भारतीयों के लिए आप्रवासन के कानूनी रास्तों को बंद करने की नीतियों को 'भेदभावपूर्ण कोटा' की याद दिलाया।
भारत की अर्थव्यवस्था की सराहना: 'सबसे तेज बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था'
रिपब्लिकन चेयरमैन बिल ह्यूजेंगा ने भारत की तारीफ की। उन्होंने कहा- भारत दुनिया की सबसे तेज बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। यदि अमेरिका स्वतंत्र इंडो-पैसिफिक, लचीली सप्लाई चेन और लोकतंत्र-आधारित विश्व व्यवस्था चाहता है, तो भारत के साथ साझेदारी महत्वपूर्ण है। ह्यूजेंगा ने भारत-रूस संबंधों को लेकर कहा कि इससे 'जलन' होती है, लेकिन साथ ही कहा कि भारत अपने दीर्घकालिक हितों को समझता है। अमेरिकी सांसद बिल ह्यूजेंगा ने कहा कि लश्कर-ए-तैयबा (पाकिस्तान स्थित आतंकी समूह) और उसका प्रॉक्सी द रेजिस्टेंस फ्रंट पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार हैं और इसे जुलाई 2025 में ट्रंप प्रशासन ने विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। सुनवाई में विशेषज्ञों ने चीन की 'ड्यूल-यूज' पोर्ट नेटवर्क और समुद्री गलियारों पर नियंत्रण की चेतावनी दी। जेफ स्मिथ ने भारत-अमेरिका सैन्य सहयोग की सराहना की, जबकि समीर लालवानी ने क्षेत्रीय कूटनीति पर फोकस किया।
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर के बेटे ध्रुव जयशंकर ने कहा- चीन ने हाल के वर्षों में अपने परमाणु हथियारों का तेजी से विस्तार किया है और सबसे बड़ी नौसेनाओं में से एक बनाई है। 2020 के गलवान संघर्ष में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। भारत और अमेरिका दोनों चीन के साथ व्यापार घाटे का सामना कर रहे हैं, और रेयर अर्थ निर्यात पर चीन की पाबंदियां सप्लाई चेन की कमजोरियों को उजागर करती हैं। उन्होंने मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए दोनों देशों के सहयोग पर भी जोर दिया।
ट्रंप युग में संबंधों का संकट: मल्टीअलाइनमेंट की ओर भारत?
ट्रंप की नीतियां- 50% टैरिफ, एच-1बी वीजा प्रतिबंध, पाकिस्तान के प्रति झुकाव और रूसी तेल पर दबाव... इसने भारत-अमेरिका संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है। ट्रंप का दबाव भारत को अमेरिकी दांव पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर रहा है। भारत अपनी रणनीति छोड़ नहीं रहा, बल्कि यूरोप के साथ संबंध मजबूत कर 'मल्टीअलाइनमेंट' अपना रहा है।
यदि अमेरिका पाकिस्तान का समर्थन करता है, तो ऐसे में भारत को रूस-चीन के साथ तालमेल बिठाना पड़ेगा। क्वाड 'डेड' जैसा लग रहा है और पुतिन की भारत यात्रा ने सस्ता तेल, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान और शॉपिंग लिस्ट के साथ संबंधों को गहरा किया।

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