ईरान युद्ध में डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा फटका, 240 मिलियन डॉलर का ड्रोन खाड़ी में डूबा

Devendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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Iran War Update: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट के आसपास जारी गतिरोध के बीच अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ है। अमेरिकी नौसेना का सबसे महंगा और उन्नत मानवरहित जासूसी ड्रोन MQ-4C ट्राइटन फारस की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

ईरान युद्ध में डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा फटका, 240 मिलियन डॉलर का ड्रोन खाड़ी में डूबा

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हॉर्मुज स्ट्रेट के आसपास जारी गतिरोध के बीच अमेरिका को बड़ा नुकसान हुआ है। अमेरिकी नौसेना का सबसे महंगा और उन्नत मानवरहित जासूसी ड्रोन MQ-4C ट्राइटन फारस की खाड़ी में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी नौसेना सुरक्षा कमान की हालिया दुर्घटना रिपोर्ट के अनुसार, 9 अप्रैल को MQ-4C ट्राइटन क्रैश हो गया। रिपोर्ट में घटना का स्थान गोपनीय रखा गया है और इसे परिचालन सुरक्षा के मद्देनजर गुप्त रखा गया। अमेरिकी रक्षा विभाग की वर्गीकरण प्रणाली के तहत 25 लाख डॉलर से अधिक की क्षति वाली घटनाओं को 'क्लास ए' दुर्घटना माना जाता है। इस ड्रोन की कीमत 240 मिलियन डॉलर के बीच बताई जा रही है।

दरअसल, शुरुआती रिपोर्ट्स में दावे किए गए थे कि ईरानी सेना की कार्रवाई में ड्रोन नष्ट हुआ, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने इसे 'दुर्घटना' बताया है। फ्लाइट ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, ड्रोन हॉर्मुज स्ट्रेट के ऊपर मिशन पूरा करने के बाद लौट रहा था। अचानक उसने इमरजेंसी कोड जारी किया और तेजी से ऊंचाई खोते हुए रडार से गायब हो गया। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने ईरान के साथ हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनावपूर्ण स्थिति का सामना कर रहा है। शिन्हुआ न्यूज एजेंसी ने सीबीएस न्यूज के हवाले से बताया कि 1 अप्रैल से अब तक अमेरिका ने ईरान के हाथों करीब 24 MQ-9 रीपर ड्रोन खो दिए हैं। इन नुकसानों की कुल अनुमानित राशि लगभग 720 मिलियन डॉलर बताई जा रही है। एक MQ-9 रीपर ड्रोन की कीमत 30 मिलियन डॉलर या उससे अधिक हो सकती है।

MQ-4C ट्राइटन नॉर्थरोप ग्रुम्मन द्वारा विकसित उच्च ऊंचाई (HALE) वाला लंबी दूरी का समुद्री निगरानी ड्रोन है। यह RQ-4 ग्लोबल हॉक प्लेटफॉर्म पर आधारित है और मुख्य रूप से समुद्री खुफिया, निगरानी तथा टोही (ISR) मिशनों के लिए डिजाइन किया गया है। यह 50000 फीट से अधिक ऊंचाई पर 24 घंटे से ज्यादा समय तक उड़ान भर सकता है और इसकी मारक दूरी करीब 7400 समुद्री मील है। ड्रोन में 360 डिग्री मल्टी-इंटेलिजेंस सेंसर सिस्टम लगा है, जो व्यापक क्षेत्र की निगरानी और खतरे का जल्द पता लगाने में सक्षम बनाता है। यह अन्य सैन्य संपत्तियों के साथ रीयल-टाइम डेटा शेयरिंग भी कर सकता है। एक्सपर्ट के अनुसार, यह मध्यम ऊंचाई वाले ड्रोनों की तुलना में कम लागत पर ज्यादा प्रभावी ISR कवरेज प्रदान करता है।

बता दें कि MQ-4C ट्राइटन अमेरिका का सबसे महंगा जासूसी ड्रोन माना जाता है, और इसका नुकसान न केवल आर्थिक बल्कि परिचालन क्षमता पर भी असर डाल सकता है। अभी तक दुर्घटना का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया है, जबकि क्षेत्रीय तनाव के बीच अनुमान लगाए जा रहे हैं कि तकनीकी खराबी या कोई और कारण हो सकते हैं। दावे-प्रतिदावे के बीच इतना तो साफ है ट्रंप को सबसे बड़ा फटका लगा है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap

देवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।

देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।

मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।

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