
US-पाक के रिश्ते मानों बच्चों की बहस, किसका पिता ज्यादा ताकतवर… किसने कसा ऐसा तंज
ऑस्ट्रेलिया के आर्मी विशेषज्ञ ने अमेरिका और पाकिस्तान की दोस्ती पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह नजदीकियां मूर्खतापूर्ण हैं। रिश्ते ऐसे मानों बच्चों की बहस कि किसका पिता ज्यादा ताकतवर है।
ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में भारतीय सेना के हाथों मुंह की खाने के बाद पाकिस्तान ने अमेरिका की तरफ दोस्ती के कदम बढ़ाने तेज कर दिए हैं। यह किसी से नहीं छिपा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को शांति का मसीहा और नोबल शांति पुरस्कार की पैरवीं करने वाला पाकिस्तान अपने हित साध रहा है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच इस अनोखी दोस्ती को लेकर ऑस्ट्रियाई सैन्य विश्लेषक टॉम कूपर ने तीखा तंज कसा है। कूपर ने इसे “मूर्खतापूर्ण” बताते हुए आरोप लगाया कि इस्लामाबाद, ट्रंप की ‘शांति दूत’ वाली छवि के लिए दिखावटी नजदीकियां बढ़ा रहा है।
कूपर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से वाइट हाउस और इस्लामाबाद के रिश्ते वाकई ऐसे हैं, जैसे पांच-छह साल के दो छोटे बच्चे यह बहस कर रहे हों कि किसका पिता ज्यादा ताकतवर है।
ट्रंप को दिखाने का खेल
कूपर ने एएनआई से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान का हालिया कूटनीतिक अभियान, जिसमें सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का वॉशिंगटन दौरा भी शामिल है। यह सिर्फ इस मकसद से है कि ट्रंप दुनिया के सामने यह कह सकें, “मैंने भारत और पाकिस्तान के बीच परमाणु टकराव टाल दिया।”
मुनीर की धमकी और पानी विवाद
वॉशिंगटन यात्रा के दौरान जनरल मुनीर ने भारत को गीदड़भभकी भी दी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पाकिस्तान को अस्तित्व का खतरा हुआ, तो वह परमाणु हथियारों से “भारत और आधी दुनिया” को तबाह कर सकता है। उन्होंने सिंधु नदी पर भारत की बांध परियोजनाओं को लेकर भी कहा कि पाकिस्तान अपने जल-अधिकार की रक्षा “किसी भी कीमत” पर करेगा। कश्मीर को उन्होंने पाकिस्तान की “शिरा” बताया।
परमाणु धमकियां सिर्फ धोखा
कूपर के मुताबिक, पाकिस्तान की ये परमाणु धमकियां सिर्फ डराने का हथकंडा हैं। उन्होंने कहा, “अप्रैल से भारत कई बार इन कथित ‘रेड ज़ोन’ को पार कर चुका है, लेकिन पाकिस्तान अपनी धमकियों पर अमल नहीं कर पाया।” उन्होंने वाइट हाउस और पाकिस्तान के रिश्तों को दो बच्चों की बहस से तुलना की। कहा, “जैसे दोनों झगड़ रहे हों कि किसका पिता ज्यादा ताकतवर है।”
अमेरिका पर दोहरे रवैये का आरोप
कूपर ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े रिकॉर्ड और परमाणु तकनीक को ‘खतरनाक देशों’ को बेचने के इतिहास को नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने तंज कसा, “अमेरिका समेत बाकी सबको पाकिस्तान के आतंकवाद में शामिल होने और जिहाद के कारोबार की याद मछली जैसी है- जल्दी भूल जाते हैं।”
पाकिस्तान को अप्रत्यक्ष मदद
कूपर का मानना है कि अगर भारत-पाक में तनाव बढ़ता है तो ट्रंप सीधे तौर पर पाकिस्तान के लिए हस्तक्षेप नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें आधुनिक हथियार और ट्रेनिंग जैसी अप्रत्यक्ष मदद देते रहेंगे। उन्होंने कहा, “जितना पाकिस्तान ट्रंप की तारीफ करेगा, उतना ही उसे ट्रंप से परोक्ष समर्थन मिलेगा, लेकिन कभी भी खुला नहीं।”

लेखक के बारे में
Gaurav Kalaगौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य
संक्षिप्त विवरण: गौरव काला पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। वह विशेष रूप से हिमालयी राज्य उत्तराखंड के अलावा, दिल्ली-एनसीआर, मध्यप्रदेश, झारखंड समेत कई हिंदी बेल्ट के राज्यों की खबरें कवर कर रहे हैं।
विस्तृत बायो
परिचय और अनुभव: गौरव काला का भारतीय डिजिटल मीडिया जगत में एक दशक से अधिक का अनुभव है। वह वर्ष 2011 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में, वह 'लाइव हिन्दुस्तान' (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में स्टेट टीम सेक्शन का हिस्सा हैं। पिछले पांच वर्षों से वह पहले होम टीम का हिस्सा रहे और अब बड़ी बखूबी से स्टेट टीम में अपनी जिम्मेदारी को निभा रहे हैं। उन्हें डिजिटल पाठकों की पसंद और बदलती प्रवृत्तियों (Trends) को समझने में विशिष्ट महारत हासिल है। गौरव का करियर प्रिंट मीडिया से शुरू होकर टीवी जगत और डिजिटल मीडिया तक फैला हुआ है। यही वजह है कि उनकी खबरों में गहराई और सटीकता की झलक दिखती है।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और रिपोर्टिंग: गौरव मॉस कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विशेषता है। पहले बी. ए. इन मॉस कम्यूनिकेशन और फिर आधुनिक पत्रकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन होने के कारण उनके पास खबरों की ठोस समझ है। 2011 में दैनिक जनवाणी अखबार में क्राइम रिपोर्टिंग से पत्रकारिता शुरू करने के बाद उन्होंने ईटीवी भारत में बतौर एंकर और स्क्रिप्ट राइटर पर तौर पर काम किया। 2015 में डिजिटल पत्रकारिता में एंट्री लेते हुए अमर उजाला और दैनिक जागरण जैसे संस्थानों में काम किया। इस दौरान उन्होंने न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय खबरों को भी कवर किया, बल्कि आकर्षक लेखनी से पाठकों के बीच लोकप्रियता बनाई।
सितंबर 2021 में गौरव लाइव हिन्दुस्तान की नेशनल टीम के साथ जुड़े। तब से वह न सिर्फ राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय, वायरल समाचार और मौसम संबंधी खबरों पर विशेष ध्यान दे रहे हैं, बल्कि राजनीतिक, रिसर्च बेस स्टोरीज भी कवर कर रहे हैं। अपनी मजबूत लेखनी के दम पर वह खबरों को आकर्षक नए कलेवर के साथ आम जनता तक पहुंचा रहे हैं।
डिजिटल ट्रेंड्स के साथ रिपोर्टिंग: डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बदलते ट्रेंड्स को समझना गौरव की बड़ी ताकत है। वायरल खबरों, सोशल मीडिया ट्रेंड्स और इंटरनेट कल्चर से जुड़े विषयों को वह तथ्यात्मक जांच और संतुलित प्रस्तुति के साथ सामने रखते हैं। उनकी यही क्षमता उन्हें क्लिक-बेस्ड नहीं, बल्कि कंटेंट-बेस्ड पत्रकार बनाती है। इसके अलावा वह राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय राजनीति से जुड़े मुद्दों को तथ्यात्मक गहराई और संतुलित दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करते हैं।
पत्रकारिता का उद्देश्य: गौरव के लिए पत्रकारिता केवल खबर देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी है। उनका मानना है कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्य और जनहित को प्राथमिकता देते हुए पाठकों तक सही जानकारी पहुंचाना है। वह अपनी लेखनी से सत्ता, समाज और आम जनता के बीच एक मजबूत और भरोसेमंद सेतु बनाने में विश्वास रखते हैं।
विशेषज्ञता (Areas of Expertise):
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय समाचार
वायरल और ट्रेंडिंग कंटेंट
राजनीतिक और रिसर्च-आधारित स्टोरीज
हेडलाइन और न्यूज़ प्रेजेंटेशन
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




