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चीन का सबसे बड़ा कर्जदार कौन? पाकिस्तान तो बस चिल्लर है; कर्जे का बादशाह है खतरनाक 'दुश्मन'

चीन का सबसे बड़ा कर्जदार कौन? पाकिस्तान तो बस चिल्लर है; कर्जे का बादशाह है खतरनाक 'दुश्मन'

संक्षेप:

अमेरिका वर्षों से दुनिया को समझाता रहा कि चीन के कर्ज विकासशील देशों को कर्ज के जाल में फंसाते हैं और उन्हें महाशक्ति बनने में मदद करते हैं। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट ने ऐसा खुलासा हुआ है कि जानकर आप दंग रह जाएंगे।

Nov 18, 2025 04:20 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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जो हर समय दूसरों को चेतावनी देता रहा कि वे चीन के सरकारी बैंकों से मिलने वाले कर्ज पर भरोसा न करें, वही अब खुद 'दोस्त' बनकर मलाई काट रहा है। यूं कहें कि उसकी कथनी और करनी में जबरदस्त फर्क है। हम बात कर रहे हैं अमेरिका की। सालों से वह दुनिया को समझाता रहा कि चीन के कर्ज विकासशील देशों को कर्ज के जाल में फंसाते हैं और उन्हें महाशक्ति बनने में मदद करते हैं। लेकिन अब एक नई रिपोर्ट ने ऐसा खुलासा हुआ है कि जानकर आप दंग रह जाएंगे।

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दरअसल, अब तक हम यही समझते थे कि कंगाल पाकिस्तान चीन का सबसे बड़ा कर्जदार है, लेकिन नई हकीकत कुछ और है। 'हुआं-हुआं' करने वाला संयुक्त राज्य अमेरिका ही अब तक का सबसे बड़ा कर्जदार है। चीन के सरकारी बैंकों से अमेरिकी कंपनियों और प्रोजेक्ट्स को पिछले 25 सालों में 200 अरब डॉलर से अधिक का लोन मिला है।

वर्जीनिया के विलियम एंड मैरी कॉलेज की रिसर्च लैब एडडाटा की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के सरकारी बैंकों ने 2000 से 2023 तक दुनिया भर में 2.2 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का कर्ज और अनुदान दिया है, जो पहले के अनुमानों से दोगुना से भी अधिक है। इसमें से अमेरिका सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है। इनमें से बहुत से कर्ज गुप्त रखे गए क्योंकि पैसा सीधे चीन से अमेरिका नहीं गया, बल्कि केमैन आइलैंड्स, बरमूडा, डेलावेयर और अन्य टैक्स हेवन में शेल कंपनियों के जरिए रूट किया गया, जिससे सोर्स का पता ही छिप गया।

एडडाटा की रिसर्च में सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें से ज्यादातर कर्ज के बदले चीनी कंपनियों ने अमेरिकी व्यवसायों में हिस्सेदारी हासिल की। कई मामलों में ये कंपनियां अमेरिका के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण तकनीक से जुड़ी हुई थीं – जैसे रोबोटिक्स निर्माता, सेमीकंडक्टर कंपनी और बायोटेक फर्म। रिपोर्ट में पता चला है कि चीन का ऋण नेटवर्क पहले सोचे गए से कहीं अधिक व्यापक और परिष्कृत है। यह लोन का जाल सिर्फ विकासशील देशों तक सीमित नहीं, बल्कि ब्रिटेन, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड जैसे धनी देशों और अमेरिकी सहयोगियों तक फैला हुआ है।

रिपोर्ट सामने आने के बाद वाइट हाउस के पूर्व निवेश सलाहकार विलियम हेनागन ने कहा कि जब बाकी दुनिया चेकर्स खेल रही थी, तब चीन शतरंज खेल रहा था। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि ये छिपे हुए कर्ज चीन को महत्वपूर्ण तकनीकों पर कब्जा जमाने की ताकत दे रहे हैं। आगे उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्ध इस बात पर निर्भर करेंगे कि अर्थव्यवस्था चलाने वाले जरूरी उत्पादों पर किसका नियंत्रण है।

एडडाटा के अनुसार, धनी देशों को दिया गया ज्यादातर कर्ज महत्वपूर्ण खनिजों और हाई-टेक संपत्तियों पर केंद्रित था, जैसे लड़ाकू विमान, पनडुब्बी, रडार सिस्टम, सटीक मिसाइल और दूरसंचार नेटवर्क के लिए जरूरी रेयर अर्थ और सेमीकंडक्टर। एडडाटा के कार्यकारी निदेशक ब्रैड पार्क्स ने कहा कि ट्रंप और बाइडेन दोनों प्रशासनों ने एक दशक से अधिक समय से ढोल पीटा है कि बीजिंग एक शिकारी कर्जदाता है। लेकिन विडंबना देखिए, अमेरिका खुद चीन के सरकारी कर्ज का सबसे बड़ा कर्जदार बन गया है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें

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