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यूक्रेन पर नया रोड़ा? जेलेंस्की चाह रहे युद्धविराम, ट्रंप-पुतिन रट रहे शांति समझौते का राग; दोनों में क्या अंतर

यूक्रेन पर नया रोड़ा? जेलेंस्की चाह रहे युद्धविराम, ट्रंप-पुतिन रट रहे शांति समझौते का राग; दोनों में क्या अंतर

संक्षेप:

युद्धविराम अल्पकालिक से दीर्घकालिक तक हो सकता है। जैसे 1914 का क्रिसमस युद्धविराम जो कुछ दिनों तक चला था। युद्धविराम के ऐसे भी उदाहरण हैं जो दशकों तक चले हैं। जैसे भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से युद्धविराम लागू है।

Aug 20, 2025 11:37 am ISTPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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एक हफ्ते के अंदर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की से मुलाकात कर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी मंशा साफ कर दी है कि वह हर हाल में यूक्रेन युद्ध रोकना चाहते हैं लेकिन हफ्ते भर के अंदर हुई इन हाई प्रोफाइल मुलाकातों के दौरान ट्रंप ने युद्धविराम की बात करते-करते अब शांति वार्ता की राह पकड़ ली है। दरअसल, उनके स्टैंड में आए इस बदलाव के पीछे रूसी राष्ट्रपति पुतिन हैं, जो यूक्रेन के साथ युद्धविराम नहीं बल्कि शांति वार्ता चाहते हैं।

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सोमवार को जब वाइट हाउस में सात यूरोपीय नेताओं के साथ ट्रंप से जेलेंस्की मिलने पहुंचे तो अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट शब्दों में यूक्रेन में युद्धविराम के अपने पुराने आह्वान यानी युद्धविराम को त्यागकर, पुतिन के स्थायी शांति समझौते के प्रयासों का समर्थन किया। हालाँकि, कुछ यूरोपीय नेताओं ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि पहले अस्थायी युद्धविराम लागू किया जाए।

यूरोपीय देशों को क्या डर?

ऐसा भी नहीं है कि यूक्रेन और यूरोपीय सहयोगी देश क्षेत्र में शांति नहीं चाहते लेकिन वे समझ रहे हैं कि शांति वार्ता की आड़ में रूस जिस तरह का समझौता चाहता है, वह तब तक संभव नहीं है, जब तक कि वैश्विक व्यवस्था के सबसे बुनियादी सिद्धांत लागू न हों। कीव और उसके सहयोगियों का स्पष्ट मानना है कि कोई देश शांति वार्ता के नाम पर अपनी मनचाही चीज़ें बलपूर्वक ना तो पा सकता है और ना ही उसे नजरअंदाज करने दिया जा सकता है। दरअसल, कीव के यूरोपीय सहयोगी रूस द्वारा प्रचारित जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि उन्हें भय है कि वे रूसी हमले का अगला निशाना बन सकते हैं।

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सोमवार को ओवल ऑफिस में यूक्रेनी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की और कई यूरोपीय नेताओं से बात करते हुए, ट्रम्प ने मॉस्को के तर्कों का समर्थन किया और सवाल किया कि अगर स्थायी और व्यापक शांति समझौता हो सकता है तो अस्थाई युद्धविराम की क्या जरूरत है? ऐसे में यह समझना जरूरी है कि दोनों (युद्धविराम और शांति समझौता) में क्या बड़ा अंतर है?

क्या होता है युद्धविराम?

युद्धविराम, दरअसल युद्ध के दौरान वैसी स्थिति है, जिसमें युद्धरत पक्ष लड़ाई बंद करने पर सहमत होते हैं और प्रत्येक पक्ष अपने सैन्य नियंत्रण वाले क्षेत्र पर कब्ज़ा बनाए रखता है। आम तौर पर यह माना जाता है कि यह विराम अस्थायी होता है और इस दौरान दोनों पक्ष आपसी बातचीत करते हैं या मानवीय सहायता पहुँचाने या नागरिकों को निकालने के अवसर के रूप में उस अवधि का इस्तेमाल करते हैं।

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युद्धविराम अल्पकालिक से दीर्घकालिक तक हो सकता है। जैसे 1914 का क्रिसमस युद्धविराम जो कुछ दिनों तक चला था। युद्धविराम के ऐसे भी उदाहरण हैं जो दशकों तक चले हैं। जैसे साइप्रस और तुर्की के बीच और भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों से युद्धविराम लागू है, लेकिन इन देशों के बीच कोई स्थायी शांति समझौता नहीं हो सका है।

क्या होता है शांति समझौता?

अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत, शांति समझौता एक औपचारिक, दीर्घकालिक संधि होती है जो दो देशों के बीच भविष्य के संबंधों को निर्धारित करती है। इसके तहत विरोधी देश पर कब्जे वाले क्षेत्र को पूर्ण या आंशिक तौर पर छोड़ने पर सहमति बनती है। यूक्रेन जंग में पुतिन और ट्रंप जो चाहते हैं, वह शांति समझौता है लेकिन उनकी शर्तें ऐसी हैं जो इसे जटिल बना देती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय कानून का एक मूल सिद्धांत है जो संयुक्त राष्ट्र चार्टर में सबसे ऊपर अंकित है। इसके अनुसार, किसी भी पक्ष द्वारा बल प्रयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंधित है। इसलिए इसका यह भी अर्थ है कि बल प्रयोग द्वारा प्राप्त की गई कोई भी संधि प्रभावी रूप से अवैध है।

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शांति समझौते की राह में रोड़ा कहां?

पिछले सप्ताह हुई ट्रंप और पुतिन की मुलाकात के दौरान शांति वार्ता के जिस रूप पर कथित तौर पर चर्चा हुई है, उस पर यूरोप और यूक्रेन को ऐतराज है। पुतिन अपनी कुछ ऐसी मांगों पर अड़े हुए हैं जो अड़चनें पैदा कर रही हैं। ‘द गार्जियन’ के अनुसार रूसी राष्ट्रपति ने कथित तौर पर अपने अमेरिकी समकक्ष से कहा कि वह डोनेट्स्क और लुहान्स्क पर पूर्ण नियंत्रण के बदले में सभी शत्रुताएँ समाप्त करने को तैयार हैं।

इलके अलावा क्रेमलिन ने युद्ध समाप्त करने और शांति समझौता करने के लिए जो शर्तें रखी हैं, उनमें यूक्रेन का नाटो में शामिल न होना, उसका विसैन्यीकरण और नाजी-मुक्ति, अन्य देशों द्वारा हथियारों के निर्यात पर रोक, तथा डोनेट्स्क, लुहांस्क, ज़ापोरीज्जिया और खेरसॉन के बहुसंख्यक रूसी भाषी क्षेत्रों को क्षेत्रीय रियायतें देना, तथा क्रीमिया को रूस का हिस्सा मानने की अंतर्राष्ट्रीय मान्यता शामिल है। माना जा रहा है कि इन शर्तों पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक शांति समझौता होना मुश्किल है।

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen
भूगोल में पीएचडी और पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर उपाधि धारक। ईटीवी से बतौर प्रशिक्षु पत्रकार पत्रकारिता करियर की शुरुआत। कई हिंदी न्यूज़ चैनलों (इंडिया न्यूज, फोकस टीवी, साधना न्यूज) की लॉन्चिंग टीम का सदस्य और बतौर प्रोड्यूसर, सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में काम करने के बाद डिजिटल पत्रकारिता में एक दशक से लंबे समय का कार्यानुभव। जनसत्ता, एनडीटीवी के बाद संप्रति हिन्दुस्तान लाइव में कार्यरत। समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक जगत के अंदर की खबरों पर चिंतन-मंथन और लेखन समेत कुल डेढ़ दशक की पत्रकारिता में बहुआयामी भूमिका। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और संपादन। और पढ़ें

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