कर्ज वापस लिया, कर्मचारियों को निकाला; पाकिस्तान से इतना खफा क्यों UAE? भारत से बढ़ा रहा दोस्ती
कंगाल पाकिस्तान को UAE ने एक के बाद एक 3 बड़े झटके दिए हैं। एतिहाद एयरवेज में छंटनी से लेकर 3.45 अरब डॉलर की वसूली तक, जानिए UAE ने भारत से दोस्ती बढ़ाते हुए पाकिस्तान पर शिकंजा क्यों कसा है। पढ़ें पूरी इनसाइड स्टोरी।

पाकिस्तान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। अब तक उसके एक अहम सहयोगी रहे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने भी अब उससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। यूएई ने हाल ही में कुछ ऐसे सख्त कदम उठाए हैं जिन्होंने इस्लामाबाद की नींद उड़ा दी है। एक तरफ जहां यूएई भारत के साथ अपने रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को लगातार मजबूत कर रहा है, वहीं पाकिस्तान पर वह लगातार शिकंजा कस रहा है।
एतिहाद एयरवेज से पाकिस्तानी कर्मचारियों की अचानक छंटनी, 3.45 अरब डॉलर के लोन की अचानक वापसी और पाकिस्तान से यूएई की बड़ी टेलीकॉम कंपनी के निकलने की अटकलें इस बात का साफ इशारा हैं कि दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ चुकी है। आइए समझते हैं कि यूएई ने क्या-क्या कदम उठाए हैं और इसके पीछे की वजहें क्या हैं।
एतिहाद एयरवेज से 15 पाकिस्तानियों को 48 घंटे में निकाला
हाल ही में यूएई की प्रमुख एयरलाइन एतिहाद एयरवेज ने अबू धाबी में काम कर रहे 15 पाकिस्तानी कर्मचारियों को अचानक नौकरी से निकाल दिया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि:
इन कर्मचारियों को बिना किसी सामान्य एचआर (HR) प्रक्रिया का पालन किए सीधे निकाल दिया गया।
उन्हें इमिग्रेशन ऑफिस बुलाया गया और महज 48 घंटे के भीतर यूएई छोड़ने का सख्त आदेश दिया गया।
निकाले गए लोगों में कुछ ऐसे अनुभवी पेशेवर भी शामिल हैं, जो करीब दो दशक (20 साल) से इस एयरलाइन को अपनी सेवाएं दे रहे थे।
विश्लेषकों के मुताबिक, इस मामले में सीधे इमिग्रेशन अधिकारियों का शामिल होना और 48 घंटे में डिपोर्टेशन का आदेश देना यह बताता है कि यह कोई सामान्य कॉर्पोरेट छंटनी नहीं है, बल्कि अबू धाबी की तरफ से पाकिस्तान को दिया गया एक सख्त कूटनीतिक संदेश है।
3.45 अरब डॉलर के लोन की अचानक वापसी का झटका
पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब यूएई ने अपने 3.45 अरब डॉलर के कर्ज की अचानक मांग कर दी।
यह रकम यूएई ने 2019 में अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट (ADFD) के तहत पाकिस्तान के भुगतान संतुलन को स्थिर करने के लिए दी थी।
पाकिस्तान सरकार और आईएमएफ (IMF) को उम्मीद थी कि 2027 में आईएमएफ प्रोग्राम के खत्म होने तक यूएई इस पैसे की वापसी का दबाव नहीं बनाएगा।
लेकिन यूएई के अचानक पैसे मांगने से पाकिस्तान सकते में आ गया। इसके तुरंत बाद, पाकिस्तान को सऊदी अरब से मिले 3 अरब डॉलर के ताज़ा फंड का इस्तेमाल करके यूएई का यह पूरा कर्ज चुकाना पड़ा।
पाकिस्तान से बाहर निकल सकती है यूएई की टेलीकॉम कंपनी
यूएई का सख्त रवैया सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं है, इसका असर व्यापार पर भी दिखने लगा है। यूएई की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी 'ईएंड' (e& - जिसे पहले एतिसलात के नाम से जाना जाता था) भी पाकिस्तान से बाहर निकलने पर विचार कर रही है।
यह कंपनी पाकिस्तान की सरकारी टेलीकॉम कंपनी (PTCL) में 26% की हिस्सेदार है और इसका प्रबंधन भी इसी के पास है।
ग्लोबल अनिश्चितता और जियो-पॉलिटिक्स का हवाला देते हुए कंपनी अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा कर रही है और माना जा रहा है कि वह पाकिस्तान से अपना निवेश पूरी तरह समेट सकती है।
आखिर पाकिस्तान पर क्यों शिकंजा कस रहा है यूएई?
यूएई के इस सख्त रवैये के पीछे कुछ बेहद अहम कूटनीतिक और भू-राजनीतिक कारण हैं:
भारत के साथ मजबूत होते रिश्ते: यूएई अब भारत के साथ अपनी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी को ज्यादा महत्व दे रहा है। अबू धाबी भारत में बड़े पैमाने पर निवेश कर रहा है और भारत को एक भरोसेमंद और बड़े आर्थिक साझीदार के रूप में देखता है। ऐसी खबरें हैं कि जब पीएम मोदी इसी महाने यूरोप की यात्रा पर जाएंगे तो वह रास्ते में यूएई रुक सकते हैं।
पाकिस्तान का न्यूट्रल रवैया: यूएई ईरान जैसे क्षेत्रीय तनाव के मुद्दों पर पाकिस्तान के 'तटस्थ' रुख से नाखुश है। यूएई चाहता था कि इस्लामाबाद इन मामलों में ज्यादा स्पष्ट और सख्त स्टैंड ले।
सऊदी अरब से पाकिस्तान की नजदीकियां: पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय पूरी तरह से सऊदी अरब के फंड पर निर्भर होती जा रही है। सऊदी और यूएई के बीच खाड़ी क्षेत्र में अपना दबदबा कायम करने की अंदरूनी होड़ चल रही है। ऐसे में पाकिस्तान का सऊदी के करीब जाना यूएई को पसंद नहीं आ रहा है।
इन तमाम घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि खाड़ी देशों में अब पाकिस्तान का प्रभाव सीमित होता जा रहा है। पाकिस्तान की आर्थिक कमजोरी अब सिर्फ देश के भीतर नहीं, बल्कि विदेशों में काम कर रहे उसके नागरिकों के लिए कूटनीतिक और सामाजिक संकट का कारण बन रही है। दूसरी तरफ, भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और विदेश नीति के कारण यूएई जैसे प्रभावशाली देश उसके साथ लगातार अपने संबंध प्रगाढ़ कर रहे हैं।
लेखक के बारे में
Amit Kumarडिजिटल पत्रकारिता की बदलती लहरों के बीच समाचारों की तह तक जाने की ललक अमित कुमार को इस क्षेत्र में खींच लाई। समकालीन राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पैनी नजर रखने के साथ-साथ अमित को जटिल विषयों के गूढ़ विश्लेषण में गहरी रुचि है। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के रहने वाले अमित को मीडिया जगत में एक दशक का अनुभव है। वे पिछले 4 वर्षों से लाइव हिन्दुस्तान में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
अमित न केवल समाचारों के त्वरित प्रकाशन में माहिर हैं, बल्कि वे खबरों के पीछे छिपे 'क्यों' और 'कैसे' को विस्तार से समझाने वाले एक्सप्लेनर लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं। डिजिटल पत्रकारिता के नए आयामों, जैसे कि कीवर्ड रिसर्च, ट्रेंड एनालिसिस और एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन को वे बखूबी समझते हैं। उनकी पत्रकारिता की नींव 'फैक्ट-चेकिंग' और सत्यापन पर टिकी है। एक मल्टीमीडिया पत्रकार के तौर पर अमित का सफर देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ रहा है। उन्होंने अमर उजाला, वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे बड़े मीडिया घरानों के साथ काम किया है।
अमित ने देश के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से जनसंचार में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्होंने यूनिसेफ और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से हेल्थ जर्नलिज्म का सर्टिफिकेशन भी प्राप्त किया है। एआई-असिस्टेड कंटेंट ऑप्टिमाइजेशन और एडिटोरियल प्लानिंग में उनकी विशेषज्ञता उन्हें आज के आधुनिक न्यूज रूम के लिए एक अनिवार्य स्तंभ बनाती है। पेशेवर जीवन से इतर, अमित एक जुनूनी घुमक्कड़ हैं जिन्हें हार्डकोर ट्रेकिंग और फोटोग्राफी का शौक है, साथ ही वे ऐतिहासिक और वास्तविक जीवन पर आधारित सिनेमा देखने के भी शौकीन हैं।
और पढ़ेंलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


