यूनिवर्सिटी जॉब दिलाएंगे...; H-1B वीजा फ्रॉड में भारतीय मूल के दो आरोपियों ने कबूला गुनाह
अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को जारी दस्तावेजों में खुलासा किया कि संपथ राजिदी दो वीजा प्रोसेसिंग कंपनियों का संचालन करते थे। इन कंपनियों के माध्यम से वे विदेशी कामगारों के लिए एच-1बी वीजा आवेदन दाखिल करते थे।

अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के दो व्यक्तियों ने एच-1बी वीजा धोखाधड़ी की साजिश रचने का आरोप स्वीकार कर लिया है। अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, कैलिफोर्निया के डबलिन शहर के निवासी संपथ राजिदी और श्रीधर मदा ने विदेशी नागरिकों को नौकरी दिलाने के नाम पर बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी की।
दोनों आरोपियों ने विदेशी श्रमिकों को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय (University of California) में नौकरी दिलाने का झूठा वादा किया, जबकि वास्तव में विश्वविद्यालय में ऐसी कोई भर्ती प्रक्रिया या पद उपलब्ध नहीं थे। अदालती दस्तावेजों के मुताबिक, यदि दोषी साबित होते हैं तो दोनों को अधिकतम पांच साल तक की जेल की सजा और 2 लाख 50 हजार डॉलर तक का भारी जुर्माना लग सकता है।
दस्तावेजों से हुआ खुलासा
अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को जारी दस्तावेजों में खुलासा किया कि संपथ राजिदी दो वीजा प्रोसेसिंग कंपनियों (एस-टीम सॉफ्टवेयर इंक. और अपट्रेंड टेक्नोलॉजीज एलएलसी) का संचालन करते थे। इन कंपनियों के माध्यम से वे विदेशी कामगारों के लिए एच-1बी वीजा आवेदन दाखिल करते थे।
दूसरी ओर, श्रीधर मदा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के कृषि और प्राकृतिक संसाधन विभाग में मुख्य सूचना अधिकारी के पद पर तैनात थे। उनके पास केवल पर्यवेक्षण का अधिकार था और बिना वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के उन्हें विभाग में एच-1बी वीजा पर कर्मचारियों की भर्ती करने का कोई अधिकार नहीं था।
फर्जी एच-1बी वीजा याचिकाएं की दाखिल
जून 2020 से जनवरी 2023 तक दोनों ने मिलकर कई विदेशी नागरिकों के लिए फर्जी एच-1बी वीजा याचिकाएं दाखिल कीं। राजिदी ने याचिकाओं में झूठा दावा किया कि लाभार्थियों को कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में नौकरी मिलेगी, जबकि मदा ने अपने पद का दुरुपयोग कर इस झूठे दावे की पुष्टि की कि लाभार्थी विश्वविद्यालय की परियोजनाओं पर काम करेंगे।
दोनों आरोपियों को पूरी जानकारी थी कि याचिकाओं में बताए गए पद अस्तित्व में नहीं थे। वास्तव में लाभार्थी विश्वविद्यालय में काम नहीं करते थे, बल्कि इन्हें अन्य क्लाइंट्स के सामने पेश करने के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इस धोखाधड़ी के कारण एच-1बी वीजा लॉटरी प्रणाली में अन्य कंपनियों के सच्चे आवेदकों के स्थान छिन गए, जिससे नियमों का पालन करने वाली फर्मों को नुकसान पहुंचा।
जानबूझकर दी झूठी जानकारी
अदालती दस्तावेजों में कहा गया है कि आरोपियों ने जानबूझकर झूठी जानकारी दी, जो अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के वीजा निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण थी। इस साजिश से उन्होंने अन्य फर्मों पर अनुचित लाभ हासिल किया और प्रतिस्पर्धी कंपनियों के लिए उपलब्ध एच-1बी वीजा कोटे को घटा दिया।
इस मामले की जांच अमेरिकी विदेश विभाग की डिप्लोमैटिक सिक्योरिटी सर्विस, होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस, ट्रेजरी इंस्पेक्टर जनरल और यूएससीआईएस की फ्रॉड डिटेक्शन एंड नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टरेट समेत कई संघीय एजेंसियों द्वारा की जा रही है। जबकी मामले की पैरवी सहायक अमेरिकी अटॉर्नी डगलस हारमन कर रहे हैं।
लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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