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कपल का तलाक तो बीवी ने मांगा 'कैट अलाउंस', बिल्लियों के नाम पर भी देने होंगे पैसे

कपल का तलाक तो बीवी ने मांगा 'कैट अलाउंस', बिल्लियों के नाम पर भी देने होंगे पैसे

संक्षेप:

इस्तांबुल के रहने वाले बुगरा और उनकी पूर्व पत्नी एजगी ने दो साल की शादी के बाद वैवाहिक कलह के चलते अलग रहने का फैसला किया। तलाक के सौदे में एजगी को बिल्लियों की कस्टडी मिल गई, वहीं बुगरा ने अगले 10 वर्षों तक उनकी देखभाल के लिए हर तिमाही 10,000 लीरा देने का वादा किया।

Nov 03, 2025 10:02 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
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आमतौर पर तलाक के मामलों में पत्नी बच्चों या खुद के लिए गुजारा भत्ता मांगती नजर आती है, लेकिन तुर्की से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसे जानकर आप भी दंग रह जाएंगे। दरअसल, यहां एक दंपती के तलाक के दौरान पत्नी ने अपने पति से हर तीन महीने में 10,000 तुर्की लीरा (करीब 240 अमेरिकी डॉलर) की मांग की। हैरान करने वाली बात ये है कि ये रकम न तो उसके लिए थी और न ही बच्चों के लिए, बल्कि दो पालतू बिल्लियों के 'कैट अलाउंस' के नाम पर मांगी गई।

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साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह अजीबो-गरीब समझौता न सिर्फ दुनिया भर में चर्चा का विषय बन गया है, बल्कि तुर्की की तेजी से बढ़ती पेट इकोनॉमी का एक बड़ा उदाहरण भी माना जा रहा है। तुर्की मीडिया हाउस येनिसाफाक के हवाले से SCMP ने खबर दी कि इस्तांबुल के रहने वाले बुगरा और उनकी पूर्व पत्नी एजगी ने दो साल की शादी के बाद वैवाहिक कलह के चलते अलगाव का फैसला किया। शादी के दौरान यह जोड़ा संयुक्त रूप से दो पालतू बिल्लियों का ख्याल रखता था।

तलाक के सौदे में एजगी को बिल्लियों की कस्टडी मिल गई, वहीं बुगरा ने अगले 10 वर्षों तक उनकी देखभाल के लिए हर तिमाही 10,000 लीरा देने का वादा किया। यह रकम बिल्लियों के खाने, वैक्सीनेशन, मेडिकल जरूरतों और अन्य खर्चों को कवर करेगी। इसमें मुद्रास्फीति के हिसाब से सालाना एडजस्टमेंट भी होगा, और बिल्लियों की मौत पर ये भुगतान रुक जाएगा। यह अवधि एक बिल्ली के औसत 15 साल के जीवनकाल को ध्यान में रखकर तय की गई है।

इसके अलावा, अदालत ने फैसला दिया कि पालतू जानवरों के रखरखाव के अतिरिक्त, बुगरा एजगी को 5,50,000 लीरा (लगभग 13,000 डॉलर) का अलग से आर्थिक मुआवजा भी देगा।

तुर्की के पशु संरक्षण नियम

कानूनी जानकार आयलिन एसरा एरेन के अनुसार, तुर्की में पालतू जानवरों का रजिस्ट्रेशन माइक्रोचिपिंग के माध्यम से होता है, जो उन्हें आधिकारिक तौर पर मालिक का कानूनी अभिभावक बनाता है। देश के पशु संरक्षण कानूनों में पालतू जानवरों को संपत्ति नहीं, बल्कि 'जीवित प्राणी' का दर्जा दिया गया है। इन्हें सड़क पर छोड़ना नैतिक और कानूनी अपराध दोनों माना जाता है। एरेन ने बताया कि अगर किसी पालतू की उचित देखभाल न हो, तो वह आवारा बन जाता है, और माइक्रोचिप वाले जानवर को छोड़ना सख्ती से प्रतिबंधित है।

ऐसे मामलों में दोषी पर 60000 लीरा तक का भारी जुर्माना लग सकता है। एरेन ने जोर देकर कहा कि यह केस तलाक प्रक्रिया में पालतू जानवरों की देखभाल की कानूनी जिम्मेदारियों को स्पष्ट करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि ये भुगतान गुजारा भत्ता नहीं गिने जा सकते, क्योंकि कानूनन केवल पति-पत्नी ही इसका हकदार होता है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें

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