ईरान में फाइटर जेट गिरने पर घबरा गए थे ट्रंप, सता रहा था जिमी कार्टर वाला डर; कमरे से बाहर किए गए
ईरान में अमेरिकी फाइटर जेट के गिरने के बाद डोनाल्ड ट्रंप घबरा गए थे। उन्हें डर था कि कहीं ईरान अमेरिकी पायलट्स को बंदी न बना लें। उन्होंने अधिकारियों पर चिल्लाते हुए कहा था कि जिमी कार्टर के समय में बंधक संकट ने कार्टर की कुर्सी छीन ली थी।

पश्चिम एशिया में जारी संकट अब धीरे-धीरे शांति की तरफ बढ़ रहा है। हालांकि, अभी भी कुछ उलझनें बनी हुई हैं, लेकिन दोनों ही पक्ष अब शांति की कोशिश में लगे हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कभी सख्त तो कभी नरम रुख अपनाए हुए हैं। ट्रंप के बयानों से ऐसा लगता है कि ईरान युद्ध को लेकर उनकी दिलचस्पी अब धीरे-धीरे कम हो रही है। फरवरी के अंत में ईरान में सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहे ट्रंप अब ईरान में स्थायी शांति समझौते की तरफ देख रहे हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप की इस योजना परिवर्तन के पीछे ईरान में अमेरिकी फाइटर जेट का क्रैश होना एक बड़ी वजह रही। इस घटना के बारे में जानकर ट्रंप इतने घबरा गए कि उन्होंने अधिकारियों के ऊपर जमकर चिल्लाया और उन्हें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर की याद दिलाई।
वाशिंगटन पोस्ट ने वाइट हाउस के कर्मचारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप के दोनों कार्यकालों के समय में अभी तक ऐसा गुस्सा नहीं देखा गया था। जैसे ही ट्रंप को पता चला कि ईरान में अमेरिकी फाइटर जेट क्रैश हो गया है और दो फाइटर पायलट लापता हैं, वह अपना आपा खो बैठे। रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने अपने सहयोगियों के ऊपर जमकर गुस्सा निकाला और नाटो के देशों को भी जमकर कोसा।
ट्रंप ने अधिकारियों को बताया जिमी कार्टर वाला डर
वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने अधिकारियों से चिल्लाते हुए कहा, "जिमी कार्टर के साथ जो हुआ उसे देखो... हेलीकॉप्टरों और बंधकों के मामले में उन्हें अपना चुनाव हारना पड़ा था। क्या गड़बड़ थी।" इसके बाद उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि कैसे भी करके अमेरिका को अपने सैनिकों को बचाना ही होगा।
दरअसल, अमेरिका के राष्ट्रपति के दिमाग में जिमी कार्टर वाला डर बैठा हुआ था। 1979 की ईरानी क्रांति के दौरान तेहरान में दर्जनों अमेरिकियों को बंदी बना लिया गया था। इस घटना को आधुनिक समय की सबसे बड़ी कूटनीतिक विफलताओं में से एक माना जाता है। ट्रंप को डर था कि अगर अमेरिकी पायलट्स को भी ईरान बंदी बना लेता है, तो यह उनके लिए एक बड़ी अपमानजनक बात होगी।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस वक्त सैनिकों को खतरे में डालने से डर रहे हैं। वह शुरुआत से ही अमेरिकी सैनिकों को ऐसे किसी भी यु्द्ध में नहीं भेजना चाहते थे, जहां पर उनकी जान को खतरा हो। ईरान के मुद्दे पर भी ट्रंप का अनुमान था कि यह युद्ध जल्दी ही खत्म हो जाएगा। लेकिन ईरान अंदर से मजबूत निकला और अपने हल्के हथियारों के दम पर अमेरिका और इजरायल की नाक में दम कर दिया।
अमेरिकी अधिकारियों ने ट्रंप को कंट्रोल रूम से किया बाहर
वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध की पल-पल की जानकारी लेने वाले ट्रंप को उनके अधिकारियों ने कंट्रोल रूम से बाहर ही रखा था। अधिकारियों का मानना था कि ट्रंप को अगर सिचुएशन रूम में रखा जाता है, तो वह और भी ज्यादा अधीरता के साथ फैसले ले सकते हैं, जो कि युद्ध की स्थिति को और भी ज्यादा जटिल बना देंगे। इसलिए ट्रंप को केवल महत्वपूर्ण मसलों की ही जानकारी दी जा रही थी। सिचुएशन रूम का हिस्सा रहे एक अधिकारी ने दावा किया, "1979 के ईरानी बंधक संकट की तस्वीरें, जो हाल के समय में किसी राष्ट्रपति के कार्यकाल की सबसे बड़ी अंतरराष्ट्रीय नीतिगत विफलताओं में से एक थी। यह तस्वीर उनके दिमाग में छाई हुई थीं।"
ट्रम्प का सबसे बड़ा डर
ईरान की सभ्यता को खत्म करने और खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की अपनी बड़ी धमकियों के बावजूद, ट्रम्प कथित तौर पर सैनिकों को खतरे में डालने से डरते हैं। इस मामले के जानकार लोगों ने बताया कि राष्ट्रपति को डर है कि सैनिक घायल हो जाएंगे और कुछ वापस नहीं लौटेंगे, जैसा कि युद्ध में शामिल अन्य राष्ट्रपतियों के समय हुआ था। हालांकि, इसके बाद भी ट्रंप अपनी टीम से संपर्क स्थापित किए बिना कई तरह की धमकियां देते रहते हैं। ट्रम्प का यह भी मानना है कि अस्थिर और अपमानजनक दिखना ईरानियों को बातचीत के लिए प्रेरित कर सकता है। उन्होंने अपने एक सहयोगी से कहा कि ईरानी केवल भय और अपमान की भाषा समझते हैं।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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