ईरान पर हमले के 4 उद्देश्य, ट्रंप ने बता दिया पूरा प्लान, सैनिक तेहरान भेजने से भी नहीं इनकार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा अमेरिका लंबा युद्ध लड़ने के लिए भी तैयार है। अमेरिकी सेना चार हफ्तों से भी ज्यादा लड़ सकती है। इसके अलावा राष्ट्रपति ट्रंप ने जरूरत पड़ने पर तेहरान में अमेरिकी सैनिक भेजने की संभावना से भी इनकार नहीं किया।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले के अपने उद्देश्यों को एक बार फिर से जगजाहिर कर दिया है। युद्ध के लंबे खिंचने की आशंका को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका की सेना चार-पांच हफ्तों से भी ज्यादा समय तक कार्रवाई कर सकती है। इतना ही नहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने जरूरत पड़ने पर ईरान के अंदर अमेरिकी सैनिक उतारने की संभावना से भी इनकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ती है, तो उन्हें ईरान की धरती पर अमेरिकी सेना उतारने में कोई परेशानी नहीं है।
ईरान के ऊपर किए गए अमेरिकी और इजरायली हमलों को लेकर उन्होंने एक बार फिर से अपने उद्देश्य साझा किए। उन्होंने कहा, “ इस युद्ध के लिए हमारे चार उद्देश्य हैं, जो कि पूरी तरह से स्पष्ट हैं। पहला,हम ईरान की मिसाइल क्षमताओं को नष्ट कर रहे हैं, और आप इसे हर घंटे होते देख रहे हैं। साथ ही उनकी नई और उन्नत मिसाइलें बनाने की क्षमता को भी खत्म कर रहे हैं। दूसरा,हम उनकी नौसेना को पूरी तरह खत्म कर रहे हैं। हम पहले ही उनके 10 जहाजों को नष्ट कर चुके हैं। तीसरा यह कि हम सुनिश्चित कर रहे हैं कि दुनिया का नंबर एक आतंकवाद प्रायोजक देश कभी भी परमाणु हथियार हासिल न कर सके। और अंत में हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ईरानी शासन अपनी सीमाओं के बाहर आतंकवादी सेनाओं को हथियार देना, फंडिंग करना और निर्देशित करना जारी न रख सके।”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोमवार को युद्ध की सभी संभावनाओं को लेकर बात की। उन्होंने कहा, "हम पहले से ही तय समय-सीमा से काफी आगे चल रहे हैं, लेकिन अगर जरूरत पड़ती है, तो हमारी सेना इससे ज्यादा समय तक भी कार्रवाई कर सकती है। चाहे समय कितना भी लगे, ठीक है, जितना समय लगेगा, हम उतना काम करेंगे। शुरुआत में ही हमने चार से पांच हफ्तों का अनुमान लगाया था, लेकिन हमारे पास इससे कहीं ज्यादा समय तक अभियान चलाने की क्षमता है। हम करेंगे।”
गौरतलब है कि राष्ट्रपति ट्रंप के पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगशेथ ने भी सोमवार को ईरान में अमेरिका-इजराइल के हमलों के एक लंबे क्षेत्रीय संघर्ष में तब्दील होने की बढ़ती चिंताओं पर कहा कि यह ''इराक नहीं है और यह अंतहीन नहीं है''। हेगसेथ ने वायुसेना के जनरल एवं 'ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ' के अध्यक्ष डैन केन के साथ शनिवार के हमलों के बाद से ट्रंप प्रशासन की पहली प्रेसवार्ता की। हेगसेथ ने कहा, ''...हम जीतने के लिए लड़ते हैं, और हम समय या जीवन बर्बाद नहीं करते। यह तथाकथित सत्ता परिवर्तन का युद्ध नहीं है, लेकिन सत्ता परिवर्तन निश्चित रूप से हुआ है और दुनिया के लिए यह बेहतर स्थिति है।''
आपको बता दें, अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से युद्ध को लंबा खींचने को लेकर यह बयान ऐसे समय में आया है, जब मध्य-पूर्व के क्षेत्र में तीन देशों के बीच का संघर्ष एक व्यापक युद्ध में तब्दील हो चुका है। ईरान और उसके सहयोगी सशस्त्र समूहों ने इजराइल, अरब देशों और पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल दागी हैं। इस युद्ध में चार अमेरिकी सैनिक मारे गए हैं। ट्रंप ने रविवार को कहा था कि और भी अमेरिकी सैनिक हताहत हो सकते हैं। केन ने सोमवार को कहा कि अमेरिका को अतिरिक्त नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने मारे गए सैन्यकर्मियों के परिजनों से कहा, ''हम आपके साथ शोक में शामिल हैं, और हम आपको कभी नहीं भूलेंगे।'' अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस युद्ध में मारे गए चारों सैनिकों को सम्मान के साथ याद किया।
गौरतलब है कि इस युद्ध के अब लंबा खिंचने की आशंका बन गई है। अमेरिकी की तरफ से की गई पहली कार्रवाई में ही ईरान के सुप्रीम लीडर की जान चली गई है, जिसकी वजह से बातचीत की संभावना को बहुत जोर का धक्का लगा है। अब सत्ता परिवर्तन करने के लिए अमेरिका, ईरान की जनता के विद्रोह पर निर्भर हो गई है, अगर कुछ समय तक ऐसा नहीं होता है, तो अमेरिका एक बार फिर से लंबे युद्ध में फंस सकता है, जो कि वह नहीं कहना चाहता होगा।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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