पीएम मोदी के मुकाबले ट्रंप कमजोर, पलटे जा सकते हैं फैसले; एक्सपर्ट ने क्यों कहा ऐसा
जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर ने कहा है कि अमेरिका का अगला राष्ट्रपति ट्रंप के कई फैसलों को पलट सकता है। यह शी जिनपिंग नहीं हैं। ये मोदी भी नहीं हैं, जो भारत में 10 साल से अधिक समय से शासन कर रहे हैं और एक लोकतंत्र में काफी लोकप्रिय हैं
जियो-पॉलिटिकल एक्सपर्ट इयान ब्रेमर ने अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद वाइट हाउस की नीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ब्रेमर ने कहा कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को वेनेजुएला से मिलने वाले अल्पकालिक लाभ दीर्घकालिक नहीं रह सकते, क्योंकि ट्रंप का कार्यकाल सीमित है और उनके उत्तराधिकारी उनके कई फैसलों को पलट सकते हैं। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना में ट्रंप की स्थिति को कमजोर बताया। मोदी अपनी लोकप्रियता के बल पर 10 वर्षों से अधिक समय से सत्ता में हैं, जबकि ट्रंप अलोकप्रिय हैं, 80 वर्ष के हैं और 2029 में पद छोड़ देंगे। ब्रेमर का मानना है कि अमेरिका में हर चार साल में होने वाला नेतृत्व परिवर्तन नीतियों में निरंतरता की कमी पैदा करता है, जो चीन, रूस या भारत जैसे देशों में नहीं देखी जाती।
इंडिया टुडे से बातचीत में ब्रेमर ने बताया कि ट्रंप का उत्तराधिकारी उनके कई कार्यों को उलट सकता है, ठीक वैसे ही जैसे ट्रंप ने अपने पूर्ववर्ती के साथ किया। ब्रेमर ने कहा कि चीन, रूस और भारत के विपरीत, अमेरिका में हर चार साल में नेतृत्व बदलने से सरकारी नीतियों में निरंतरता नहीं रहती, जिसके परिणाम आने में समय लगता है। ब्रेमर ने आगे कहा कि खैर, अगला राष्ट्रपति ट्रंप के कई फैसलों को पलट सकता है। यह शी जिनपिंग नहीं हैं। ये मोदी भी नहीं हैं, जो भारत में 10 साल से अधिक समय से शासन कर रहे हैं और एक लोकतंत्र में काफी लोकप्रिय हैं। ये ट्रंप हैं, जो काफी अलोकप्रिय हैं, 80 साल के हैं और तीन साल में सत्ता से बाहर हो जाएंगे।
ब्रेमर ने कहा कि वैश्विक तेल कीमतें, वेनेजुएला में राजनीतिक स्थिरता और ट्रंप के बाद का युग कैसा होगा, ये सभी तय करेंगे कि अमेरिका को कराकास के विशाल तेल भंडार से दीर्घकालिक लाभ मिलेगा या नहीं। तेल की बात करें तो आप जानते हैं कि वेनेजुएला इस समय प्रतिदिन केवल लगभग 8 लाख बैरल तेल का उत्पादन कर रहा है। यह पहले 30 लाख बैरल हुआ करता था। लेकिन इसे बढ़ाने के लिए राजनीतिक स्थिरता की जरूरत है।
उन्होंने आगे कहा कि आपको एक ऐसे आर्थिक वातावरण की आवश्यकता है जिसमें तेल कंपनियां भरोसा कर सकें। आपको यह विश्वास होना चाहिए कि वे तेल बैरल लाभदायक होंगे और ऊर्जा कीमतें फिलहाल काफी कम हैं। वेनेजुएला से तेल निकालने के बारे में ब्रेमर ने कहा कि तेल कंपनियों का निवेश चक्र अमेरिकी राष्ट्रपतियों के कार्यकाल से कहीं अधिक लंबा होता है। उन्होंने कहा कि आपको यह विश्वास भी होना चाहिए कि ट्रंप जिस राजनीतिक व्यवस्था का समर्थन कर रहे हैं, वह 2029 में ट्रंप के राष्ट्रपति न रहने पर भी कायम रहेगी।

लेखक के बारे में
Devendra Kasyapदेवेन्द्र कश्यप पिछले 13 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अगस्त 2025 से वह लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के पद पर कार्यरत हैं। संस्थान की होम टीम का वह एक अहम हिस्सा हैं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर उनकी पैनी नजर रहती है। वायरल कंटेंट के साथ-साथ लीक से हटकर और प्रभावशाली खबरों में उनकी विशेष रुचि है।
देवेन्द्र ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2013 में महुआ न्यूज से की। करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने बिहार की राजधानी पटना में रिपोर्टिंग की। इस दौरान राजनीति के साथ-साथ क्राइम और शिक्षा बीट पर भी काम किया। इसके बाद उन्होंने जी न्यूज (बिहार-झारखंड) में अपनी सेवाएं दीं। वर्ष 2015 में ईनाडु इंडिया के साथ डिजिटल मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में कार्य किया।
मूल रूप से बिहार के भोजपुरी बेल्ट रोहतास जिले के रहने वाले देवेन्द्र कश्यप ने अपनी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा पटना से प्राप्त की। उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातक की डिग्री हासिल की और MCU भोपाल से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया। वर्तमान में वह उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में प्रवास कर रहे हैं।
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