ट्रंप ने 'खुद से' बढ़ाया सीजफायर, ईरान को हो रहा शक- समय निकाल रहा अमेरिका

Apr 22, 2026 08:21 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, तेहरान
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ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है। हालांकि, अमेरिकी नाकाबंदी अब भी जारी है जिसे ईरान ने 'नए हमले की साजिश' बताया है। अमेरिका-ईरान संघर्ष और शांति वार्ता की पूरी खबर पढ़ें।

ट्रंप ने 'खुद से' बढ़ाया सीजफायर, ईरान को हो रहा शक- समय निकाल रहा अमेरिका

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को घोषणा करते हुए बताया कि उन्होंने ईरान के साथ युद्धविराम को अनिश्चित काल के लिए बढ़ा दिया है। यह फैसला युद्धविराम के समाप्त होने से कुछ घंटे पहले लिया गया, ताकि दोनों देश शांति वार्ता जारी रख सकें और सात सप्ताह से चल रहे उस युद्ध को समाप्त कर सकें जिसने हजारों लोगों की जान ले ली है और वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है।

पाकिस्तान की मध्यस्थता

दिन की शुरुआत में दी गई अपनी ही धमकियों से पीछे हटते हुए, ट्रंप ने कहा कि उन्होंने यह फैसला पाकिस्तान के अनुरोध पर लिया है। पाकिस्तान इस युद्ध में शांति वार्ता की मध्यस्थता कर रहा है। ट्रंप ने कहा कि वे ईरान पर तब तक हमला रोकेंगे जब तक कि वहां के नेता एक सटीक प्रस्ताव लेकर नहीं आते।

Trump's ceasefire extension

एकतरफा फैसला और जारी नाकाबंदी

ट्रंप की यह घोषणा एकतरफा प्रतीत हो रही है। यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान या अमेरिका का सहयोगी देश इजरायल इस विस्तार से सहमत होंगे या नहीं। ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी नौसेना द्वारा ईरान के बंदरगाहों और तटों की नाकाबंदी जारी रहेगी, जिसे ईरान पहले ही 'युद्ध का कृत्य' करार दे चुका है।

ईरान की तीखी प्रतिक्रिया

ईरान के शीर्ष नेताओं की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी 'तस्नीम न्यूज एजेंसी' ने कहा कि ईरान ने युद्धविराम बढ़ाने की कोई मांग नहीं की थी और उसने अमेरिकी नाकाबंदी को बलपूर्वक तोड़ने की धमकी को दोहराया। ईरान के प्रमुख वार्ताकार और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने कहा कि ट्रंप की इस घोषणा का कोई खास महत्व नहीं है। उन्होंने इस पर शक जताते हुए कहा कि ये कोई चाल हो सकती है।

मोहम्मदी ने सोशल मीडिया पर कहा- ट्रंप द्वारा युद्धविराम बढ़ाना निश्चित रूप से एक अचानक हमले के लिए समय निकालने की चाल है। उन्होंने अमेरिकी नाकाबंदी को निरंतर सैन्य आक्रामकता बताया और कहा कि अब ईरान के लिए पहल करने का समय आ गया है।

धमकियों से पीछे हटे ट्रंप

यह पहली बार नहीं है जब ट्रंप ने अंतिम क्षणों में अपने कड़े रुख से कदम पीछे खींचे हों। इससे पहले वे ईरान के हर पावर प्लांट पर बमबारी करने की धमकी दे चुके थे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस सहित कई अन्य नेताओं ने इन धमकियों की कड़ी निंदा की थी और याद दिलाया था कि अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से रोकता है। ट्रंप ने 28 फरवरी को इजराइल के साथ मिलकर ईरान पर युद्ध शुरू किया था। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने युद्धविराम इसलिए बढ़ाया क्योंकि ईरान की सरकार गंभीर रूप से टूट चुकी है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का आभार

ट्रंप का यह रुख उनके उस बयान के कुछ ही घंटों बाद आया जिसमें उन्होंने CNBC को दिए इंटरव्यू में कहा था कि वे युद्धविराम बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं और अमेरिकी सेना हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। युद्धविराम की घोषणा के बाद, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया पर ट्रंप को धन्यवाद दिया और कूटनीतिक प्रयासों को समय देने के लिए उनके फैसले की सराहना की। शरीफ ने इस्लामाबाद में होने वाले दूसरे दौर की वार्ता में एक स्थायी और व्यापक शांति समझौते की उम्मीद जताई। फिलहाल, अमेरिकी नाकाबंदी दोनों देशों के बीच एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है और यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि इस्लामाबाद में दूसरे दौर की शांति वार्ता कब होगी, या होगी भी या नहीं।

ट्रंप ने कहा- ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखना चाहता है 'ताकि वे अपना तेल बेच सकें'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के दबाव को सिरे से खारिज कर दिया है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर ईरान की धमकियों का जवाब देते हुए ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान खुद चाहता है कि यह अहम समुद्री मार्ग खुला रहे, ताकि वे अपना तेल बेच सकें और अपनी अर्थव्यवस्था को बचा सकें। हाल ही में, ईरान की केंद्रीय सैन्य कमान ने घोषणा की थी कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर सख्त नियंत्रण फिर से लागू कर रहा है। ईरान ने यह कदम अमेरिका पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए उठाया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर अपनी नौसैनिक नाकाबंदी खत्म नहीं करता, तब तक इस जलमार्ग से जहाजों की आवाजाही को सख्ती से नियंत्रित किया जाएगा। इस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक ईरान के साथ (खासकर उसके परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर) एक नया और ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी नाकाबंदी पूरी ताकत से लागू रहेगी। ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि हमारी बहुत अच्छी बातचीत चल रही है। हम उनसे बात कर रहे हैं... लेकिन ईरान हमें ब्लैकमेल नहीं कर सकता। ट्रंप का तर्क है कि तेल निर्यात पर निर्भर ईरान को अपना कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के लिए खुद इस मार्ग की सख्त जरूरत है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के तेल व्यापार का सबसे महत्वपूर्ण चोकपॉइंट है। दुनिया भर के तेल व्यापार का लगभग 20% हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है। इस मार्ग पर किसी भी तरह की पाबंदी या सैन्य टकराव वैश्विक आपूर्ति को बाधित कर सकता है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका है। स्थिति फिलहाल बेहद संवेदनशील बनी हुई है। अमेरिका अपनी सैन्य शक्ति और नाकाबंदी के जरिए ईरान पर दबाव बनाए हुए है, ताकि उसे वार्ता की मेज पर अपनी शर्तों के अनुसार लाया जा सके।

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