ट्रंप बना रहे US की मदद नहीं करने वाले देशों की लिस्ट, ये हो सकते हैं शामिल

Nisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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दो यूरोपीय अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत अमेरिका के पास यह विकल्प होगा कि वह उन देशों से अपनी सेना, सैन्य अभ्यास या हथियारों की सप्लाई कम कर दे, जिन्हें वह 'खराब' सहयोगी मानता है। इसके बजाय, यह सुविधाएं उन देशों को दी जा सकती हैं जिन्हें वह 'अच्छे' सहयोगी मानता है।

ट्रंप बना रहे US की मदद नहीं करने वाले देशों की लिस्ट, ये हो सकते हैं शामिल

ईरान से सीजफायर के बीच अमेरिका ने ऐसे देशों की लिस्ट तैयार की है, जिन्होंने युद्ध के दौरान अमेरिका का साथ नहीं दिया था। साथ ही ऐसे देशों की भी एक अलग लिस्ट है, जो अमेरिका के साथ थे। हालांकि, अब तक स्पष्ट नहीं है कि इस सूची में NATO के कौन से देश शामिल हैं। कहा जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई वाली सरकार मदद नहीं करने वाले सहयोगियों को सजा देने के तरीके खोज रही है।

पॉलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, NATO प्रमुख मार्क रुट्टे इस महीने वॉशिंगटन पहुंच रहे हैं। तीन यूरोपीय अधिकारियों और एक अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने बताया कि अधिकारी इस यात्रा से पहले योजना तैयार कर रहे हैं, जिसमें सदस्य देशों के योगदान का ब्योरा शामिल होगा। साथ ही उनके योगदान के आधार पर देशों को अलग-अलग श्रेणी में बांटा जाएगा।

बीते साल दिसंबर में दिया था फॉर्मूला

रिपोर्ट के मुताबिक, इससे जुड़ा एक फॉर्मूला रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने बीते साल दिसंबर में दिया था। उन्होंने कहा था, 'इजरायल, दक्षिण कोरिया, पोलैंड, जर्मनी, बाल्टिक्स और अन्य सहयोगियों को खास मदद दी जाएगी।' उन्होंने कहा था, 'जबकि, जो देश अपनी भूमिक निभाने में असफल रहे हैं, उन्हें नतीजे भुगतने होंगे।'

रिपोर्ट के मुताबिक, एक राजनयिक ने कहा, 'वाइट हाउस के पास एक नॉटी और नाइस पेपर है, तो मुझे लगता है कि विचार एक ही है।' मामले के जानकार बताते हैं कि ट्रंप प्रशासन इसे लेकर खास जानकारी साझा नहीं कर रहा है।

कौन से देश होंगे किस लिस्ट में शामिल

रिपोर्ट के अनुसार, अब तक यह साफ नहीं है कि कौन से देश किस लिस्ट में शामिल होंगे या रुट्टे इस योजना के बारे में जानते हैं या नहीं। आगे कहा गया कि फायदा पाने वाले देशों में रोमेनिया और पोलैंड शामिल हो सकते हैं, क्योंकि दोनों राष्ट्रपति की अच्छी लिस्ट में हैं और अमेरिकी सैनिकों का स्वागत करेंगे।

पोलैंड की सरकार नाटो में रक्षा पर सबसे ज्यादा खर्च करने वाले देशों में से एक है। वह अपने देश में तैनात 10,000 अमेरिकी सैनिकों का लगभग पूरा खर्च खुद उठाती है। वहीं, रोमानिया ने हाल ही में अपने मिहैल कोगलनीसिएनु एयर बेस का विस्तार किया है। इस बेस का इस्तेमाल रोमानिया ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ हवाई युद्ध के लिए करने दिया था। अब यहां और भी ज्यादा अमेरिकी सैनिकों को रखने की जगह उपलब्ध है।

ये हो सकता है प्लान

रिपोर्ट के मुताबिक, दो यूरोपीय अधिकारियों ने बताया कि इस योजना के तहत अमेरिका के पास यह विकल्प होगा कि वह उन देशों से अपनी सेना, सैन्य अभ्यास या हथियारों की सप्लाई कम कर दे, जिन्हें वह 'खराब' सहयोगी मानता है। इसके बजाय, यह सुविधाएं उन देशों को दी जा सकती हैं जिन्हें वह 'अच्छे' सहयोगी मानता है। एक तीसरे राजनयिक के अनुसार, रक्षा मंत्री हेगसेथ ने नाटो सदस्यों के साथ बैठकों में भी 'आदर्श सहयोगी' शब्द का इस्तेमाल किया है।

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निसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।

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