ऐसे चलता रहा तो तीसरा विश्व युद्ध दूर नहीं… डोनाल्ड ट्रंप ने चेताया, टूट गया सब्र का बांध?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन जंग में शामिल नहीं है, और अमेरिका का रोल सिर्फ इतना ही है कि सभी चाहते हैं कि अमेरिका बातचीत में शामिल हो। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन और यूरोप, दोनों ही चाहते हैं कि अमेरिका बातचीत का हिस्सा बने।
Russia Ukraine War: रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सब्र का बांध टूट चुका है। शपथ लेते ही इस जंग को रुकवाने का वादा करने वाले ट्रंप को दोनों पक्षों के साथ कभी नरमी, तो कभी सख्ती से पेश आ कर भी इसमें कामयाब नहीं मिल पाई है। अब ट्रंप की निराशा खुलकर सामने आ रही है। ट्रंप ने गुरुवार को कहा है कि अब भी स्थिति नहीं संभली तो जल्द ही यह जंग तीसरे विश्व युद्ध में बदल जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका इस जंग को खत्म कराने के लिए बहुत मेहनत कर रहा है।
वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा यूक्रेन में जारी जंग बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गई है। इस दौरान उन्होंने दावा किया कि पिछले महीने इस जंग में करीब 25,000 लोग मारे गए जिनमें ज्यादातर सैनिक थे। ट्रंप ने कहा, “मैं चाहता हूं कि यह मारकाट बंद हो। पिछले महीने 25,000 लोग मारे गए। ज्यादातर सैनिक, लेकिन कुछ आम लोग भी। बमबारी में कितने लोग मर गए। मैं चाहता हूं कि यह सब रुके।”
ट्रंप ने आगे कहा, “यह सब दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रही है। मैंने पहले भी कहा था कि अगर सब ऐसे ही खेल खेलते रहे, तो जल्द ही तीसरा विश्व युद्ध होगा। हम ये नहीं चाहते।”
अमेरिका जंग का हिस्सा नहीं- ट्रंप
ट्रंप ने आगे कहा कि अमेरिका यूक्रेन की जंग का हिस्सा नहीं है और वह सिर्फ इसीलिए बातचीत कर रहा है क्योंकि सभी चाहते हैं कि अमेरिका बातचीत में शामिल हो। उन्होंने दावा किया कि यूक्रेन और यूरोप, दोनों ही चाहते हैं कि अमेरिका बातचीत का हिस्सा बने।
युक्रेन से नाराजगी
ट्रंप ने यूक्रेन को दिए गए अमेरिकी फंड को लेकर भी एक बार फिर अपनी शिकायत दोहराई। उन्होंने कहा, “हमने पहले यूक्रेन को 300 से 350 अरब डॉलर दिए और बदले में हमें कुछ नहीं मिला।
ट्रंप ने कहा कि अब अमेरिका सीधे यूक्रेन को नहीं, बल्कि NATO देशों को पूरी कीमत पर हथियार बेच रहा है। उन्होंने कहा, “हम NATO को हथियार पूरी कीमत पर बेच रहे हैं। वे शायद ज्यादातर हथियार यूक्रेन को दे रहे हैं। हो सकता है और देशों को भी जाते हों। लेकिन हम जंग में शामिल नहीं हैं, सिर्फ बातचीत में शामिल हैं क्योंकि लोग हमें वहां चाहते हैं।”

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