
हत्यारे हैं ट्रंप और नेतन्याहू; US ने रद्द की बैठक तो भड़के ईरान के NSC, 2000 मौतें
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व संसद अध्यक्ष अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सीधे तौर पर वॉशिंगटन और तेल अवीव को अशांति का जिम्मेदार ठहराया।
ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के हिंसक होने और मरने वालों की संख्या 2,000 के पार पहुंचने के बाद अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर चरम पर है। ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख अली लारीजानी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को ईरानी जनता का "मुख्य हत्यारा" करार दिया। यह बयान तब आया जब राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान में हो रहे रक्तपात के विरोध में ईरानी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित सभी बैठकें रद्द कर दीं और प्रदर्शनकारियों को सरकारी संस्थानों पर कब्जा करने का आह्वान किया।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव और पूर्व संसद अध्यक्ष अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए सीधे तौर पर वॉशिंगटन और तेल अवीव को अशांति का जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने लिखा, "हम ईरानी जनता के असली कातिलों के नाम घोषित करते हैं। पहला ट्रंप और दूसरा नेतन्याहू।" लारीजानी ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल देश में अस्थिरता और हिंसा भड़का रहे हैं।
ट्रंप की चेतावनी
इससे पहले, डोनाल्ड ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट साझा की जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खलबली मचा दी। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों से कहा, "ईरानी देशभक्तों विरोध जारी रखो। अपने संस्थानों पर कब्जा कर लो! मदद आ रही है।" हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह मदद किस प्रकार की होगी।
ट्रंप ने एक इंटरव्यू में ईरान को सख्त चेतावनी भी दी। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान प्रदर्शनकारियों को फांसी देना शुरू करता है, तो अमेरिका बहुत कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने साफ किया कि जब तक प्रदर्शनकारियों की हत्याएं नहीं रुकतीं, तब तक वे ईरान के साथ किसी भी स्तर की बातचीत नहीं करेंगे।
ईरान में गृहयुद्ध जैसे हालात?
मानवाधिकार संस्थाओं और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, पिछले दो हफ्तों में स्थिति भयावह हो गई है। कार्यकर्ताओं के अनुसार, अब तक कम से कम 2,003 लोग मारे गए हैं। वहीं, कुछ अंतरराष्ट्रीय सूत्रों का दावा है कि यह संख्या 12,000 से 20,000 के बीच हो सकती है। ईरानी सरकारी टेलीविजन ने पहली बार अप्रत्यक्ष रूप से मौतों को स्वीकार करते हुए कहा कि देश में कई शहीद हुए हैं।
प्रदर्शनों की मुख्य वजह ईरान की गिरती अर्थव्यवस्था और मुद्रा का अवमूल्यन है, जिसने अब सत्ता परिवर्तन की मांग का रूप ले लिया है। हाल ही में ऐसी खबरें आई थीं कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है, लेकिन ट्रंप के ताजा रुख ने इन संभावनाओं को खत्म कर दिया है। ट्रंप ने यह भी घोषणा की है कि जो देश ईरान के साथ व्यापार करेंगे उन पर 25% आयात शुल्क लगाया जाएगा।

लेखक के बारे में
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