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टोक्यो को पछाड़ ये बना दुनिया का सबसे बड़ा शहर, दिल्ली टॉप 3 से बाहर; पूरी लिस्ट देखिए

टोक्यो को पछाड़ ये बना दुनिया का सबसे बड़ा शहर, दिल्ली टॉप 3 से बाहर; पूरी लिस्ट देखिए

संक्षेप:

2025 में जकार्ता (4.19 करोड़) टोक्यो को पछाड़कर दुनिया का सबसे बड़ा शहर बन गया है, जबकि ढाका दूसरे स्थान पर पहुंच गया। टॉप-10 में 9 शहर एशिया के हैं, दिल्ली चौथे और कोलकाता आठवें स्थान पर है।

Nov 28, 2025 09:08 am ISTAmit Kumar लाइव हिन्दुस्तान, न्यूयॉर्क
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दुनिया के नक्शे पर शहर अब सिर्फ इमारतों का समूह नहीं, बल्कि मानव सभ्यता की धड़कन बन चुके हैं। संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट वर्ल्ड अर्बनाइजेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2025 ने एक ऐसी तस्वीर पेश की है जो न केवल वर्तमान को दर्शाती है, बल्कि भविष्य की चुनौतियों को भी उजागर करती है। इस रिपोर्ट के अनुसार, इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता अब दुनिया का सबसे बड़ा शहर बन गया है, जिसकी आबादी लगभग 4.2 करोड़ है। यह खिताब दशकों से जापान की राजधानी टोक्यो के पास था, लेकिन अब टोक्यो तीसरे नंबर पर खिसक गया है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका दूसरे स्थान पर काबिज है, जबकि भारत की राजधानी दिल्ली टॉप-3 से बाहर हो गई है।

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यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है। यह वैश्विक शहरीकरण की उस लहर का प्रमाण है जो एशिया को केंद्र में ला रही है। रिपोर्ट बताती है कि 2025 में दुनिया की 8.2 अरब आबादी का 80 प्रतिशत शहरों में रहता है- यह 1950 के कई गुना ज्यादा है। मेगासिटीज (1 करोड़ से अधिक आबादी वाले शहर) की संख्या 1975 के महज 8 से बढ़कर 33 हो गई है, जिनमें से 19 एशिया में हैं।

शहरों की यात्रा प्राचीन काल से आधुनिक युग तक

शहरों का इतिहास मानव सभ्यता का आईना है। लगभग 9000 वर्ष पूर्व, जब कृषि क्रांति ने शिकार-संघर्ष के जीवन को बदल दिया, तब शहरों का जन्म हुआ। संयुक्त राष्ट्र और इतिहासकारों जैसे टर्टियस चैंडलर व जॉर्ज मॉडेलस्की के अनुमानों के अनुसार, 7000 ईसा पूर्व में फिलिस्तीन का जेरिको दुनिया का सबसे बड़ा शहर था, जहां मात्र 1000-2000 लोग रहते थे। यह एक प्रोटो-सिटी था- दीवारों से घिरा, जहां कृषि ने अतिरिक्त भोजन पैदा किया और जनसंख्या बढ़ी।

समय के साथ, शहर साम्राज्यों के केंद्र बने। 3100 ईसा पूर्व से 2240 ईसा पूर्व तक मिस्र का मेम्फिस सबसे बड़ा शहर रहा, आबादी लगभग 30,000। फिर मेसोपोटामिया का अक्कड़ (अब इराक) उभरा। रोमन साम्राज्य के चरम पर, 100 ईस्वी में रोम की आबादी 10 लाख तक पहुंच गई- यह यूरोप का पहला मिलियन-प्लस शहर। लेकिन मध्ययुग में एशिया ने कमान संभाली। 9वीं शताब्दी में बगदाद (इराक) पहला आधुनिक मिलियन-सिटी बना, जहां अब्बासिद खलीफा के दरबार ने विज्ञान, कला और व्यापार को पोषित किया।

19वीं शताब्दी में औद्योगिक क्रांति ने यूरोप को आगे बढ़ाया। 1800 में लंदन दुनिया का सबसे बड़ा शहर था (लगभग 9 लाख), लेकिन 1900 तक न्यूयॉर्क ने इसे पीछे छोड़ दिया। एशिया फिर लौटा: 1950 में टोक्यो पहले नंबर पर था। संयुक्त राष्ट्र के डेटा से पता चलता है कि 1950-2000 के बीच शहरों की आबादी 7.7 करोड़ से कहीं आगे बढ़ी, लेकिन अब एशिया का दबदबा है। 1800 में दुनिया के 100 सबसे बड़े शहरों में अफ्रीका और एशिया का हिस्सा अधिक था, लेकिन औपनिवेशिक युग ने यूरोप को बढ़ावा दिया। आज, 2025 में, एशिया के 9 शहर टॉप-10 में हैं - एक ऐसा बदलाव जो वैश्वीकरण, प्रवास और आर्थिक उछाल का परिणाम है।

2025 की टॉप-10 लिस्ट: एशिया का प्रभुत्व

वर्ल्ड अर्बनाइजेशन प्रॉस्पेक्ट्स 2025 ने एक नई विधि अपनाई है- डिग्री ऑफ अर्बनाइजेशन (DEGURBA) जो भौगोलिक डेटा (जैसे ग्लोबल ह्यूमन सेटलमेंट लेयर) पर आधारित है। यह राष्ट्रीय सीमाओं की बजाय घनी बस्तियों (1,500 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी से अधिक) को मापती है, जिससे आंकड़े अधिक तुलनीय बने। पुरानी रिपोर्टों में टोक्यो टॉप पर था, लेकिन नई विधि ने जकार्ता को आगे दिखाया।

2025 की दुनिया की सबसे बड़ी 10 अर्बन एग्लोमरेशन्स (शहरी समूह) की सूची इस प्रकार है:

  1. पहला स्थान इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता का है, जहां 41.9 मिलियन यानी लगभग 4 करोड़ 19 लाख लोग रहते हैं;
  2. दूसरे नंबर पर बांग्लादेश की ढाका है, जिसकी आबादी 36.6 मिलियन या 3 करोड़ 66 लाख है;
  3. तीसरा स्थान जापान के टोक्यो का है, जो 33.4 मिलियन (3 करोड़ 34 लाख) लोगों का घर है;
  4. चौथे पर भारत की नई दिल्ली 30.2 मिलियन (3 करोड़ 2 लाख) के साथ;
  5. पांचवें स्थान पर चीन का शंघाई 29.6 मिलियन (2 करोड़ 96 लाख) आबादी वाली;
  6. छठे नंबर पर चीन का ग्वांगझोउ 27.6 मिलियन (2 करोड़ 76 लाख);
  7. सातवें पर फिलीपींस का मनीला 24.7 मिलियन (2 करोड़ 47 लाख);
  8. आठवें स्थान पर भारत का कोलकाता 22.5 मिलियन (2 करोड़ 25 लाख);
  9. नौवें पर दक्षिण कोरिया का सियोल भी 22.5 मिलियन (2 करोड़ 25 लाख) के साथ;
  10. दसवें नंबर पर मिस्र का काहिरा 23 मिलियन (2 करोड़ 3 लाख) लोगों के साथ।

UN के अनुसार, 2.3 करोड़ लोगों की आबादी के साथ, मिस्र का काहिरा टॉप 10 में अकेला ऐसा शहर है जो एशिया से बाहर है। ब्राजील का साओ पाउलो, 1.89 करोड़ लोगों के साथ, दक्षिण अमेरिका का सबसे बड़ा शहर है, जबकि नाइजीरिया का लागोस भी तेजी से बढ़ा है, जिससे यह सब-सहारा अफ्रीका का सबसे बड़ा शहर बन गया है।

जकार्ता का उदय: एक नया वैश्विक केंद्र

जकार्ता का सफर आश्चर्यजनक है। जावा द्वीप के पश्चिमी तट पर बसी यह राजधानी कभी डच उपनिवेश (बटाविया) थी। स्वतंत्रता के बाद (1945), तेज आर्थिक विकास, ग्रामीण-शहरी प्रवास और उच्च जन्म दर ने इसे मेगासिटी बना दिया। 2025 में 4.19 करोड़ की आबादी के साथ, यह जलवायु परिवर्तन (समुद्र स्तर वृद्धि) और बाढ़ जैसी चुनौतियों का सामना कर रही है। फिर भी, इंडोनेशिया की नई राजधानी नुसंतारा (बोरनियो में) के निर्माण से जकार्ता को राहत मिल सकती है। ऐतिहासिक रूप से, एशियाई शहर जैसे अंगकोर (कंबोडिया, 12वीं शताब्दी में 10 लाख) ने भी घनी आबादी दिखाई, लेकिन जकार्ता आधुनिक वैश्वीकरण का प्रतीक है।

ढाका: तेजी से बढ़ता दक्षिण एशियाई शहर

दूसरे नंबर पर ढाका की 3.66 करोड़ आबादी बांग्लादेश की आर्थिक केंद्रीकरण को दिखाती है। 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के बाद, यह कपड़ा उद्योग और प्रवास का केंद्र बना। रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक ढाका दुनिया का सबसे बड़ा शहर बन सकता है, 5.0 करोड़ से अधिक आबादी के साथ। लेकिन यह वृद्धि बिना चुनौतियों के नहीं- गरीबी, प्रदूषण और बाढ़ (गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा) इसे संकटग्रस्त बनाते हैं। ऐतिहासिक रूप से, ढाका मुगल काल (17वीं शताब्दी) में बंगाल का केंद्र था, आबादी 10 लाख तक थी। आज यह एशिया के शहरी विस्फोट का प्रतीक है। ये दुनिया का सबसे घनी आबादी वाला सबसे बड़ा शहर है।

टोक्यो का पतन: जापान की सिकुड़ती आबादी

टोक्यो, जो 1950 से लगातार टॉप पर था, अब 3.34 करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर है। जापान की कम जन्म दर (1.3 प्रति महिला), वृद्धावस्था और आप्रवासन की कमी ने इसे प्रभावित किया। 2050 तक इसकी आबादी घटकर 3 करोड़ रह सकती है। लेकिन टोक्यो की कहानी प्रेरणादायक है – द्वितीय विश्व युद्ध के बाद (1945 में 70% तबाह) यह आर्थिक चमत्कार बना। ऐतिहासिक रूप से, टोक्यो (एडो के नाम से) 18वीं शताब्दी में 10 लाख का शहर था, जो समुराई युग का केंद्र था।

रिपोर्ट के प्रोजेक्शन डरावने हैं। 2050 तक शहरों में 98.6 करोड़ नई आबादी जुड़ेगी, जिनमें से आधे भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान जैसे देशों से होगी। ढाका और जकार्ता 5 करोड़ पार करेंगे। लेकिन चुनौतियां: जलवायु परिवर्तन, असमानता और बुनियादी ढांचा।

Amit Kumar

लेखक के बारे में

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अमित कुमार एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में नौ वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह लाइव हिन्दुस्तान में डिप्टी चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। हिन्दुस्तान डिजिटल के साथ जुड़ने से पहले अमित ने कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया है। अमित ने अपने करियर की शुरुआत अमर उजाला (डिजिटल) से की। इसके अलावा उन्होंने वन इंडिया, इंडिया टीवी और जी न्यूज जैसे मीडिया हाउस में काम किया है, जहां उन्होंने न्यूज रिपोर्टिंग व कंटेंट क्रिएशन में अपनी स्किल्स को निखारा। अमित ने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से हिंदी जर्नलिज्म में पीजी डिप्लोमा और गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी, हिसार से मास कम्युनिकेशन में मास्टर (MA) किया है। अपने पूरे करियर के दौरान, अमित ने डिजिटल मीडिया में विभिन्न बीट्स पर काम किया है। अमित की एक्सपर्टीज पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेट रिपोर्टिंग और मल्टीमीडिया स्टोरीटेलिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में फैली हुई है। अमित नई मीडिया तकनीकों और पत्रकारिता पर उनके प्रभाव को लेकर काफी जुनूनी हैं। और पढ़ें

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