ईरान में डूब रही साख बचाने को ट्रंप ने बता दिया अगला टारगेट, किस देश पर है US की नजर
ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि क्यूबा की सरकार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है और वह गिरने के कगार पर है। हाल के महीनों में अमेरिका और क्यूबा के बीच बातचीत भी शुरू हुई है, जिसका उद्देश्य संभावित टकराव को टालना बताया जा रहा है।
Iran War Updates: ईरान के साथ अभी अमेरिका का सैन्य संघर्ष खत्म भी नहीं हूआ है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने अगले टारगेट का खुलासा कर दिया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रंप ने अपने भाषण में वेनेजुएला और ईरान में अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों को सफल बताते हुए संकेत दिया कि अब अगला फोकस क्यूबा हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि क्यूबा को लेकर उनकी रणनीति क्या होगी, लेकिन उनके बयान को संभावित सैन्य या राजनीतिक कदम के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
अपने संबोधन में ट्रंप ने कहा कि उन्होंने एक मजबूत सेना बनाई है और कभी इसका उपयोग न करना पड़े ऐसा सोचा था, लेकिन कभी-कभी इसका इस्तेमाल करना पड़ता है। उन्होंने कहा, “क्यूबा अगला है… लेकिन ऐसा मानिए कि मैंने यह कहा ही नहीं।”
शाख बचाने को ट्रंप का हथकंडा
एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि ईरान के साथ संघर्ष में अमेरिका बुरी तरह फंस चुका है।डोनाल्ड ट्रंप रोज अपनी जीत और नए-नए दावे कर रहे हैं, लेकिन ईरान मिसाइल हमलों से उन्हें चौंका रहा है। इससे अमेरिकी राष्ट्रपति की साख पर बट्टा लग रहा, जिसे बचाने और अमेरिकी लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वह इस तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।
ट्रंप लंबे समय से यह दावा करते रहे हैं कि क्यूबा की सरकार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रही है और वह गिरने के कगार पर है। हाल के महीनों में अमेरिका और क्यूबा के बीच बातचीत भी शुरू हुई है, जिसका उद्देश्य संभावित टकराव को टालना बताया जा रहा है। क्यूबा के राष्ट्रपति ने भी स्वीकार किया है कि दोनों देशों के बीच वार्ता जारी है।
क्यूबा की आर्थिक स्थिति इस समय काफी खराब मानी जा रही है। वेनेजुएला से तेल आपूर्ति रुकने के बाद देश में ऊर्जा संकट गहरा गया है, जिससे बिजली उत्पादन और परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ा है।
फ्रेंडली टेकओवर की भी बात
इससे पहले भी ट्रंप क्यूबा को लेकर आक्रामक रुख दिखा चुके हैं। उन्होंने फ्रेंडली टेकओवर की बात कही थी, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा था कि यह जरूरी नहीं कि वह पूरी तरह फ्रेंडली ही हो। अमेरिकी प्रशासन के भीतर भी क्यूबा को लेकर रणनीतिक चर्चाएं तेज हैं। विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस मुद्दे पर प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं और क्यूबा में संभावित राजनीतिक बदलाव को लेकर प्रयास जारी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह बयान केवल राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकता है, ताकि क्यूबा सरकार बातचीत में अधिक रियायतें दे। हालांकि, इस तरह के बयान से क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
मतभेद सुलझाने के लिए अमेरिका के साथ हाल में हुई वार्ता
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज-कैनेल ने हाल ही में कहा था कि उनकी सरकार ने हाल में अमेरिका के साथ वार्ता की है। कैरिबियाई देश ने इस तरह की अटकलों की पहली बार पुष्टि की है। डियाज-कैनेल ने कहा था, ''यह वार्ता दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय मतभेदों का समाधान संवाद के जरिये तलाशने के उद्देश्य से की गई। अंतरराष्ट्रीय कारकों ने इन वार्ताओं को संभव बनाने में मदद की।'' हालांकि, उन्होंने उन कारकों के बारे में विस्तार से नहीं बताया। डियाज-कैनेल ने कहा कि वार्ता का उद्देश्य ''द्विपक्षीय समस्याओं की पहचान करना और उनका समाधान ढूंढना था।''
उन्होंने बताया कि क्यूबा प्राकृतिक गैस, सौर ऊर्जा और 'थर्मोइलेक्ट्रिक प्लांट्स' के सहारे काम चला रहा है और तेल एवं डीजल की कमी के कारण उसके दो बिजली संयंत्र बंद हो गए हैं तथा सौर ऊर्जा उत्पादन भी सीमित हो गया है।
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