‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ जिसका ट्रंप से जिक्र कर जिनपिंग ने जताए इरादे; इसके मायने?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बीजिंग बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। जिनपिंग ने अमेरिका को टकराव से बचने की चेतावनी देते हुए 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' का जिक्र किया। क्या हैं इसके मायने…?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बीजिंग में हुई ऐतिहासिक बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें रहीं। इस बैठक में कई बड़े मुद्दों पर बातचीत हुई। दोनों नेताओं ने ताइवान जैसे संवेदनशील मुद्दे पर बातचीत की। इस वार्ता में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिका को टकराव के प्रति आगाह किया। बातचीत में जिनपिंग ने एक मुहावरे 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' (Thucydides Trap) का जिक्र किया जिसके गंभीर मायने निकाले जा रहे हैं।
क्या बोले जिनपिंग?
'टाइम्स ऑफ इंडिया' की रिपोर्ट के मुताबिक, जिनपिंग ने ट्रंप से बातचीत में पूछा कि क्या चीन और अमेरिका 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' से ऊपर उठकर सहयोग और स्थिरता का एक नया मॉडल स्थापित कर सकते हैं? क्या हम वैश्विक चुनौतियों से निपटने और दुनिया में अधिक स्थिरता लाने के लिए हाथ मिला सकते हैं? क्या दोनों देश लोगों की भलाई और मानवता के भविष्य को आगे बढ़ा सकते हैं और मिलकर द्विपक्षीय संबंधों के लिए एक बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकते हैं?
बयान के गंभीर मायने
जिनपिंग के बयान को अमेरिका-चीन के बीच रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे समय में जब दोनों देशों के बीच तमाम मुद्दों को लेकर तनाव देखा गया है जिनपिंग के 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' वाले बयान के गंभीर मायने निकाले जा रहे हैं।
कहां से आया 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप'?
दरअसल, 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' वैश्विक राजनीति के लिए इस्तेमाल होने वाला चर्चित मुहावरा है। हार्वर्ड के राजनीति विज्ञानी ग्राहम एलिसन ने इस मुहावरे को लोकप्रिय बनाया। एलिसन ने प्राचीन यूनानी इतिहासकार थ्यूसीडाइड्स के लेखों से इसे निकाला। थ्यूसीडाइड्स ने लगभग 2,500 साल पहले एथेंस और स्पार्टा के बीच हुए पेलोपोनेसियन युद्ध का विश्लेषण किया था। उन्होंने अपने निष्कर्ष में लिखा था कि एथेंस का उदय और इससे स्पार्टा में पैदा डर ही युद्ध की वजह बना था।
क्या है 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप'?
वैज्ञानिक ग्राहम एलिसन ने थ्यूसीडाइड्स के उक्त विचार को मॉडर्न जियोपॉलिटिक्स के हिसाब से रखा। उनका तर्क था कि जब कोई उभरती हुई शक्ति किसी स्थापित प्रभावशाली ताकत को विस्थापित करने की चुनाैती देती है तो तनाव पैदा होते हैं जिनसे टकराव की संभावना बढ़ जाती है। भले ही दोनों में से कोई भी पक्ष सक्रिय रूप से युद्ध न चाहता हो। यानी 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' तब उभरता है जब एक उभरती हुई शक्ति और एक स्थापित ताकत टकराव की ओर बढ़ती हैं।
'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' की आशंकाएं क्यों?
दरअसल, अमेरिका और चीन के बीच 'थ्यूसीडाइड्स ट्रैप' की आशंकाएं इसलिए महसूस की जा रही हैं क्योंकि चीन तेजी से उभरती हुई एक वैश्विक ताकत के रूप में सामने आया है। इससे वैश्विक सत्ता संतुलन बदलाव को स्पष्ट रूप से महसूस किया जा सकता है। विनिर्माण और व्यापार से लेकर AI, नौसेना विस्तार और सेमीकंडक्टर तकनीक तक चीन ने उन तमाम क्षेत्रों में लगातार चुनौती पेश की है जिन पर लंबे समय से अमेरिका का दबदबा रहा है।
दोनों देशों में देखा जाता रहा है तनाव
बीते तीन दशकों से चीन और अमेरिका के बीच जो रेस आर्थिक प्रतिस्पर्धा के रूप में शुरू हुई थी वह धीरे-धीरे बढ़कर एक रणनीतिक प्रतिद्वंद्विता में तब्दील हो गई है। आलम यह है कि दोनों देशों के बीच टैरिफ, निर्यात नियंत्रण, साइबर सुरक्षा, ताइवान, सप्लाई चैन और पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में सैन्य तैनाती जैसे विभिन्न मुद्दों पर तनाव साफ तौर पर दिखाई दे रहा है। ट्रंप के राष्ट्रपति काल में तो दोनों देशों के बीच के रिश्ते अपेक्षाकृत ज्यादा तनावपूर्ण हो चले हैं।
‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ जैसे हैं हालात
अमेरिका ने तकनीक पर पाबंदियां बढ़ा दी हैं। अमेरिका ने चीन पर कड़े व्यापारिक कदम उठाए हैं। जानकारों की मानें तो दोनों देशों के बीच लगातार बढ़ रहा यह टकराव ‘थ्यूसीडाइड्स ट्रैप’ सिद्धांत में बताई परिस्थितियों जैसा ही है।
जिनपिंग ने पहले भी किया था जिक्र
ऐसा नहीं है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस मुहावरे का पहली बार जिक्र किया है। शी जिनपिंग ने पिछले एक दशक में कई बार इस मुहावरे का जिक्र किया है। साल 2024 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के साथ हुई बातचीत में भी उन्होंने ऐसा किया था। चीन के राष्ट्रपति का संदेश हमेशा एक जैसा रहा है कि चीन और अमेरिका यदि कोई ऐसा रास्ता निकाल लें जो दोनों के लिए फायदेमंद हो तो एक बड़ा टकराव टल सकता है। जिनपिंग का मानना है कि टकराव दोनों देशों के लिए ठीक नहीं है।
जिनपिंग ने जताए इरादे, अमेरिका के बराबर की ताकत है चीन
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रंप से सीधी बात में इस मुहावरे का जिक्र कर के एक महत्वपूर्ण मुद्दे को मजबूती से चर्चा में ला दिया है। इसके समाधान से ही स्पष्ट होगा कि क्या दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतें बिना लड़े साथ रह सकती हैं या इतिहास की तरह उनमें टकराव होना तय है। इस मुद्दे को हवा देकर चीन ने पूरी दुनिया के सामने यह दिखाने की कोशिश की है कि वह अमेरिका से छोटा नहीं है वरन उसके बराबर की एक महाशक्ति है।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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