मिसाइलें नहीं, ये हैं ईरान और अमेरिका युद्ध के सबसे बड़े हथियार; बहुत दूर से लगाते हैं घात
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पारंपरिक बमबारी शुरू करने से पहले ही उन्होंने ईरान के 'सैन्य अंतरिक्ष कमान' को निशाना बनाया था। इसे 'फर्स्ट मूवर' रणनीति कहा जाता है। इसका मकसद ईरान के संचार और जासूसी नेटवर्क को जाम करना था।

आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर टैंकों या सैनिकों से नहीं लड़े जा रहे, बल्कि धरती से सैकड़ों किलोमीटर ऊपर अंतरिक्ष में भी एक बड़ा संघर्ष चल रहा है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव में अंतरिक्ष तकनीक सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरी है। सैटेलाइट और नेविगेशन सिस्टम अब तय कर रहे हैं कि हमला कहां होगा और कौन बचेगा।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने पुष्टि की है कि पारंपरिक बमबारी शुरू करने से पहले ही उन्होंने ईरान के 'सैन्य अंतरिक्ष कमान' को निशाना बनाया था। इसे 'फर्स्ट मूवर' रणनीति कहा जाता है। इसका मकसद ईरान के संचार और जासूसी नेटवर्क को जाम करना था, ताकि वह अपनी जवाबी कार्रवाई का तालमेल न बिठा सके। आजकल के आधुनिक कमर्शियल सैटेलाइट ने युद्ध के मैदान को पारदर्शी बना दिया है।
तस्वीरें दिखाना बंद
उच्च-क्षमता वाली तस्वीरों की मदद से अब पत्रकार और विश्लेषक भी कुछ ही घंटों में यह देख सकते हैं कि किस सैन्य अड्डे पर मिसाइल गिरी और कहां सैनिकों की आवाजाही हो रही है। इसी कारण कई सैटेलाइट कंपनियों ने अब संवेदनशील इलाकों की तस्वीरें दिखाना बंद कर दिया है, ताकि इनका सैन्य दुरुपयोग न हो।
रूस से ले रहा मदद
ईरान के पास अपने 'नूर' और 'खय्याम' जैसे सैटेलाइट तो हैं, लेकिन बड़ी शक्तियों के मुकाबले उसकी क्षमता सीमित है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अपनी कमियों को दूर करने के लिए रूस जैसे सहयोगियों से सैटेलाइट डाटा ले रहा है। वहीं, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का दावा है कि मध्य-पूर्व के कुछ सैन्य ठिकाने गुप्त रूप से ईरान की मदद कर रहे हैं। उनका यह भी कहना है कि मध्य-पूर्व के कुछ ठिकानों की चीनी सैटेलाइट तस्वीरें ईरान को मदद पहुंचा रही हैं।
निशाने पर हैं सैटेलाइट सिस्टम
इजरायल ने भी स्पष्ट किया है कि उसके निशाने पर ईरान के मिसाइल कार्यक्रमों के साथ-साथ उनके सैटेलाइट बुनियादी ढांचे भी हैं। इजराइल का मानना है कि अंतरिक्ष से मिलने वाली खुफिया जानकारी को नष्ट करना दुश्मन को 'अंधा' करने जैसा है। यह घर्ष यह साफ करता है कि अब जीत उसी की होगी जिसका अंतरिक्ष पर नियंत्रण होगा। जासूसी, सटीक मिसाइल हमले और सुरक्षित संचार के लिए सैटेलाइट अब किसी भी देश की 'रीढ़ की हड्डी' बन चुके हैं।
ईरान ने नकारा अमेरिकी प्रस्ताव
ईरान ने सोमवार को पश्चिम एशिया में संघर्ष समाप्त करने और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को नकार दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इस शांति वार्ता प्रस्ताव को बेहद महत्वाकांक्षी और अतार्किक बताया है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि युद्ध को समाप्त करने के लिए अपनी मांगों का एक सेट तैयार किया है।
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Nisarg Dixitनिसर्ग दीक्षित न्यूजरूम में करीब एक दशक का अनुभव लिए निसर्ग दीक्षित शोर से ज़्यादा सार पर भरोसा करते हैं। पिछले 4 साल से वह लाइव हिनुस्तान में डिप्टी चीफ प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं, जहां खबरों की योजना, लेखन, सत्यापन और प्रस्तुति की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले दैनिक भास्कर और न्यूज़18 जैसे बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुके हैं, जहाँ उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग से लेकर डेस्क तक की भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई की, जिसने उनके काम करने के तरीके को व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाया। निसर्ग की खास रुचि खोजी रिपोर्टिंग, ब्रेकिंग स्टोरीज़ और विज़ुअल न्यूज़ स्टोरीज़ में है। वे जटिल मुद्दों को सरल भाषा और स्पष्ट तथ्यों के साथ प्रस्तुत करने में विश्वास रखते हैं। राजनीति और जांच पड़ताल से जुड़े विषयों पर उनकी मजबूत पकड़ है। निसर्ग लोकसभा चुनावों, कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और अहम घटनाओं को कवर कर चुके हैं। साथ ही संसदीय कार्यवाही और सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण सुनवाइयों को नियमित रूप से कवर करते हैं। गूगल जर्नलिस्ट्स स्टूडियो में भी निसर्ग योगदान देते हैं।
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