जहां था मंदिर, वही इमारत इस्लामिक चैरिटी को बेची जा रही! UK में विवाद
सबसे ज्यादा विवाद इस बात पर है कि काउंसिल इस परिसर को 'यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन' (UKIM) को बेचने जा रही है, जिसने सबसे ऊंची बोली लगाई है। अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब फैसले का इंतजार है।

ब्रिटेन के पीटरबरो शहर से एक बेहद संवेदनशील और गंभीर कानूनी विवाद सामने आया है। वहां की सिटी काउंसिल ने एक ऐसे सरकारी कम्युनिटी कॉम्प्लेक्स को बेचने का फैसला किया है, जिसमें पिछले 40 सालों (1986) से एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर चल रहा है। सबसे ज्यादा विवाद इस बात पर है कि काउंसिल इस परिसर को 'यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन' (UKIM) को बेचने जा रही है, जिसने सबसे ऊंची बोली लगाई है। अदालत में इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और अब फैसले का इंतजार है।
विवाद की मुख्य वजह क्या है?
पीटरबरो सिटी काउंसिल पर इस समय लगभग 500 मिलियन पाउंड (करीब 5,400 करोड़ रुपये) का भारी कर्ज है। इस वित्तीय संकट से उबरने के लिए काउंसिल ने अपनी संपत्तियों को बेचने का फैसला किया।
16 दिसंबर 2025 को काउंसिल के कैबिनेट ने इस 'न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स' को सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को बेचने की मंजूरी दी। विपक्ष और समुदाय के विरोध के बाद फरवरी 2026 में इस फैसले पर दोबारा विचार किया गया, लेकिन काउंसिल ने यूके इस्लामिक मिशन (UKIM) को ही इसे बेचने के फैसले पर मुहर लगा दी।
दोनों पक्षों की बोलियां और कोर्ट के तर्क
आर्थिक तंगहाली से जूझ रही पीटरबरो सिटी काउंसिल ने सबसे ज्यादा कैश देने वाले खरीदार को तरजीह दी है, जिसकी पूरी तस्वीर कोर्ट रूम में दोनों पक्षों की दलीलों से साफ हो जाती है। इस रेस में शामिल 'भारत हिंदू समाज' (BHS) मंदिर ट्रस्ट ने इस परिसर को बचाने के लिए 9 लाख पाउंड (900,000 GBP) कैश और साथ में 5 लाख 4 हजार पाउंड की 'सोशल वैल्यू' यानी अपने सामाजिक कार्यों के मूल्यांकन की संयुक्त बोली लगाई थी।
मंदिर ट्रस्ट के वकील ने अदालत में पुरजोर तर्क दिया कि इस पूरे इलाके में 35 मील (लगभग 56 किलोमीटर) के दायरे में यह इकलौता हिंदू मंदिर है। उन्होंने काउंसिल पर सीधा आरोप लगाया कि उसने 'इक्वालिटी एक्ट 2010' के तहत अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारियों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया और बिना किसी ठोस जांच-परख के सिर्फ प्रशासनिक अधिकारियों की सिफारिशों के आधार पर आंख मूंदकर इस ऐतिहासिक परिसर को बेचने का फैसला ले लिया।
दूसरी तरफ, सबसे ऊंची बोली लगाने वाले संगठन 'यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन' (UKIM) ने सीधे 14 लाख पाउंड (1.4 मिलियन GBP) कैश का भारी-भरकम ऑफर दिया है। इतना ही नहीं, उन्होंने किसी भी दूसरी बड़ी बोली से 5 प्रतिशत ज्यादा रकम देने का खुला प्रस्ताव भी रखा है, जिसे बैकअप देने के लिए उनके पास 54 लाख पाउंड का मजबूत फंड मौजूद है।
कोर्ट में UKIM की ओर से दलील दी गई कि उनकी मौजूदा 'खादिजा मस्जिद' अब नमाजियों के लिए काफी छोटी पड़ने लगी है और उन्हें बड़ी जगह की सख्त जरूरत है। वे इस नए परिसर को एक 'यूनिटी सेंटर' के रूप में विकसित करना चाहते हैं, जहां प्रार्थना स्थल के साथ-साथ बच्चों के लिए क्लासरूम और खेलकूद के लिए स्पोर्ट्स ग्राउंड जैसी आधुनिक सुविधाएं तैयार की जाएंगी।
इस हिंदू मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
यह केवल एक इमारत का मामला नहीं है, बल्कि इसके साथ ब्रिटेन में रह रहे भारतीय मूल के प्रवासियों की भावनाएं और इतिहास जुड़ा हुआ है।
इस मंदिर की स्थापना उन हिंदू परिवारों ने की थी, जिन्हें 1972 में युगांडा के तानाशाह ईदी अमीन ने अपने देश से जबरन निकाल दिया था। उन शरणार्थी परिवारों ने ब्रिटेन आकर इस समाज और मंदिर को खड़ा किया था।
आज यह मंदिर केवल पीटरबरो ही नहीं, बल्कि आसपास के तीन बड़े क्षेत्रों- कैंब्रिजशायर, नॉरफॉक और लिंकनशायर के लगभग 14,000 हिंदू श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
2021 की जनगणना के अनुसार, पीटरबरो में मुस्लिम आबादी 12.2% है जबकि हिंदू आबादी महज 1.8% है। ऐसे में शहर में पहले से 10 मस्जिदें हैं, लेकिन मंदिर सिर्फ यही एक है।
आगे क्या? प्रशासन और ट्रस्ट का रुख
काउंसिल की नेता शबीना कय्यूम ने माना है कि इस फैसले से हिंदू समुदाय के बीच गहरी चिंता और बेचैनी है। उन्होंने भरोसा दिया है कि भारत हिंदू समाज ट्रस्ट को "बिना घर के नहीं छोड़ा जाएगा" और अधिकारी उनके लिए वैकल्पिक जगह तलाश रहे हैं।
हालांकि, मंदिर ट्रस्ट की सदस्य गौरी चौधरी का आरोप है कि काउंसिल ने मार्च 2025 में उन्हें बोली लगाने को कहा था, लेकिन उनके ऑफर पर महीनों तक कोई जवाब नहीं दिया गया। फिलहाल, मंदिर को बचाने और अदालती खर्चों के लिए ट्रस्ट ने एक GoFundMe कैंपेन के जरिए 119,000 पाउंड (लगभग 1.3 करोड़ रुपये) से ज्यादा का फंड जुटा लिया है, क्योंकि अभी तक उनके लिए कोई दूसरी व्यावहारिक जगह तय नहीं हो पाई है।
खास बात यह है कि अदालत में लड़ाई लड़ रहे दोनों पक्षों- भारत हिंदू समाज (BHS) ट्रस्ट और UKIM ने साफ किया है कि यह दो धर्मों के बीच का टकराव नहीं है। यह विशुद्ध रूप से काउंसिल की गलत निर्णय प्रक्रिया और पारदर्शिता की कमी के खिलाफ एक कानूनी चुनौती है।


