ईरान में प्रदर्शन के दौरान मारे गए 32 हजार लोग, डोनाल्ड ट्रंप के दावे पर तेहरान ने मांगे सबूत
ये प्रदर्शन पिछले महीने शुरू हुए थे, जो पहले आर्थिक शिकायतों पर शांतिपूर्ण थे लेकिन बाद में हिंसक हो गए। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इनमें 3000 से अधिक मौतें हुईं। सरकार ने US-इजरायल पर दंगों को भड़काने का आरोप लगाया है।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान में हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान 32,000 नागरिकों की मौत हुई है। ट्रंप ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि यह मौतें काफी कम समय में हुईं और ईरान के लोग अपने नेताओं से बहुत अलग हैं। उन्होंने इसे एक बहुत दुखद स्थिति बताया। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता चल रही है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ा हुआ है। ट्रंप ने पहले भी ईरान पर सीमित सैन्य कार्रवाई की संभावना जताई थी, अगर बातचीत असफल रही तो।
ईरानी विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब देते हुए कहा कि ईरान ने पारदर्शिता का वादा निभाते हुए 3,117 पीड़ितों की आधिकारिक सूची जारी की है। इनमें लगभग 200 सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं। अरागची ने इसे हालिया आतंकवादी कार्रवाइयों का शिकार बताया। उन्होंने कहा कि अगर कोई इस आंकड़े की सटीकता पर सवाल उठाता है तो कृपया सबूत पेश करे। उन्होंने ट्रंप के 32 हजार के आंकड़े को बिना प्रमाण के बताया और प्रमाण मांगकर अमेरिका को चुनौती दी। ईरान सरकार इन घटनाओं को अमेरिका और इजराइल की ओर से समर्थित दंगों व आतंकवाद के रूप में देखती है।
हिंसा पर ईरान सरकार का क्या पक्ष
ये विरोध प्रदर्शन पिछले महीने शुरू हुए थे, जो शुरुआत में आर्थिक शिकायतों पर शांतिपूर्ण थे लेकिन बाद में हिंसक हो गए। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इनमें 3,000 से अधिक मौतें हुईं। सरकार ने अमेरिका और इजरायल पर इन दंगों को भड़काने का आरोप लगाया है। हाल ही में ईरान ने परमाणु वार्ता के लिए ओमान की मध्यस्थता में मस्कट और जेनेवा में अमेरिका के साथ बैठकें की हैं। इन वार्ताओं के बीच अमेरिका ने फारस की खाड़ी में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाई है, जबकि ईरान ने सैन्य अभ्यास किए हैं।
ईरान-अमेरिका संबंधों में फिर से तनाव
यह विवाद ईरान-अमेरिका संबंधों में नए तनाव का संकेत देता है। ट्रंप के दावे पर कोई स्रोत नहीं बताया गया, जबकि ईरान की सूची आधिकारिक है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी विरोध प्रदर्शनों में मौतों पर चिंता जताई है, लेकिन आंकड़े विवादास्पद बने हुए हैं। अरागची का बयान ईरान की स्थिति को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमाण की मांग का प्रयास लगता है। स्थिति से क्षेत्रीय शांति और परमाणु समझौते पर असर पड़ सकता है।
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Niteesh Kumarपत्रकार नीतीश कुमार 8 साल से अधिक समय से मीडिया इंडस्ट्री में एक्टिव हैं। जनसत्ता डिजिटल से बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर शुरुआत हुई। लाइव हिन्दुस्तान से जुड़ने से पहले टीवी9 भारतवर्ष और दैनिक भास्कर डिजिटल में भी काम कर चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को खबरें लिखने के साथ ग्राउंड रिपोर्टिंग का शौक है। लाइव हिन्दुस्तान यूट्यूब चैनल के लिए लोकसभा चुनाव 2024, दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की कवरेज कर चुके हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान के लिए नेशनल और इंटरनेशनल सेक्शन की खबरें लिखते हैं। पत्रकार नीतीश कुमार को ब्रेकिंग न्यूज लिखने के साथ खबरों का गहराई से विश्लेषण करना पसंद है। राजनीति से जुड़ी खबरों पर मजबूत पकड़ और समझ रखते हैं। समसामयिक राजनीतिक मुद्दों पर कई सारे लंबे लेख लिख चुके हैं। पत्रकार नीतीश कुमार ने पत्रकारिता का पढ़ाई IIMC, दिल्ली (2016-17 बैच) से हुई। इससे पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के महाराजा अग्रसेन कॉलेज से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन किया। पत्रकार नीतीश कुमार मूल रूप से उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के रहने वाले हैं। राजनीति, खेल के साथ सिनेमा में भी दिलचस्पी रखते हैं। फिल्में देखना और रिव्यू करना व उन पर चर्चा करना हॉबी है।
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