ताइवान हमारा होगा, बस यही उसका भविष्य है; डोनाल्ड ट्रंप से शी जिनपिंग की फोन पर तीखी बात
चीनी मीडिया के अनुसार, शी ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका और चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध में कंधे से कंधा मिलाकर फासीवाद और सैन्यवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इसलिए, ताइवान का चीन में विलय पोस्ट-वॉर इंटरनेशनल ऑर्डर का हिस्सा है।
चीन और अमेरिका के बीच संबंधों में हालिया नरमी के बावजूद ताइवान को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव एक बार फिर उभर आया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत करते हुए स्पष्ट कर दिया कि ताइवान को लेकर चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं होने वाला है। उन्होंने कहा, 'ताइवान हमारा होगा। यही उसका भविष्य है। ताइवान की चीन में वापसी द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने अंतरराष्ट्रीय ढांचे का हिस्सा है।'
चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, शी जिनपिंग ने ट्रंप से कहा कि ताइवान का चीन में विलय उस अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था से जुड़ा है, जो अमेरिका-चीन की साझी लड़ाई के बाद बनी थी। चीन ताइवान को अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है और आवश्यक होने पर बल प्रयोग करने की चेतावनी भी देता रहा है, जबकि ताइवान की लोकतांत्रिक सरकार इस दावे को सख्ती से खारिज करती है।
चीनी मीडिया एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, शी ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका और चीन ने द्वितीय विश्व युद्ध में कंधे से कंधा मिलाकर फासीवाद और सैन्यवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इसलिए, ताइवान का चीन में विलय- पोस्ट-वॉर इंटरनेशनल ऑर्डर का हिस्सा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा चीन के लिए रेड लाइन है और कोई भी हस्तक्षेप अस्वीकार्य होगा।
ट्रंप ने ताइवान पर नहीं की टिप्पणी
हालांकि ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में ताइवान का जिक्र नहीं किया और केवल अमेरिका-चीन संबंधों को बेहद मजबूत बताया। लेकिन चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ट्रंप ने फोन कॉल के दौरान स्वीकार किया कि ताइवान का मसला चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
व्यापार समझौते पर आगे बढ़ने का संदेश
फोन कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापारिक मुद्दों पर भी चर्चा की। हाल ही में दक्षिण कोरिया में हुई बैठक में अमेरिका और चीन ने अपनी महीनों से जारी व्यापार जंग में अस्थायी नरमी दिखाई थी। चीन ने महत्वपूर्ण खनिजों पर कुछ निर्यात प्रतिबंधों को एक साल के लिए निलंबित करने पर सहमति जताई थी, जबकि अमेरिका ने चीनी सामानों पर कुछ टैरिफ घटाने और चीन को बड़ी मात्रा में अमेरिकी सोया खरीदने की अनुमति देने की घोषणा की थी।
शी जिनपिंग ने वार्ता के दौरान कहा कि दोनों देशों को इस गति को बरकरार रखना चाहिए और दक्षिण कोरिया में हुई बैठक ने चीन–अमेरिका संबंधों के विशाल जहाज की दिशा सुधारने में मदद की है। ट्रंप ने भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा- हमारी दक्षिण कोरिया बैठक के बाद दोनों पक्षों ने आपसी समझौतों को अपडेट रखने में अच्छी प्रगति की है। अब हम बड़े मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।
दुर्लभ खनिजों पर साझेदारी की कोशिश
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने हाल में कहा था कि वाशिंगटन थैंक्सगिविंग तक चीन के साथ दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति को लेकर एक समझौता अंतिम रूप देना चाहता है। दुर्लभ खनिजों के खनन और प्रसंस्करण पर चीन की वैश्विक पकड़ है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और रक्षा क्षेत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
ताइवान ने चीन को दिया स्पष्ट संदेश
मंगलवार को ताइवान के प्रधानमंत्री चो जोंग-ताई ने बीजिंग के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि चीन में किसी भी तरह की वापसी ताइवान के 2.3 करोड़ नागरिकों के लिए कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा- रिपब्लिक ऑफ चाइना, ताइवान, एक पूर्णत: संप्रभु और स्वतंत्र देश है। 23 मिलियन लोगों के लिए ‘वापसी’ कोई विकल्प नहीं है- यह बिल्कुल स्पष्ट है।
जापान से विवाद और बढ़ा तनाव
पिछले कुछ हफ्तों में ताइवान को लेकर चीन और जापान के बीच राजनयिक तनाव बढ़ गया है। दरअसल जापान की नई प्रधानमंत्री साने ताकाइची ने हाल ही में यह संकेत दिया था कि ताइवान पर किसी हमले की स्थिति में जापान सैन्य हस्तक्षेप कर सकता है। इस बयान पर बीजिंग ने कड़ा रुख अपनाया है। इसके चलते जापान में चीनी पर्यटकों की संख्या घटी है, जापानी समुद्री खाद्य पर प्रतिबंध लगाया गया है और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।
यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा
दोनों नेताओं की बातचीत में यूक्रेन युद्ध भी शामिल रहा। ट्रंप ने कई बार इस संघर्ष को समाप्त करने पर जोर दिया है। चीन खुद को इस युद्ध का तटस्थ पक्ष बताता है और उसने बातचीत के माध्यम से समाधान का समर्थन दोहराया। ट्रंप ने यह भी पुष्टि की है कि वे अप्रैल में चीन यात्रा करेंगे और शी जिनपिंग 2026 में अमेरिका आएंगे। हालांकि चीन ने इन दौरे की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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