ताइवान में उठी भारत विरोधी आवाज, ऐक्शन में आई वहां की सरकार; क्या जवाब दिया?
ताइवान में भारतीय कामगारों को लेकर हुई नस्लभेदी टिप्पणियों और विवादित होर्डिंग्स पर वहां की सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। TECC ने बयान जारी कर विरोधियों को सख्त लहजे में लताड़ा। जानिए क्या है पूरा मसला।

ताइवान में भारतीय प्रवासी मजदूरों को लेकर उठी कुछ विरोध की आवाजों और नस्लीय टिप्पणियों पर ताइवान सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। भारत में ताइवान के दूतावास के रूप में काम करने वाले ताइपे आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्र (TECC) ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन घटनाओं की निंदा की है और स्पष्ट किया है कि कुछ व्यक्तियों की यह सोच ताइवान के आधिकारिक रुख को नहीं दर्शाती।
पूरा मसला क्या है?
यह पूरा विवाद ताइवान में भारतीय कामगारों को नौकरी देने की नीति और मई 2026 में सामने आई एक ताजा नस्लभेदी घटना से जुड़ा है।
विवादित होर्डिंग: हाल ही में ताइवान के काऊशुंग शहर में स्थानीय परिषद चुनाव के एक निर्दलीय उम्मीदवार ली हंग-यी ने एक बेहद आपत्तिजनक चुनाव प्रचार होर्डिंग लगाया। इस होर्डिंग में एक पगड़ीधारी व्यक्ति और उल्टे भारतीय झंडे को 'प्रतिबंध' (No) के निशान के साथ दिखाया गया था।
गलत बयानबाजी और विरोध: उम्मीदवार ने तर्क दिया कि वह ताइवान सरकार द्वारा भारतीयों को काम के लिए बुलाने की नीति के खिलाफ है। इसके साथ ही, ताइवान के मुख्य विपक्षी दल (KMT) के कुछ नेताओं ने भी बिना किसी ठोस आधार के यह दावा किया कि भारतीय मजदूरों के आने से स्थानीय स्तर पर "महिलाओं की सुरक्षा" खतरे में पड़ सकती है।
सोशल मीडिया पर रोष: इस होर्डिंग और टिप्पणियों की तस्वीर वायरल होने के बाद, ताइवान में रहने वाले भारतीयों और न्यायप्रिय स्थानीय नागरिकों ने इसे "खुला नस्लवाद" करार दिया। लोगों के भारी विरोध के बाद ताइवान सरकार को तत्काल हरकत में आना पड़ा।
भारत-ताइवान प्रवासी मजदूर समझौता (MoU)
ताइवान वर्तमान में गंभीर लेबर शॉर्टेज (श्रमिकों की कमी) और तेजी से बूढ़ी होती आबादी की समस्या से जूझ रहा है। अपनी फैक्ट्रियों, निर्माण क्षेत्र और टेक कंपनियों को सुचारू रूप से चलाने के लिए ताइवान ने भारत की ओर रुख किया है।
समझौता: दोनों देशों के बीच फरवरी 2024 में एक महत्वपूर्ण सहमति पत्र (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे, जिसके तहत भारतीय श्रमिकों को ताइवान में काम करने की अनुमति दी गई है।
ताइवान के श्रम मंत्रालय की ताजा जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक और स्वास्थ्य संबंधी कागजी कार्रवाई पूरी हो रही है और जल्द ही लगभग 1,000 भारतीय कामगारों का पहला जत्था ताइवान पहुंचने वाला है। इसी प्रक्रिया के बीच ताइवान के कुछ राजनीतिक धड़ों ने अपने चुनावी फायदे के लिए इसका विरोध शुरू कर दिया।
TECC का कड़ा संदेश
विवाद बढ़ता देख TECC (ताइपे आर्थिक एवं सांस्कृतिक केंद्र) ने अपने बयान में स्थिति को स्पष्ट करते हुए ताइवान सरकार का पक्ष रखा है।
यह ताइवान का आधिकारिक रुख नहीं: TECC ने स्पष्ट किया है कि कुछ व्यक्तियों द्वारा की गई भेदभावपूर्ण टिप्पणियां या लगाए गए पोस्टर ताइवान के आधिकारिक स्टैंड का प्रतिनिधित्व बिल्कुल नहीं करते हैं।
लोकतंत्र और समावेशिता: बयान में कहा गया है कि ताइवान लोकतंत्र, समावेशिता और विविधता के मूल्यों को संजोता है। ताइवान सरकार भारत और ताइवान के लोगों के बीच सांस्कृतिक और व्यापारिक संबंधों का पूरी तरह से समर्थन करती है।
नस्लवाद की सख्त निंदा: TECC ने किसी भी प्रकार के पूर्वाग्रह, नस्लवाद (racism) और भेदभाव की कड़ी निंदा की है और इस घटना पर गहरा खेद व्यक्त किया है।
योजना पर काम जारी रहेगा: ताइवान भारतीय प्रवासी मजदूरों को लाने की अपनी योजना के प्रति प्रतिबद्ध है। TECC ने भरोसा दिलाया है कि वे दोनों पक्षों के बीच आपसी समझ बढ़ाने और आगे के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए निरंतर काम करते रहेंगे।
ताइवान की सरकार ने अपने इस बयान से साफ कर दिया है कि मुट्ठी भर लोगों की नस्लभेदी राजनीति दोनों देशों के बीच मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों और रोजगार के नए अवसरों को प्रभावित नहीं कर सकती।
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