
ताइवान में पकड़ा गया ‘जिनपिंग का जासूस’, खुफिया जानकारी देने के आरोप में रिपोर्टर गिरफ्तार
चीन के साथ बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य खतरे के बीच ताइवान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गया है। इसी कड़ी में ताइवान की जांच एजेंसियों ने एक प्रमुख टीवी रिपोर्टर को चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में हिरासत में ले लिया है।
चीन के साथ बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य खतरे के बीच ताइवान अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर बेहद सतर्क हो गया है। इसी कड़ी में ताइवान की जांच एजेंसियों ने एक प्रमुख टीवी रिपोर्टर को चीन के लिए जासूसी करने के आरोप में हिरासत में ले लिया है। रिपोर्टर पर आरोप है कि उसने सेना के मौजूदा अधिकारियों को रिश्वत देकर संवेदनशील सैन्य जानकारी मुख्य भूमि चीन के व्यक्तियों तक पहुंचाई। यह गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है जब स्वशासी द्वीप ताइवान चीन की संभावित सैन्य घुसपैठ और जासूसी के खिलाफ अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में जुटा है।
ताइवान के चियाओटौ (कियाओतौ) जिला अभियोजन कार्यालय ने शनिवार (17 जनवरी 2026) को बयान जारी कर बताया कि जिला अदालत ने उपनाम 'लिन' वाले एक टेलीविजन रिपोर्टर और सेना के पांच वर्तमान तथा सेवानिवृत्त अधिकारियों की हिरासत का आदेश दिया है। अभियोजन पक्ष ने रिपोर्टर की पूरी पहचान सार्वजनिक नहीं की, लेकिन सीटीआई टीवी (CTi TV) ने पुष्टि की कि उनके रिपोर्टर लिन चेन-यू (Lin Chen-you) को हिरासत में लिया गया है। चैनल ने मामले के विवरण से अनभिज्ञता जताई और निष्पक्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया की मांग की है। चैनल ने कहा है कि ईश्वर ताइवान की रक्षा करे।
अभियोजकों के मुताबिक, लिन ने चीन से प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल कर मौजूदा सैन्य अधिकारियों को कई बार हजारों से लेकर दसियों हजार ताइवानी डॉलर (कुछ सौ अमेरिकी डॉलर के बराबर) की रकम रिश्वत के रूप में दी। बदले में उन अधिकारियों से 'चीनी व्यक्तियों' को सैन्य संबंधी गोपनीय जानकारी उपलब्ध कराई गई। जांच में यह अभी स्पष्ट नहीं हुआ है कि वे चीनी व्यक्ति कौन थे या उनका चीन की सरकार/खुफिया एजेंसियों से सीधा संबंध था या नहीं। शुक्रवार को रिपोर्टर और नौ वर्तमान/सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों के परिसरों पर छापेमारी की गई थी, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, भ्रष्टाचार और गोपनीय जानकारी के खुलासे से जुड़े उल्लंघनों की जांच हो रही है।
बता दें कि लिन चेन-यू राजनीतिक रिपोर्टर और एंकर हैं, जो ताइवान की विधायिका (विधानसभा) की कवरेज करते थे। गौरतलब है कि पत्रकारों पर ऐसे आरोप असामान्य हैं, क्योंकि ताइवान में जासूसी के ज्यादातर मामले सैन्य या सरकारी अधिकारियों से जुड़े होते हैं।

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