Hindi Newsविदेश न्यूज़Switzerland refuses to impose inheritance tax know About Rahul Gandhi Khatkhat scheme
राहुल गांधी वाली 'खटाखट' योजना स्विट्जरलैंड में फ्लॉप; जनता ने कहा- जो मेरा है, वो मेरा है

राहुल गांधी वाली 'खटाखट' योजना स्विट्जरलैंड में फ्लॉप; जनता ने कहा- जो मेरा है, वो मेरा है

संक्षेप:

भारत में राहुल गांधी गरीब महिलाओं के खाते में खटाखट एक लाख रुपये सालाना डालने का वादा कर रहे थे, वहीं स्विस आल्प्स में समाजवादी पार्टियां अरबपतियों की विरासत और बड़े गिफ्ट्स पर 50% इनहेरिटेंस टैक्स लगवाना चाहती थी।

Dec 01, 2025 05:20 pm ISTDevendra Kasyap लाइव हिन्दुस्तान
share Share
Follow Us on

स्विट्जरलैंड ने राहुल गांधी की 'खटाखट' स्कीम को जोरदार झटका दिया है। हैरान हो गए न! पहली नजर में झटका तो लगेगा ही, लेकिन हुआ यही है। दरअसल, 30 नवंबर 2025 को हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह में दुनिया के सबसे अमीर देश स्विट्जरलैंड के 78% से अधिक मतदाताओं ने उस धन-पुनर्वितरण प्रस्ताव को धाराशायी कर दिया, जो राहुल गांधी की 2024 वाली नकद हस्तांतरण वाली 'खटाखट' योजना से काफी हद तक मिलता-जुलता था।

प्यार से लेकर प्रमोशन तक 2026 का पूरा हाल जानें ✨अभी पढ़ें

भारत में राहुल गांधी गरीब महिलाओं के खाते में 'खटाखट' एक लाख रुपये सालाना डालने का वादा कर रहे थे, वहीं स्विस आल्प्स में समाजवादी पार्टियां अरबपतियों की विरासत और बड़े गिफ्ट्स पर 50% इनहेरिटेंस टैक्स लगवाना चाहती थीं। नतीजा दोनों जगह एक जैसा- जनता ने साफ कह दिया कि जो मेरा है, वो मेरा है।

बता दें कि इस जनमत संग्रह की शुरुआत सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी की युवा शाखा JUSO ने की थी। उनका तर्क था कि देश के सबसे अमीर परिवारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी अकूत दौलत मिलती रहती है, जबकि युवाओं को सिर्फ जलवायु संकट, महंगा जीवन और आर्थिक अनिश्चितता विरासत में मिल रही है। इस टैक्स से मिलने वाला पैसा जलवायु परियोजनाओं पर खर्च होना था।

JUSO का कैंपेन युवाओं से भावनात्मक रूप से जुड़ा। उनका नारा था कि अमीरों को अरबों की विरासत मिलती है, हमें संकट मिलता है। फिर भी नतीजे बता रहे हैं कि भले ही लोग असमानता से चिंतित हों, लेकिन स्विट्जरलैंड के आर्थिक मॉडल को जोखिम में डालने वाले इतने कठोर टैक्स के लिए वे तैयार नहीं थे।

जनमत संग्रह से पहले इस प्रस्ताव का भारी विरोध हो रहा था। बैंकिंग सेक्टर, बिजनेस कम्युनिटी और स्विस सरकार ने चेताया कि ऐसा टैक्स लगा तो अमीर लोग देश छोड़कर चले जाएंगे, टैक्स कॉम्पिटिटिवनेस खत्म हो जाएगी और अंत में कुल टैक्स कलेक्शन ही घट जाएगा।

वहीं जमनत संग्रह से स्विट्जरलैंड की जनता ने साफ संदेश दे दिया कि मेहनत की कमाई और विरासत पर कोई डाका नहीं चलेगा। माना जा रहा है कि इससे 'खटाखट' का सपना देखने वालों के लिए यह जोरदार झटका है।

Devendra Kasyap

लेखक के बारे में

Devendra Kasyap
देवेन्द्र कश्यप, लाइव हिंदुस्तान में चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर। पटना से पत्रकारिता की शुरुआत। महुआ न्यूज, जी न्यूज, ईनाडु इंडिया, राजस्थान पत्रिका, ईटीवी भारत और नवभारत टाइम्स ऑनलाइन जैसे बड़े संस्थानों में काम किया। करीब 11 साल से डिजिटल मीडिया में कार्यरत। MCU भोपाल से पत्रकारिता की पढ़ाई। पटना व‍िश्‍वविद्यालय से पॉलिटिकल साइंस से ग्रेजुएशन। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क पर सेवा दे रहे हैं। और पढ़ें

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।