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जोहरान ममदानी की चर्चाओं के बीच यह सिख नेता भी अमेरिका में छाया, स्टडी वीजा पर गए और बने मेयर

जोहरान ममदानी की चर्चाओं के बीच यह सिख नेता भी अमेरिका में छाया, स्टडी वीजा पर गए और बने मेयर

संक्षेप:

स्वर्णजीत सिंह खालसा पहले सिख नेता हैं, जिन्हें अमेरिका के इस प्रांत के किसी शहर में यह जिम्मेदारी मिली है। खालसा ने रिपब्लिक कैंडिडेट पीटर नैस्ट्रॉम को हराकर सफलता हासिल की है। अहम बात यह है कि नॉर्विच में सिर्फ 10 परिवार ही हैं और उसके बाद भी खालसा को जीत मिलना दिलचस्प है।

Nov 07, 2025 10:58 am ISTSurya Prakash लाइव हिन्दुस्तान, वॉशिंगटन
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भारतीय मूल के मुसलमान जोरहान ममदानी के अमेरिकी शहर न्यूयॉर्क का मेयर चुने जाने की दुनिया भर में चर्चा है। इस बीच भारतीय मूल के ही एक सिख नेता स्वर्णजीत सिंह खालसा ने भी बड़ी सफलता पाई है। वह अमेरिकी प्रांत कनेक्टिकट के शहर नॉर्विच के मेयर चुने गए हैं। वह पहले सिख नेता हैं, जिन्हें अमेरिका के इस प्रांत के किसी शहर में यह जिम्मेदारी मिली है। खालसा ने रिपब्लिक कैंडिडेट पीटर नैस्ट्रॉम को हराकर सफलता हासिल की है। अहम बात यह है कि नॉर्विच में सिर्फ 10 परिवार ही हैं और उसके बाद भी खालसा को जीत मिलना दिलचस्प है।

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स्वर्णजीत सिंह खालसा 40 वर्षीय अमृतधारी सिख हैं और मूल रूप से उनका परिवार पंजाब के जालंधर का रहने वाला है। उनका परिवार दिल्ली से लेकर पंजाब तक पंथिक मामलों से लेकर राजनीति तक में ऐक्टिव रहा है। उन्होंने अमेरिका में राजनीतिक जीवन की शुरुआत तब की, जब 9/11 के आतंकी हमलों के बाद सिखों को भी उनकी वेश-भूषा के चलते टारगेट किया गया। हेट क्राइम का भी सामना करना पड़ा। स्वर्णजीत सिंह खालसा ने एक लंबा कैंपेन चलाया था कि कैसे सिख समुदाय की एक अलग पहचान है। इसके बाद वह स्थानीय मसले भी उठाने लगे और धीरे-धीरे अमेरिका के नॉर्विच शहर में एक लोकप्रिय चेहरा बन गए।

FBI ने भी किया था स्वर्णजीत सिंह खालसा का सम्मान

उनकी ओर से लगातार प्रयास किए गए कि नॉर्विच समेत अमेरिका में सहिष्णुता और सामुदायिक भावना को प्रोत्साहित किया जाए। उनके प्रयासों का परिणाम था कि अमेरिकी एजेंसी एफबीआई की ओर से 2017 में उन्हें कम्युनिटी लीडरशिप अवॉर्ड मिला था। कुल 56 लोगों को ये सम्मान मिले थे, जिनमें से वह अकेले भारतीय थे। उनका मुख्य प्रयास यह था कि अमेरिकियों को बताया जाए कि सिखों की एक अलग पहचान है। वे वैसे नहीं हैं, जैसी इमेज उनके बारे में है। खासतौर पर दाढ़ी और पगड़ी के चलते उनके बारे में पूर्वाग्रह रखने वाले लोगों को उन्होंने जागरूक किया।

जालंधर के कॉलेज से पढ़े और फिर स्टडी वीजा पर गए थे अमेरिका

स्वर्णजीत सिंह खालसा के पिता परमिंदर पाल सिख इंटरनेशल सोसायटी में हैं। उन्होंने बेटे की सफलता का जिक्र सोशल मीडिया पर भी किया है। परमिंदर ने बताया कि उनके बेटे ने जालंधर के डीएवी इंजीनियरिंग कॉलेज से पढ़ाई की थी। इसके बाद वह स्टडी वीजा पर अमेरिका चले गए थे। अमेरिका में ही स्वर्णजीत सिंह ने कंप्यूटर इंजीनियरिंग में मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। वहीं पर उन्होंने लुधियाना की ही रहने वाली सिख युवती से विवाह किया था। फिलहाल वह नॉर्विच में कंस्ट्रक्शन का बिजनेस करते हैं। वह जिस नॉर्विच शहर में रहते हैं, वह अमेरिका के उन शहरों में से एक है, जहां लोगों की प्रति व्यक्ति आय काफी ज्यादा है।

Surya Prakash

लेखक के बारे में

Surya Prakash
दुनियादारी में रुचि पत्रकारिता की ओर खींच लाई। समकालीन राजनीति पर लिखने के अलावा सामरिक मामलों, रणनीतिक संचार और सभ्यतागत प्रश्नों के अध्ययन में रुचि रखते हैं। करियर की शुरुआत प्रिंट माध्यम से करते हुए बीते करीब एक दशक से डिजिटल मीडिया में हैं। फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान में नेशनल, इंटरनेशनल डेस्क के इंचार्ज हैं। और पढ़ें

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