ईरान में 46 साल बाद ऐसा आंदोलन, बदल सकता है पूरी दुनिया का पॉलिटिकल मैप; तेल बाजार पर असर
ईरान में सत्ता विरोधी लहर 1979 के बाद सबसे तेज है। पूरी दुनिया की नजर ईरान पर है। अगर ईरान की सत्ता में परिवर्तन होता है तो इससे बड़ा भूराजनीतिक बदलाव होगा और दुनियाभर का बाजार प्रभावित होगा।
ईरान में इस समय जो कुछ भी चल रहा है उसपर पूरी दुनिया की निगाहें टिकी हैं। दुनियाभर के लोगों को लगता है कि जनता ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक उखाड़ फेंकेगीऔर इसके बाद जियोपॉलिटिक्स और एनर्जी मार्केट में बड़ा बदलाव आने वाला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों में अब तक 600 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। वहीं अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाने की घोषणा कर दी है।
यह पहली बार नहीं है कि जब ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामनेई की सत्ता के खिलाफ विरोध की आग भड़की हो, लेकिन इस बार यह सत्ताविरोधी लहर काफी ताकतवर है। 9 करोड़ की आबादी वाले इस देश में इस समय सड़कें प्रदर्शनकारियों से भरी पड़ी हैं। राजधानी तेहरान समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शनकारी काफी उग्र हो गए हैं। अमेरिका में बैठे बैठे पूर्व शाह के बेटे रजा पहलवी भी आंदोलनकारियों को उकसा रहे हैं। इसके अलावा ईरान की जनता अब डोनाल्ड ट्रंप से दखल की उम्मीद लगाए हुए है।
ईरान पर हमले को तैयार है अमेरिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक दिन पहले ही कहा है कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि ईरान में उन्हें दखल देना ही पड़ेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका के कमांडरों ने डोनाल्ड ट्रंप को सैन्य कार्रवाई के बारे में जानकारी दी है। ईरान में अशांति की वजह से गुरुवार और शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 63 डॉलर प्रति बैरेल तक का उछाल आ गया। बता दें कि ईरान ओपेक का चौथा सबसे बड़ा तेल का सप्लायर है।
मध्य एशिया के मामलों के एक वरिष्ठ जानकार विलियम उशेर ने कहा कि 1979 के बाद यह ईरान में सबसे बड़ी क्रांति है। उस समय क्रांति के बाद ईरान में इस्लामिक रिपब्लिक का जन्म हुआ था। आज स्थिति यह है कि इस्लामिक रिपब्लिक से लोगों को विश्वास उठ गया है। मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक ईरान में अबतक 10 हजार से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
इजरायल भी गड़ाए है आंखें
अमेरिका लगातार धमकी दे रहा है कि अगर आंदोलनकारियों की हत्या की गई तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने ईरान में उतर पड़ेगा। हाल ही में अमेरिका वेनेजुएला में जिस तरह का अभियान चलाया और तीन घंटे में भी निकोलस मादुरो को पकड़ लिया, उससे अमेरिकी की बातों को नजरअंदाज करना भी मुश्किल हो गया है। उधर इजरायल का भी कहना है कि ईरान की स्थिति पर उसकी नजरें गड़ी हुई हैं। इजरायल भी ईरान हमले को तैयार है। जून महीने में इजरायल और ईरान के बीच लगभग 12 दिनों तक युद्ध चला था और आखिरी में इसमें अमेरिका भी टूट पड़ा था। अगर ईरान में बड़ा परिवर्तन होता है तो इससे पूरी दुनिया प्रभावित होगी।
ईरान की इस्लामिक रिपब्लिक सरकार गाजा में हमास और लेबनान में हिजबुल्लाह और यमन के हूती विद्रिहियों का भी साथ देती है। ऐसे में अमेरिका और इजरायल ईरान की सत्ता बदलवाने का केवल मौका तलाश रहे हैं और वह मौका आ भी गया है। ऐसे में ईरान में सत्ता परिवर्तन वैश्विक स्तर पर समीकरणों को बदलने वाला है।
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अकादमिक योग्यताः अंकित ओझा ने प्रारंभिक शिक्षा नवोदय विद्यालय से पूरी करने के बाद जामिया मिल्ल्लिया इस्लामिया से पत्रकारिता में ही ग्रैजुएशन किया है। इसके बाद भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए किया है। जामिया में अध्ययन के दौरान ही इटैलियन और उर्दू भाषा में भी कोर्स किए हैं। इसके अलावा पंजाबी भाषा की भी अच्छी समझ रखते हैं। विश्वविद्यालय में NCC का 'C सर्टिफिकेट' भी प्राप्त किया है। IIMC और ऑक्सफर्ड से स्वास्थ्य पत्रकारिता का सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया है।
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