न्यूजीलैंड में भूकंप के तेज झटकों से सहमे लोग, सुनामी का अलर्ट जारी; भारत को कितना खतरा?

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एजेंसियों के अनुसार भूकंप का केंद्र 50 किलोमीटर से अधिक गहराई में था। सुनामी के इस अलर्ट का भारत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है क्योंकि वह भारतीय तट से करीब 12000 किलोमीटर की दूरी है।

न्यूजीलैंड में भूकंप के तेज झटकों से सहमे लोग, सुनामी का अलर्ट जारी; भारत को कितना खतरा?

दक्षिणी-पश्चिमी प्रशांत महासागर में स्थित न्यूजीलैंड में आज (गुरुवार, 16 जुलाई को) भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए हैं। अधिकारियों ने बताया है कि रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.9 थी। अधिकारियों के मुताबिक, गुरुवार को साउथ आइलैंड के पश्चिमी तट पर 5.9 तीव्रता के भूकंप के बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई है और लोगों से तुरंत ऊंचे इलाकों में जाने को कहा गया है। जानकारी के मुताबिक भूकंप का केंद्र ते अनाउ शहर से करीब 40 किलोमीटर उत्तर में था। यह इलाका फियोर्डलैंड जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थल का प्रवेश द्वार माना जाता है।

न्यूजीलैंड के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी (NEMA) ने लोगों से समुद्री तट और तटीय इलाकों से दूर जाने की सलाह दी है और कहै है कि जितना जल्दी संभव हो सके सबसे नजदीकी ऊंचे स्थान पर जाकर शरण ले लें। फिलहाल, इस भूकंप से किसी तरह का जनहानि की खबर नहीं है। इस बीच, अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) और जर्मनी के जियोसाइंस रिसर्च सेंटर (GFZ) ने इस भूकंप की तीव्रता 5.9 दर्ज की है। दोनों एजेंसियों के अनुसार भूकंप का केंद्र 50 किलोमीटर से अधिक गहराई में था। सुनामी के इस अलर्ट का भारत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है क्योंकि वह भारतीय तट से करीब 12000 किलोमीटर की दूरी है।

अब सुनामी अलर्ट भी कैंसिल

समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि एजेंसी ने शुरू में भूकंप की तीव्रता 6.3 आंकी थी, जो लोकल टाइम के हिसाब से रात 9.14 बजे (0914 GMT) आया था, फिर इसे घटाकर 5.9 कर दिया गया। अब एजेंसी ने सुनामी अलर्ट भी कैंसिल कर दिया है, NEMA ने कहा कि उसे उम्मीद है कि तटीय इलाकों में "तेज़ और अजीब लहरें और किनारे पर अचानक लहरें" आएंगी। उसने कहा कि लोगों को पानी से, बीच से दूर चले जाना चाहिए, और बंदरगाहों, मरीना और नदियों से दूर रहना चाहिए।

झटका लंबा और तेज था

लोकल रहने वाली मेलिन पुयात, जो ते आनु के फियोर्डलैंड होटल की ड्यूटी मैनेजर हैं ने बताया कि भूकंप "थोड़ा तेज़" था और उन्हें एक मिनट तक कंपन महसूस हुआ। उन्होंने कहा, "होटल में कंपन हो रहा है, लेकिन होटल में कुछ भी हिला नहीं।" एक और स्थानीय निवासी ने लोकल आउटलेट ओटागो डेली टाइम्स को बताया कि भूकंप का झटका लंबा और तेज़ था और ट्रेन जैसा लग रहा था। उन्होंने कहा, "दीवारें ज़रूर हिल रही थीं।"

Pramod Praveen

लेखक के बारे में

Pramod Praveen

प्रमोद कुमार प्रवीण देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं और राजनीतिक हलचलों पर चिंतन-मंथन करने वाले और पैनी पकड़ रखने वाले हैं। ईटीवी से पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की। कुल करीब दो दशक का इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम करने का अनुभव रखते हैं। संप्रति लाइव हिन्दुस्तान में विगत तीन से ज्यादा वर्षों से समाचार संपादक के तौर पर कार्यरत हैं और अमूमन सांध्यकालीन पारी में बहुआयामी पत्रकारीय भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप से पहले NDTV, जनसत्ता, ईटीवी, इंडिया न्यूज, फोकस न्यूज, साधना न्यूज और ईटीवी में कार्य करने का अनुभव है। कई संस्थानों में सियासी किस्सों का स्तंभकार और लेखक रहे हैं। विश्वविद्यालय स्तर से लेकर कई अकादमिक, शैक्षणिक और सामाजिक संगठनों द्वारा विभिन्न मंचों पर अकादमिक और पत्रकारिता में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित भी हुए हैं। रुचियों में फिल्में देखना और पढ़ना-पढ़ाना पसंद, सामाजिक और जनसरोकार के कार्यों में भी रुचि है।

अकादमिक योग्यता: भूगोल में जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर और संवेदनशील विषय पर पीएचडी उपाधिधारक हैं। इसके साथ ही पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर भी हैं। पीएचडी शोध का विषय- 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन-एक भौगोलिक अध्ययन' रहा है। शोध के दौरान करीब दर्जन भर राष्ट्रीय और अंततराष्ट्रीय सम्मेलनों में शोध पत्र पढ़ने और प्रस्तुत करने का अनुभव है। भारतीय विज्ञान कांग्रेस में भी शोध पोस्टर प्रदर्शनी का चयन हो चुका है। शोध पर आधारित एक पुस्तक के लेखक हैं। पुस्तक का नाम 'मध्य गंगा घाटी में जलवायु परिवर्तन' है। पत्रकारिता में आने से पहले महाविद्यालय स्तर पर शिक्षण कार्य भी कर चुके हैं।

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