ईरान में फंसे, अब घर में भी घिरे ट्रंप; अमेरिका में विरोध के लिए सड़कों पर उतरे लाखों लोग
ईरान युद्ध में उलझे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की परेशानी बढ़ गई है। अमेरिका में उनके खिलाफ बड़ी संख्या में प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। नो किंग्स नाम से हो रहे इन प्रदर्शनों का असर अमेरिका के सभी राज्यों में देखने को मिल रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ईरान युद्ध के बीच अब अमेरिका में भी घिरते हुए नजर आ रहे हैं। शनिवार को अमेरिका के कई शहरों में ट्रंप प्रशासन के विरोध में रैलियां निकाली गईं। प्रदर्शनकारियों ने इन्हें 'नो किंग्स'विरोध कहा है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक यह आंदोलन अमेरिका के सभी राज्यों में हुआ है। इस आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों में करीब 90 लाख लोगों के शामिल हुए हैं। फिलाडेल्फिया, न्यूयॉर्क सिटी, जर्सी सिटी, टैकोमा और मिनेसोटा के कई हिस्सों से वीडियो सामने आए हैं।
ट्रंप के खिलाफ फैलता आंदोलन
ट्रंप की नीतियों के खिलाफ लगातार प्रदर्शन कर रहे 'नो किंग्स'के आयोजकों ने कहा कि वह केवल अमेरिका में ही नहीं बल्कि यूरोप और लैटिन अमेरिका के भी कई देशों में रैलियां आयोजित कर रहे हैं। इस प्रदर्शन को प्रमुख रूप से संभालने वाले लीह ग्रीनबर्ग ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ट्रंप प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदम सिर्फ डेमोक्रेट्स को ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति को परेशान कर रहे हैं। इनकी हरकतों से बड़े से बड़े और छोटे से छोटे गांव के लोग भी परेशान हैं। इनकी हरकतें हद पार कर रही हैं।
इस प्रदर्शन का असर सबसे ज्यादा अमेरिका की राजधानी में देखने को मिला। यहां पर प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल से नेशनल मॉल तक मार्च निकाला। इसके साथ ही उन्होंने 'पुट डाउन था क्राउन, क्लाउन' और 'रिजीम चेंज बिगिन्स एट होम' के नारे भी लगाए और नो किंग्स के पोस्टर लहराए। न्यूयॉर्क सिटी में न्यूयॉर्क सिविल लिबर्टीज यूनियन की डोन्ना लिबरमैन ने ट्रंप प्रशासन की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, “वे चाहते हैं कि हम विरोध करने से डरें… लेकिन वे गलत हैं, पूरी तरह गलत।” उन्होंने ट्रंप को देश का ‘बुली इन चीफ’ भी बताया और कहा कि मिनियापोलिस के लोगों ने “खुद को राजा समझने वाले को पीछे हटने पर मजबूर किया।”
विदेशों में भी प्रदर्शन
अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ यह प्रदर्शन केवल अमेरिका तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि रोम,पेरिस और लंदन जैसे शहरों में भी देखने को मिले। रिस में आयोजक एडा शेन ने कहा, “मैं ट्रंप के सभी अवैध, अनैतिक और लापरवाह युद्धों के खिलाफ विरोध कर रही हूं।” वहीं रोम और लंदन में प्रदर्शनकारियों ने ईरान युद्ध के खिलाफ ‘ए वर्ल्ड फ्री फ्रॉम वॉर्स’, ‘स्टॉप द फॉर राइट’ और ‘स्टैंड अप टू रेसिज्म’ जैसे बैनर उठाए।
देश-विदेश में हो रहे इन प्रदर्शनों को लेकर वाइट हाउस की प्रतिक्रिया भी सामने आई। वाइट हाउस ने इन प्रदर्शनों को जनता की आवाज मानने से इनकार करते हुए इसे वामपंथी फंडिंग का नेटवर्क करार दिया। प्रवक्ता जैक्शन ने कहा, "इन ट्रंप डिरेंजमैंट थैरेपी सेशन में केवल वही लोग दिलचस्पी रखते हैं, जिन्हें इसमें जाने के लिए और कवर करने के लिए पैसा मिलता है।"
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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