होर्मुज स्ट्रेट में फिर गोलीबारी, ईरान ने मालवाहक जहाज पर पर किया भीषण हमला
अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक नाजुक समझौते के बाद तेहरान ने एक बार फिर से होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर हमला किया है। सिंगापुर के झंडे वाले जहाज पर हुए इस हमले के बाद शांति समझौता एक बार फिर से खतरे में आ गया है। अभी तक ट्रंप का इस पर कोई बयान नहीं आया है।

दुनिया के 20 फीसदी तेल कारोबार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में एक बार फिर से फायरिंग हुई है। सामने आई जानकारी के मुताबिक ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने सिंगापुर के झंडे वाले एक मालवाहक जहाज 'एवर लवली' को निशाना बनाया है। यह हमला ऐसे समय में किया गया है, जब ईरान और अमेरिका दोनों ही एक नाजुक समझौते को लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। अब इस तरह से एक मालवाहक जहाज पर ईरान द्वारा किया गया हमला शांति के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि आईआरजीसी ने मालवाहक जहाज पर हमला किया है। फिलहाल इस हमले को लेकर अमेरिकी सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं दूसरी तरफ ईरान की इस्लामिक सरकार ने भी इस पर कोई जानकारी नहीं दी है। हालांकि, यह हमला ऐसे समय पर हुआ है, जब समझौते के बाद कुछ समय पहले ही ईरान ने चेतावनी दी थी कि उसकी इजाजत के बिना होर्मुज से निकलने वाले जहाजों के ऊपर कार्रवाई की जा सकती है।
इस हमले की ज्यादा जानकारी देते हुए ब्रिटेन की नेवी ने बताया कि ओमान के तट के पास मालवाहक जहाज से एक प्रोजेक्टाइल टकराने की जानकारी मिली है। इस महले में जहाज का कंट्रोल रूम तबाह हो गया है। हालांकि अभी तक किसी की जान जाने की जानकारी नहीं मिली है।
शांति समझौते के लिए खतरा?
अमेरिका और ईरान के बीच भले ही शांति समझौता हो गया हो, लेकिन भरोसे की कमी अभी भी साफ तौर पर नजर आ रही है। ईरान की तरफ से इस जहाज पर किए जाने के बाद अब अमेरिका की तरफ से कैसा रिएक्शन आता है, यह देखना होगा। राष्ट्रपति ट्रंप लगातार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि शांति समझौते के बाद होर्मुज से लगातार तेल सप्लाई हो रहा है और जहाजों के लिए खतरा भी खत्म हो गया है। लेकिन इस एक हमले ने ट्रंप के शांति समझौते और उनके शांति वाले दावे की पोल खोल दी है।
ईरान ने पहले ही दे दी थी चेतानी
ईरान अपने दशकों पुराने अमेरिकी हमले के डर का सामना कर चुका है। इस हमले में उसे भले ही बहुत कुछ गवाना पड़ा हो, लेकिन साथ में एक चीज हासिल भी हुई है। और वह है होर्मुज के ऊपर पूरा कंट्रोल। राष्ट्रपति ट्रंप चाहे कुछ भी कहें, लेकिन सच्चाई तो यही है कि ईरान युद्ध के पहले होर्मुज पर ज्यादा ध्यान नहीं देता था, लेकिन अब वह इसे अपने हाथ में रखकर दुनिया से अपनी बात मनवाने की ताकत रखता है। यह हमला इसी बात का उदाहरण है।
शांति समझौते के बाद बाद ट्रंप होर्मुज के खुलने का ऐलान कर रहे थे, वहीं तेहरान की तरफ से चेतावनी जारी की गई थी कि होर्मुज से वही जहाज सुरक्षित निकल सकते हैं, जो तेहरान के बताए अनुसार चलेंगे। अगर ऐसा नहीं होता है, तो उन पर हमला किया जा सकता है। अब सिंगापुर के जहाज पर हमला करके ईरान ने अपनी मंशा साफ कर दी है।
लेखक के बारे में
Upendra Thapakउपेंद्र ने डिजिटल पत्रकारिता की शुरुआत लाइव हिन्दुस्तान से की है। पिछले एक साल से वे होम टीम में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर कार्यरत हैं। उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024, ऑपरेशन सिंदूर और कई राज्यों के विधानसभा चुनावों की कवरेज की है। पत्रकारिता की पढ़ाई भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), नई दिल्ली (बैच 2023-24) से पूरी करने वाले उपेंद्र को इतिहास, अंतर्राष्ट्रीय संबंध, राजनीति, खेल, विज्ञान और समसामयिक घटनाओं से जुड़े विषयों में गहरी रुचि है। स्नातक स्तर पर बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई करने के कारण उन्हें मेडिकल और वैज्ञानिक विषयों की भाषा की भी अच्छी समझ है। वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के भिंड जिले के निवासी हैं।
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