स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है या खुल गया? जानें कल 20 जहाजों के साथ ईरान ने क्या किया

Apr 18, 2026 12:10 pm ISTHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य मुद्दों पर अमेरिका के साथ समझौता नहीं कर लेता, तब तक अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी पूरी ताकत से जारी रहेगी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है या खुल गया? जानें कल 20 जहाजों के साथ ईरान ने क्या किया

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाले दूसरे दौर की वार्ता से ठीक पहले रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेस ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की घोषणा तो कर दी गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति अभी भी बेहद तनावपूर्ण और अनिश्चित बनी हुई है। दावों के उलट, शुक्रवार को कई जहाजों को होर्मुज पार करने की कोशिश करते और फिर असफल होकर वापस लौटते देखा गया।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार शाम कंटेनर जहाजों, बल्क कैरियर और टैंकरों सहित लगभग 20 जहाजों का एक समूह खाड़ी के रास्ते होर्मुज की ओर बढ़ा। इनमें फ्रांसीसी शिपिंग दिग्गज 'CMA CGM' के तीन जहाज भी शामिल थे। युद्ध की शुरुआत के बाद से यह अब तक का सबसे बड़ा प्रयास था, लेकिन इनमें से अधिकांश जहाजों को रास्ते से ही वापस मुड़ना पड़ा।

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जहाजों ने अपना रास्ता क्यों बदला, लेकिन समुद्री सुरक्षा समूहों का कहना है कि वे अभी भी इस बात की पुष्टि कर रहे हैं कि क्या यह मार्ग वास्तव में सुरक्षित है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के प्रमुख आर्सेनियो डोमिंगुएज ने स्पष्ट किया कि अभी और स्पष्टीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि जहाजों के लिए कोई जोखिम नहीं है और सब कुछ अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार हो रहा है।"

ट्रंप का कड़ा रुख

एक तरफ जहां ईरान ने इसे खोलने की बात कही, वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को कहा कि यह पूरी तरह से खुला है। हालांकि, उनके बयान में एक बड़ा पेंच भी था। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम सहित अन्य मुद्दों पर अमेरिका के साथ समझौता नहीं कर लेता, तब तक अमेरिकी नौसैनिक घेराबंदी पूरी ताकत से जारी रहेगी।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, गाइडेड-मिसाइल विध्वंसक यूएसएस माइकल मर्फी अरब सागर में गश्त कर रहा है। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि अब तक 21 जहाजों ने अमेरिकी सेना के निर्देशों का पालन करते हुए ईरान वापस लौटने का फैसला किया है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि कागजों पर रास्ता खुलने के बावजूद समुद्र में अमेरिकी पाबंदियां बेहद सख्त हैं।

ईरान की क्या हैं शर्तें

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को लेबनान और इजरायल के बीच 10 दिवसीय युद्धविराम के साथ ही होर्मुज को खोलने की घोषणा की थी। लेकिन ईरान की इस उदारता के पीछे भी कई शर्तें छिपी हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, जहाजों को केवल एक निर्धारित मार्ग से गुजरने की अनुमति होगी, जिसे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) द्वारा तय किया गया है। इसके अलावा, सैन्य जहाजों का प्रवेश अभी भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि खतरा अभी टला नहीं है। 'कंट्रोल रिस्क' के निदेशक कॉर्मैक मैकगारी ने कहा कि सुरंगों का खतरा अभी भी बना हुआ है, इसलिए अराघची के बयान से जमीनी स्तर पर कुछ खास नहीं बदलता।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता असर

होर्मुज का बंद होना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20% तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी संकरे रास्ते से गुजरता है। युद्ध से पहले यहां से रोजाना करीब 138 जहाज गुजरते थे, जो मार्च में घटकर 100 से भी कम रह गए।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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