स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना नया अखाड़ा, ईरान-US के बीच दोबारा युद्ध छिड़ने के मिल रहे 3 संकेत

Himanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर ही सीजफायर को आगे बढ़ाया था और इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की पुष्टि भी की थी। इसके बावजूद, ईरान ने वार्ता की मेज पर आने से इनकार कर दिया है।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना नया अखाड़ा, ईरान-US के बीच दोबारा युद्ध छिड़ने के मिल रहे 3 संकेत

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा तनाव एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ शांति वार्ताओं की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में सैन्य टकराव तेज हो गया है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने अमेरिका पर पाखंड और वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए वार्ता में विफलता के लिए तीन प्रमुख कारणों नाकाबंदी, धमकियां और प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन को जिम्मेदार ठहराया है।

स्थित तब और बिगड़ गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अनिश्चितकालीन सीजफायर की घोषणा के बीच ही ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने तीन जहाजों पर हमला कर उन्हें कब्जे में ले लिया। यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा क्षेत्र में एक ईरानी जहाज को जब्त किए जाने के विरोध में की गई मानी जा रही है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, इनमें से दो जहाजों को ईरानी तट की ओर ले जाया गया है, जबकि तीसरा ईरानी तट पर फंसा हुआ है।

पाकिस्तान इस पूरे विवाद में मुख्य वार्ताकार की भूमिका निभा रहा है। हालांकि, तनाव के चलते इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता फिलहाल टल गई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के अनुरोध पर ही सीजफायर को आगे बढ़ाया था और इसमें अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के शामिल होने की पुष्टि भी की थी। इसके बावजूद, ईरान ने वार्ता की मेज पर आने से इनकार कर दिया है।

ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सख्त लहजे में कहा, "ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी करना युद्ध की घोषणा है। अमेरिका की ये हरकतें सीजफायर का उल्लंघन हैं और ईरान अपनी रक्षा करना बखूबी जानता है।"

ईरान के इन हमलों और अमेरिका की सख्त घेराबंदी से दोनों देशों के बीच फिर से युद्ध की स्थिति बनती दिख रही है। इसके लिए तीन संकेत मिल रहे हैं।

1. ईरान का आक्रामक रुख

ईरान यह संकेत दे रहा है कि वह पीछे हटने को तैयार नहीं है। भले ही सीजफायर टूटने से उसकी अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचे, लेकिन ईरान हर अमेरिकी कार्रवाई का जवाब दोगुनी ताकत से देने की नीति पर चल रहा है। ट्रंप द्वारा वार्ता की अपील के बावजूद जहाजों को जब्त करना यह दिखाता है कि ईरान किसी भी दबाव या सर्वनाश की धमकी से डरा नहीं है। ईरान का मानना है कि ट्रंप को कुछ महीनों में मध्यावधि चुनाव का सामना करना है, जबकि IRGC पर ऐसा कोई दबाव नहीं है।

2. होर्मुज बना वैश्विक अर्थव्यवस्था का बंधक

अब इस युद्ध का केंद्र पूरी तरह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बन गया है। ईरान इस जलमार्ग को अपने सबसे बड़े सौदेबाजी के कार्ड के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। वहीं, अमेरिका वार्ता की मेज पर बैठने से पहले ईरान की इस ताकत को बेअसर करना चाहता है। आईएमएफ (IMF) के मुताबिक, यदि यह संघर्ष लंबा खिंचा तो 2026 में वैश्विक विकास दर गिरकर 3.1 प्रतिशत रह सकती है।

3. अति-आत्मविश्वास का जोखिम

ईरान की रणनीति अब तक काम करती दिख रही है, लेकिन इसमें जोखिम भी है। यदि ईरान दुनिया की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाकर वार्ता से पीछे हटता रहा, तो वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ सकता है। ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने के लिए प्रतिबंधों से मुक्ति चाहता है, जो कूटनीतिक अलगाव की स्थिति में संभव नहीं होगा।

Himanshu Jha

लेखक के बारे में

Himanshu Jha

बिहार के दरभंगा जिले से ताल्लुक रखने वाले हिमांशु शेखर झा डिजिटल मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम हैं। विज्ञान पृष्ठभूमि से होने के बावजूद (BCA और MCA), पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून के कारण उन्होंने IGNOU से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया और मीडिया को ही अपना कर्मक्षेत्र चुना।


एक दशक से भी अधिक समय का अनुभव रखने वाले हिमांशु ने देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों जैसे दैनिक भास्कर, न्यूज़-18 और ज़ी न्यूज़ में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में, वे वर्ष 2019 से लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़े हुए हैं।


हिमांशु की पहचान विशेष रूप से राजनीति के विश्लेषक के तौर पर होती है। उन्हें बिहार की क्षेत्रीय राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति की गहरी और बारीक समझ है। एक पत्रकार के रूप में उन्होंने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों और कई विधानसभा चुनावों को बेहद करीब से कवर किया है, जो उनके वृहद अनुभव और राजनीतिक दृष्टि को दर्शाता है।


काम के इतर, हिमांशु को सिनेमा का विशेष शौक है। वे विशेष रूप से सियासी और क्राइम बेस्ड वेब सीरीज़ देखना पसंद करते हैं, जो कहीं न कहीं समाज और सत्ता के समीकरणों को समझने की उनकी जिज्ञासा को भी प्रदर्शित करता है।

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