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गन लॉबी के आगे बेबस हो गया है दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश, अमेरिका में 100 लोगों पर 121 बंदूक

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में शुमार अमेरिका अपने यहां सक्रिय गन लॉबी के आगे बेबस है। अमेरिका के कई राष्ट्रपति समय-समय पर इसे नियंत्रित करने की मंशा जता चुके हैं लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया।

गन लॉबी के आगे बेबस हो गया है दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश, अमेरिका में 100 लोगों पर 121 बंदूक
Himanshu Jhaहिन्दुस्तानThu, 26 May 2022 06:32 AM

दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में शुमार अमेरिका अपने यहां सक्रिय गन लॉबी के आगे बेबस है। अमेरिका के कई राष्ट्रपति समय-समय पर इसे नियंत्रित करने की मंशा जता चुके हैं लेकिन ऐसा अब तक नहीं हो पाया। टेक्सास के स्कूल में फायरिंग की ताजा घटना के बाद मौजूदा राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी कहा है कि इससे निपटने का वक्त आ गया है।

अमेरिका में साल-दर-साल बंदूक से हिंसा के मामले बढ़े हैं। इस देश में आबादी से ज्यादा बंदूकें होना स्थिति की गंभीरता को बताने के लिए काफी है। गन लॉबी के आगे सरकार की बेबसी का आलम ये है कि वर्ष 2020 में बंदूक 45,222 लोगों की जान का दुश्मन बनी। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) और प्यू रिसर्च सेंटर के अनुसार वर्ष 2020 में 43 फीसदी हत्या, 54 फीसदी आत्महत्या और तीन फीसदी अन्य तरह की मौतों का कारण बंदूक है।

आठ फीसदी हत्या के लिए बंदूक दोषी
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2020 में दस में से आठ (79) फीसदी हत्या के मामलों का कारण बंदूक थी। वर्ष 2020 में कुल 24,576 घटनाओं में से 19,384 लोगों की हत्या की वजह बंदूक बनी है। बंदूक से होने वाली मौतों का ये आंकड़ा वर्ष 1968 के बाद सबसे अधिक है। इसी तरह आत्महत्या के कुल 45,979 मामलों में से 53 फीसदी यानी 24,292 मामलों के लिए बंदूक जिम्मेदार है। 1968 से 2017 के बीच बंदूक करीब 15 लाख लोगों की मौत का कारण बनी है।

राष्ट्रपति कहते रहे, लेकिन कुछ बदल नहीं पाए

1. जॉर्ज डब्ल्यू बुश: वर्ष 2001 और 2004 के राष्ट्रपति चुनाव में बुश ने चुनावी मंच से कहा था कि बंदूक खरीदने वालों के इतिहास की जांच की जाएगी। ट्रिगर लॉक कानून बनेगा। 2001 से 2009 तक राष्ट्रपति रहने के दौरान उन्होंने कहा कि बंदूक खरीदने वालों की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 की जाएगी। हालांकि राष्ट्रपति रहते हुए इन किसी भी कानून पर सहमति नहीं बन पाई।

2. बराक ओबामा: वर्ष 2009 से 2017 के बीच राष्ट्रपति रहे बराक ओबामा ने गन कल्चर पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि अब कार्रवाई का समय आ गया है। वर्ष 2012 में कानून बनाया कि पार्क में बंदूक लेकर कोई नहीं जा सकेगा। बंदूक को कार की डिग्गी में बंद करना होगा। नियमों के बावजूद बराक ओबामा के कार्यकाल में भी बंदूक से जुड़ी घटनाएं होती रहीं।

3. डोनाल्ड ट्रंप: 2018 में सांसदों की बैठक में ट्रंप ने कहा था कि आप लोग एनआरए से डरते हैं। बैठक में ट्रंप ने कहा था कि बंदूक बेचने या खरीदने को लेकर मानसिक रूप से बीमार लोगों का इतिहास जानने को लेकर कड़े कानून की जरूरत है। सितंबर 2015 में ट्रंप ने कहा की बंदूक और गोली पर प्रतिबंध अमेरिका के लिए नाकामी होगी।

4. जो बाइडन: अब मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति भी गन लॉबी के खिलाफ कार्रवाई की मंशा जता रहे हैं। उन्होंने टेक्सास की घटना के बाद कहा कि एक राष्ट्र होने के नाते आखिर कब हम गन लॉबी के खिलाफ खड़े होंगे। भगवान के नाम पर अब हमें ऐसा करना होगा जो होना चाहिए। मैं गन कल्चर को लेकर बीमार और थका हुआ महसूस कर रहा हूं। अब हमें निर्णय लेना होगा। दो सप्ताह के भीतर दूसरी घटना अब इस बात का संकेत है कि हमें लोगों की सुरक्षा के लिए कानून बनाना होगा।

सवालों के घेरे में बंदूक नीति
अमेरिका का नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) वहां के राजनेताओं से भी शक्तिशाली है। एनआरए हर साल 25 करोड़ डॉलर खर्च करता है जो बंदूक पर रोक लगाने की मांग करने वाली सभी संस्थाओं द्वारा खर्च की जाने वाली रकम से भी अधिक है। बंदूक नीति को प्रभावी बनाए रखने के लिए एनआरए हर साल 30 लाख डॉलर खर्च करता है। वर्ष 2014 में अकेले 33 लाख डॉलर की रकम खर्च की थी।

राजनीति में समर्थक भी, विरोधी भी
एनआरए की स्थापना वर्ष 1871 में हुई थी। 1934 में एनआरए ने पॉलिटिकल लॉबिंग शुरू की और खुद को और मजबूत बनाने की नींव डाली। वर्ष 1977 में एनआरए ने खुद की पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (पीएसी) की शुरुआत की और राजनेताओं को फंडिंग देने ला। बड़े पैमाने पर फंडिंग और राजनीतिक दखल का ही नतीजा है कि अमेरिका में समय के साथ गन कल्चर हावी होता चला गया।

100 अमेरिकी लोगों पर 121 बंदूक
विश्व बैंक के अनुसार 2020 में अमेरिका की जनसंख्या 33 करोड़ थी। इसके अनुपात में 40 करोड़ बंदूकें थीं। स्वीट्जरलैंड की स्मॉल ऑर्म्स सर्वे के अनुसार अमेरिका में हर 100 व्यक्ति पर 121 बंदूक है। अमेरिकी सेना से 100 गुना और पुलिस से 400 गुना ज्यादा बंदूक और राइफल आम लोगों के पास हैं।

52 फीसदी अमेरिकी चाहते हैं सख्त कानून
गैलप द्वारा किए गए एक सर्वे के अनुसार वर्ष 2020 में बंदूक कानून का समर्थन करने वालों की संख्या 52 फीसदी है जो सख्त बंदूक कानून चाहते हैं। वहीं 35 फीसदी लोग मौजूदा कानून से ही संतुष्ट हैं। 11 फीसदी लोग ये मानते हैं कि कानून और कम सख्त होना चाहिए।

दस अमेरिकी राज्यों में सख्त कानून
अमेरिका के 50 राज्यों में से दस में बंदूक को लेकर नियम कानून हैं। मिनेसोटा और वर्जिनिया दो राज्य हैं जहां बंदूक के इस्तेमाल को लेकर कुछ कानून है। वहीं कैलिफोर्निया, मैसाच्युसेट्स, हवाई, मैरीलैंड, न्यूयॉर्क, वाशिंगटन डीसी, न्यूजर्सी और कनेक्टिक्ट में बंदूक के इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध है।

2022 में शूटिंग की घटनाएं

14 मई: बफेलो में एक व्यक्ति ने सुपरमार्केट में अंधाधुंध गोली चालाकर 10 लोगों की हत्या कर दी।
15 मई: दक्षिणी कैलिफोर्निया की चर्च में गोलीबारी एक व्यक्ति की मौत, पांच लोग घायल।
15 मई: हृास्टून में बाजार में गोलीबारी दो लोगों की मौत।
13 मई: मिलवावुकी में रात के समय गोलीबारी 16 घायल।
12 अप्रैल: ब्रुकलीन में सबसे में फायरिंग दस लोग घायल।
03 अप्रैल: स्कारमेंटों में फायरिंग छह लोगों की मौत, 12 घायल।
19 मार्च: अरकनसास में शूटिंग दो की मौत, 27 घायल।
23 जनवरी: मिलवावुकी में फायरिंग छह की मौत।

कुछ दर्दनाक मास शूटिंग
2017: लास वेगास में शूटिंग के दौरान 58 की मौत
2017 टेक्सास में चर्च में गोलीबारी 26 की मौत
2016: फ्लोरिडा के नाइट क्लब में गोलीबारी 49 की मौत
2012: सैंडी हुक एलीमेंट्री न्यूटाउन शूटिंग 27 की मौत
2007: वर्जिर्निया में शूटिंग 32 लोगों की दर्दनाक मौत

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